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इस मूवी से पहले फिल्मों में तो होती थी रानी, लेकिन नहीं होती थी उनकी आवाज, फिर…

इस मूवी से पहले फिल्मों में तो होती थी रानी, लेकिन नहीं होती थी उनकी आवाज, फिर…

Image Source : IMDB
आमिर खान और रानी मुखर्जी।

कभी माला बनकर तो कभी सुहानी शर्मा बनकर कभी मर्दानी बनकर 30 साल से बॉलीवुड इंडस्ट्री में रानी मुखर्जी राज कर रही हैं। 50 से ज्यादा फिल्में करने के बाद अब एक्ट्रेस अपनी 51वीं फिल्म ‘मर्दानी 3’ से बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। इस फिल्म के जरिए एक्ट्रेस अपने 30 साल के सफल करियर को सेलिब्रेट कर रही हैं। फिल्म के प्रमोशन्स के बीच रानी मुखर्जी ने इंडिया टीवी के साथ खास बातचीत की है। उन्होंने अपने फिल्मी सफर के बारे में बात करते हुए बताया कि दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला, बहुत दोस्तियां हुईं, दर्शकों का प्यार मिला, जब फिल्में नहीं चली तो भी उनका सपोर्ट मिला। इसके अलावा रानी ने फिल्म में अपनी एंट्री से लेकर अब तक के सफर पर चर्चा की और इसी बीच बताया कि एक दौर था जब लोगों को उनकी आवाज पसंद नहीं आती थी या वो ये सोचते थे कि दर्शक उनकी आवाज को पसंद नहीं करेंगे। इस वजह से कई फिल्मों में उनकी आवाज नहीं थी, बल्कि किसी और ने उनके लिए डब किया, लेकिन फिर करण जौहर ने सब बदल दिया और पर्दे पर उन्हें अपनी पहचान मिली।

क्यों लिया गया ऐसा फैसला?

इंडिया टीवी के साथ एक खास बातचीत में रानी मुखर्जी ने अपने करियर के शुरुआती दौर की एक अहम याद साझा की। उन्होंने उस समय को याद किया जब फिल्म गुलाम (1998) में उनकी आवाज डब की गई थी। रानी ने न सिर्फ उस फैसले के पीछे की परिस्थितियों को समझाया, बल्कि यह भी बताया कि इस अनुभव ने उन्हें फिल्ममेकिंग और टीमवर्क के मायने कैसे सिखाए। पीछे मुड़कर देखते हुए रानी ने कहा कि वह हमेशा से सिनेमा को एक सामूहिक प्रयास के तौर पर देखती रही हैं, जहां व्यक्तिगत भावनाओं से ज्यादा फिल्म के हित को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा, ‘जब हम फिल्म करते हैं तो हमें एक टीम प्लेयर की तरह सोचना होता है। फिल्म से जुड़ा कोई भी फैसला बहुत बड़ा होता है और वह सिर्फ इस नीयत से लिया जाता है कि फिल्म के लिए क्या सबसे बेहतर है।’

क्या था रानी का रिएक्शन?

रानी ने साफ किया कि उन्होंने कभी भी ‘गुलाम’ में अपनी आवाज डब किए जाने के फैसले को नकारात्मक रूप से नहीं देखा। उनके मुताबिक उन्होंने हमेशा उस निर्णय के पीछे की नीयत को समझने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी इस पर सवाल नहीं उठाया। मुझे लगा कि अगर उन्होंने यह फैसला लिया है, तो वह उनके हिसाब से सही रहा होगा, चाहे वह सही हो या गलत।’ रानी ने यह भी बताया कि वह समझ सकती हैं कि उस समय मेकर्स क्या सोच रहे होंगे। उन्होंने कहा, ‘शायद उन्हें लगा होगा कि मेरी आवाज दर्शकों को पसंद न आए या वे एक नई लड़की को सुरक्षित रखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सोचा होगा कि आवाज डब कर देना बेहतर है।’

यहां देखें वीडियो

ये थी रानी की सोच

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि यह फैसला किसी गलत इरादे से लिया गया था। वो कहती हैं, ‘मैंने कभी नहीं माना कि यह मुझे टॉर्चर करने या नीचा दिखाने के लिए किया गया होगा। मुझे लगता है कि हर इंसान को किसी चीज के बारे में अपनी राय रखने का हक होता है।’ इसके बाद रानी ने बताया कि करण जौहर के निर्देशन में बनी कुछ कुछ होता है के साथ चीजें कैसे बदल गईं। उस वक्त करण जौहर बतौर निर्देशक अपना करियर शुरू कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने रानी के लिए एक मजबूत स्टैंड लिया। रानी ने खुलासा किया कि उस फिल्म में भी उनकी आवाज डब करवाने का दबाव था, लेकिन करण अपने फैसले पर अडिग रहे। एक्ट्रेस कहती हैं, ‘करण ने मुझसे कहा, ‘रानी, मुझे तुम्हारी आवाज पसंद है और तुम ही मेरी फिल्म डब करोगी।’

करण के फैसले ने बदली तकदीर

रानी ने माना कि इस फैसले का असर सिर्फ उनके करियर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंडस्ट्री पर भी पड़ा। उन्होंने कहा, ‘मैं हमेशा करण की शुक्रगुजार रहूंगी, क्योंकि जब किसी बड़ी फिल्म में ऐसा फैसला लिया जाता है, तो उसका असर पूरी इंडस्ट्री में दिखाई देता है। वह एक ट्रेंड सेट करता है।’ अपनी बात खत्म करते हुए रानी ने कहा कि अपनी आवाज को बरकरार रखना उनके लिए बेहद निजी और अहम अनुभव रहा। उन्होंने बताया, ‘मैं अपनी आवाज बचा पाई और मैं हमेशा कहती हूं कि हमारी आवाज ही हमारी पहचान होती है। अपनी पहचान को बनाए रख पाना मेरे लिए एक आशीर्वाद था।’

अपकमिंग फिल्म का प्लॉट

वर्कफ्रंट की बात करें तो रानी मुखर्जी एक बार फिर निडर पुलिस अफसर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में मर्दानी 3 के साथ बड़े पर्दे पर लौट रही हैं। यह फिल्म 30 जनवरी को रिलीज होगी। मर्दानी 3 (2026) में रानी मुखर्जी एक बार फिर निडर और बेखौफ पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में नजर आती हैं। इस बार कहानी एक खतरनाक बाल तस्करी और भिखारी माफिया के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी सरगना अम्मा (मल्लिका प्रसाद) है। देशभर से रहस्यमय तरीके से गायब हो रही नाबालिग लड़कियों की तलाश शिवानी को एक ऐसी सच्चाई के करीब ले जाती है, जो सिस्टम की जड़ों तक फैली हुई है। यह फिल्म समय के खिलाफ चलती एक सघन और रोमांचक जांच की कहानी है, जिसमें शिवानी का सामना एक ताकतवर और निर्दयी महिला खलनायक से होता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, खतरा और गहराता जाता है, और न्याय की यह लड़ाई पहले से कहीं ज़्यादा निजी, क्रूर और चुनौतीपूर्ण बन जाती है। शिवानी शिवाजी रॉय के रोल में जहां रानी मुखर्जी हैं, वहीं अम्मा के रोल में मल्लिका प्रसाद हैं।

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