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‘भूत’ फिल्म का डरावना फ्लैट 23 साल से है खाली, राम गोपाल वर्मा ने किया खुलासा

‘भूत’ फिल्म का डरावना फ्लैट 23 साल से है खाली, राम गोपाल वर्मा ने किया खुलासा

Image Source : INSTAGRAM/@RGVZOOMIN
राम गोपाल वर्मा

राम गोपाल वर्मा की 2003 की फिल्म ‘भूत’, जिसमें अजय देवगन, उर्मिला मातोंडकर, नाना पाटेकर और रेखा थे। ये उस वक्त बॉलीवुड की सबसे यादगार हॉरर फिल्मों में से एक थी। यह फिल्म रेड लॉरी फिल्म फेस्टिवल 2026 में बड़े पर्दे पर फिर से दिखाई गई। फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन, फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने फैंस से बातचीत की और कुछ दिलचस्प बातें और किस्से शेयर किए।

‘भूत’ फिल्म का फ्लैट आज तक है खाली

इसी दौरान राम गोपाल वर्मा ने खुलासा किया, ‘मैंने यह फिल्म सिर्फ 30 दिनों में पूरी कर ली थी, क्योंकि फिल्म का ज्यादातर हिस्सा मैंने एक ही अपार्टमेंट में शूट किया था। मैं आपको एक मजेदार बात बताना चाहता हूं। यह फिल्म 2002 में शूट हुई थी। इसे 20 साल से ज्यादा हो गए हैं और आज भी वह फ्लैट खाली पड़ा है! फिल्म रिलीज होने के बाद वह काफी मशहूर हो गया था और अब कोई भी उस अपार्टमेंट में रहना नहीं चाहता। यह लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स में है। मैं उस बिल्डिंग का नाम भूल गया हूं।

राम गोपाल वर्मा ‘द एक्सॉर्सिस्ट’ के बहुत बड़े फैन थे

राम गोपाल वर्मा ने बताया कि वह अपनी टीनएज से ही ‘द एक्सॉर्सिस्ट’ के फैन रहे हैं। इस फिल्म का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा था। बॉलीवुड हंगामा ने उनके हवाले से लिखा, ‘मैं अपनी टीनएज से ही द एक्सॉर्सिस्ट (1973) का बहुत बड़ा फैन रहा हूं। इस फिल्म को देखने के बाद मैं ठीक से सो भी नहीं पाता था। एक महीने तक मैं कुछ महसूस नहीं कर पा रहा था। मुझे हर किसी को देखकर डर लगता था, यहां तक कि अपने परिवार वालों को देखकर भी!’

‘भूत’ फिल्म बनने के पीछे की वजह

राम गोपाल वर्मा ने अपनी 2003 की फिल्म’भूत’ के बारे में बात करते हुए, कहा कि ‘जब मैं भूत बना रहा था तो शुरू में आइडिया इसे किसी हवेली में सेट करने का था, लेकिन उस समय यह सबसे घिसा-पिटा आइडिया था। एक AD ने कहा कि हवेली वाला आइडिया अब बहुत पुराना हो चुका है और हॉरर फिल्म के लिए सबसे आम बात है। हम इसे गोवा में समुद्र के किनारे क्यों नहीं सेट करते? मैंने सोचा की किसी खास जगह पर क्यों जाएं? इसे लोखंडवाला में ही क्यों न सेट करें? मुझे लगता है कि हॉरर तब सबसे ज्यादा असरदार होता है, जब थिएटर में बैठे लोगों को लगे यह मेरे साथ भी मेरे अपने घर में हो सकता है। यह जितना ज्यादा अपनेपन वाला लगेगा, उतना ही ज्यादा असली लगेगा।’

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