
रवि किशन
अभिनेता और लोकसभा सांसद रवि किशन ने हाल ही में रिलीज हुए गाने ‘सरके चुनर’ के लिरिक्स में अश्लीलता की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे गीतों को समाज में बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। मंगलवार को एएनआई से बात करते हुए रवि किशन ने धुरंधर फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसने बिना किसी अश्लीलता के हजारों करोड़ का राजस्व अर्जित किया। उन्होंने कहा, ‘संस्कृति और मूल्यों को ठेस पहुंचाने वाली किसी भी अश्लीलता को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। अब, फिल्म निर्माताओं को ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों पर भी विचार करना चाहिए, जो बिना कुछ जोड़े हजारों करोड़ का राजस्व अर्जित कर सकती हैं। ऐसी चीजों को व्यापार के लिए, किसी गीत को बढ़ावा देने के लिए या किसी फिल्म का प्रचार करने के लिए देश में नहीं लाया जाना चाहिए। यह अच्छा विचार नहीं है। मैं इसका विरोध करता हूं।’ गौरतलब है कि कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से फिल्मों में महिलाओं के अपमानजनक चित्रण वाले अश्लील गीतों की अनुमति देने के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
पत्र लिखकर जताई चिंता
कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने सीबीएफसी के क्षेत्रीय निदेशक को लिखे पत्र में फिल्म ‘केडी: द डेविल’ के गीत ‘सरके चुनर तेरी सरके’ में इस्तेमाल किए गए अपमानजनक और अश्लील बोलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पत्र में लिखा है, ‘जनता से प्राप्त शिकायतों के आधार पर, आयोग के संज्ञान में आया है कि कुछ निर्माणाधीन और प्रचारित फिल्मों जैसे ‘केडी-द डेविल’ के गीतों में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले बोलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।’ जनता की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि ऐसी सामग्री फिल्म प्रमाणन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है, जिससे महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आयोग ने आगे कहा, ‘फिल्म प्रमाणन दिशानिर्देशों के अनुसार, महिलाओं को अपमानित करने या अश्लील तरीके से चित्रित करने वाले किसी भी दृश्य या गीत पर सेंसरशिप लागू होती है। इस तरह के उत्तेजक शब्दों का सार्वजनिक प्रसार महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। यह महिलाओं की गरिमा के संवैधानिक अधिकार का भी उल्लंघन है।’ कर्नाटक राज्य आयोग ने प्रमाणन जारी करने से पहले कड़ी जांच और आवश्यक कार्रवाई करने का भी आह्वान किया।
आपत्ति जनक गानों की हो पूरी जांच
पत्र के अंत में कहा गया, ‘इसलिए, यह निवेदन किया जाता है कि ऐसे आपत्तिजनक गीतों और दृश्यों की गहन जांच की जाए और फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया जाए कि वे उक्त फिल्मों को प्रमाण पत्र जारी करने से पहले उन्हें हटा दें/काट दें या संशोधित करें। यह सलाह दी जाती है कि अवैध और अश्लील गीतों की अनुमति देने के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।’ राज्य महिला आयोग ने कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स (केएफसीसी) को एक पत्र लिखकर फिल्मों में अश्लील साहित्य और संवादों के उपयोग पर नियंत्रण का मुद्दा उठाया है, जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।
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