
लव एंड गॉड का एक सीन।
बॉलीवुड की दुनिया में कई ऐसी फिल्में रही हैं, जिन्हें लेकर हमेशा अफवाहें, कहानियां और किंवदंतियां जुड़ी रही हैं। इनमें कुछ फिल्मों को मनहूस या शापित कहा गया, क्योंकि इनके साथ अजीब किस्मत जुड़ी हुई थी। ऐसी ही एक फिल्म है ‘लव एंड गॉड’, जिसकी कहानी जितनी दिलचस्प है, उतनी ही डरावनी भी। ये फिल्म साल 1989 में 39 साल पहले रिलीज हुई थी। फिल्म की कहानी को बनाने में 24 साल लगे और इस दौरान कई अनहोनी भी हुईं। फिल्म से जुड़ी इन अनहोनी के बारे में आपको बताते हैं।
क्यों बनी शापित फिल्म?
साल 1986 में आखिरकार रिलीज हुई यह फिल्म के आसिफ के निर्देशन में बनी। लीड रोल में थे निम्मी और संजीव कुमार। लेकिन इस फिल्म के बनने की कहानी कई दशकों तक चली और इस दौरान कई दुखद घटनाएं हुईं। फिल्म पर काम शुरू हुआ था के आसिफ ने, जिन्होंने पहले मुगल-ए-आजम जैसी ऐतिहासिक महाकृति बनाई थी। उनकी ख्वाहिश थी कि इस फिल्म में भी वही जादू पैदा हो, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया।
गुरूदत्त का निधन और फिल्म का ठहराव
शुरुआत में फिल्म लैला और मजनू की कहानी पर आधारित थी। इसके लिए के आसिफ ने उस समय के सुपरस्टार गुरूदत्त को मजनू के रोल के लिए फाइनल किया। शूटिंग शुरू भी हो गई, लेकिन 1962 में गुरूदत्त का निधन हो गया। आर्थिक तंगी और डिप्रेशन से जूझते हुए गुरूदत्त ने खुदकुशी कर ली। इस हादसे के बाद फिल्म फिर से ठहर गई और लंबे समय तक पूरी तरह रुकी रही।
संजीव कुमार और निम्मी के साथ नई शुरुआत
सालों बाद के आसिफ ने हिम्मत जुटाई और फिल्म को फिर से बनाने का फैसला किया। इस बार संजीव कुमार और निम्मी को मुख्य किरदारों के लिए चुना गया। संजीव कुमार को पहले टेस्ट करना था कि क्या वो राजस्थान में शूटिंग कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें फिल्म सस्ता खून महंगा पानी में कास्ट किया गया। सफल होने के बाद ही उन्हें ‘लव एंड गॉड’ में शामिल किया गया। 1970 में फिल्म की शूटिंग फिर शुरू हुई, लेकिन 1971 में एक दुखद मोड़ आया। संजीव कुमार के घर मिलने आए के आसिफ अचानक सांस लेने में दिक्कत के कारण संजीव कुमार की बांहों में ही चल बसे। यह हादसा फिल्म टीम के लिए झटका था।
संजीव कुमार की भी मौत
के आसिफ की मौत से फिल्म की शूटिंग और भी मुश्किल में पड़ गई। पैसों की कमी और लगातार रुकावटों के बावजूद संजीव कुमार ने फिल्म को पूरा करने की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कई प्रोड्यूसर्स और यहां तक कि दिलीप कुमार से मदद मांगी, लेकिन कोई आगे नहीं आया। अंत में केसी बोकाडिया ने फिल्म को फंड देने का फैसला किया। शूटिंग शुरू हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद संजीव कुमार हार्ट अटैक के चलते दुनिया छोड़ गए।
फिल्म की रिलीज और नतीजा
तीनों मौतों और अनेकों मुश्किलों के बाद फिल्म की बची हुई शूटिंग बॉडी डबल्स के साथ पूरी की गई। आखिरकार ‘लव एंड गॉड’ 1986 में रिलीज हुई, लेकिन फिल्म की एडिटिंग और बाकी काम इतने कमजोर थे कि दर्शकों ने इसे पसंद नहीं किया और यह फ्लॉप साबित हुई। ‘लव एंड गॉड’ ने न केवल बॉलीवुड को एक कहानी दी, बल्कि यह साबित किया कि किस्मत और शाप कभी-कभी कला और मेहनत से भी बड़ी होती है। यह फिल्म आज भी मनहूस और शापित फिल्मों की लिस्ट में शामिल है।
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