
शशि थरूर और द केरल स्टोरी 2 एक सीन।
भारतीय राजनीति और सिनेमा के गलियारों में एक बार फिर विवादों की गूंज सुनाई दे रही है। आगामी फिल्म ‘द केरला स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ की रिलीज से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने इसके मेकर्स पर तीखा हमला बोला है। थरूर ने आरोप लगाया कि यह सीक्वल भी पहली फिल्म की तरह बिना किसी ठोस तथ्य के समाज में नफरत फैलाने वाली और विभाजनकारी कहानियों को बढ़ावा दे रहा है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान थरूर ने पहली फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ को नफरत फैलाने वाली फिल्म करार दिया। उन्होंने कहा कि मूल फिल्म में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के जो दावे किए गए थे, उनका कोई वास्तविक आधार नहीं था।
क्या है शशि थरूर का कहना
शशि थरूर के अनुसार फिल्म में बताए गए आंकड़े सच्चाई से कोसों दूर और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हजारों लोगों के धर्मांतरण की बात बिल्कुल झूठ है। वास्तविकता यह है कि कई सालों में बमुश्किल 30 के आसपास ऐसे मामले सामने आए होंगे। भारत एक बहुत बड़ा देश है और इक्का-दुक्का घटनाओं को प्रोपेगैंडा के तौर पर इस्तेमाल कर एक बड़ी और भयावह कहानी बना देना गलत है।’ शशि थरूर ने अपने बयान में सिनेमा के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने बीते दौर की मशहूर फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण देते हुए कहा कि वह फिल्म सांप्रदायिक सौहार्द और मेलजोल का जश्न मनाती थी, जिसके कारण उसे उस समय मनोरंजन कर (एंटरटेनमेंट टैक्स) में छूट भी दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी बातें कहने का क्या औचित्य है जो लोगों के मन में जहर घोलें और जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना न हो।
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विवाद की जड़ और फिल्म का पक्ष
‘द केरला स्टोरी 2-गोज बियॉन्ड’ आगामी 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। हाल ही में जारी हुए इसके ट्रेलर में राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल की पृष्ठभूमि पर आधारित धर्मांतरण और रेडिकलाइजेशन के विषयों को दिखाया गया है। फिल्म के निर्माताओं का दावा है कि यह फिल्म लक्षित कट्टरपंथ के कड़वे सच को उजागर करती है। अपने प्रमोशनल मटेरियल में मेकर्स ने कड़े शब्दों का उपयोग करते हुए कहा, ‘उन्होंने हमारी बेटियों को निशाना बनाया और उनका भरोसा तोड़ा। इस बार हम चुप नहीं रहेंगे, कहानी अब इससे भी आगे जाएगी। इस बार सहेंगे नहीं… लड़ेंगे।’
कानूनी अड़चनें और राजनीतिक विरोध
कामाख्या नारायण सिंह के निर्देशन में बनी इस फिल्म की पहली किस्त ने जहां 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी का सम्मान पाया था, वहीं इसका सीक्वल अब कानूनी जांच के दायरे में है। फिल्म के ट्रेलर और इसमें केरल के चित्रण को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सेंसर बोर्ड (CBFC) और फिल्म के निर्माताओं को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होनी है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी इस प्रोजेक्ट की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह चौंकाने वाला है कि कैसे सांप्रदायिक कलह भड़काने के उद्देश्य से बनाई गई मनगढ़ंत कहानियों को खुली छूट मिल रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि केरल की सद्भावपूर्ण छवि को आतंक के अड्डे के रूप में दिखाने की इन कोशिशों के खिलाफ एकजुट हों।
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