
मनोज बाजपेयी और माहत्मा गांधी।
भारतीय सिनेमा में जब भी संजीदा फिल्ममेकिंग और बेहतरीन अदाकारी का संगम होता है तो उम्मीदें आसमान छूने लगती हैं। हाल ही में फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी घोषणा की है जिसने फिल्म जगत और दर्शकों के बीच उत्सुकता की लहर दौड़ दी है। हफ्तों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए मिश्रा ने पुष्टि की है कि उनके आगामी बायोपिक प्रोजेक्ट में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की भूमिका कोई और नहीं, बल्कि अभिनय के पावरहाउस मनोज बाजपेयी निभाएंगे। जी हां, मनोज बाजपेयी की इस किरदार में देखना काफी दिलचस्प होगा
पोस्ट से हुआ जाहिर
सुधीर मिश्रा ने एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली पोस्ट में लिखा, ‘मोटे तौर पर यही प्लान है। उम्मीद है सब ठीक हो जाएगा।’ यह छोटी सी बात इस साल की सबसे बड़ी सिनेमैटिक हेडलाइंस में से एक बन गई है। एक तरफ सुधीर मिश्रा जैसे निर्देशक हैं जो अपनी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक परतों को उकेरने के लिए जाने जाते हैं, और दूसरी तरफ मनोज बाजपेयी हैं जो किसी भी किरदार की रूह में उतर जाने के लिए मशहूर हैं।

सुधीर मिश्रा का पोस्ट।
मनोज बाजपेयी ही क्यों?
यह सवाल कई लोगों के मन में हो सकता है, लेकिन मनोज बाजपेयी का अब तक का करियर इसका सबसे सटीक जवाब है। उन्होंने हमेशा ऐसे किरदारों को चुना है जो नैतिक रूप से जटिल और भावनात्मक रूप से गहरे होते हैं। चाहे वह ‘सत्या’ का भीखू म्हात्रे हो या ‘अलीगढ़’ के प्रोफेसर सिरस, मनोज ने हमेशा संयम और आंतरिक संघर्ष वाले रोल बखूबी निभाए हैं। महात्मा गांधी एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें पूरी दुनिया सम्मान की नजर से देखती है, लेकिन उनके जीवन के कई पहलू आज भी गहन विमर्श का विषय हैं। गांधी का किरदार निभाना किसी भी अभिनेता के लिए एक बड़ी चुनौती होती है क्योंकि इसमें केवल शारीरिक समानता नहीं, बल्कि उनके विचारों की गहराई और उस मौन शक्ति को पर्दे पर उतारना होता है।
फिल्म का केंद्र और कैनवस
हालांकि फिल्म के प्लॉट को लेकर अभी तक गोपनीयता बरती जा रही है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह गांधी के जन्म से मृत्यु तक की पारंपरिक बायोपिक नहीं होगी। इसके बजाय यह फिल्म बापू के जीवन के कुछ खास और महत्वपूर्ण हिस्सों को दिखाएगी। शूटिंग के लिए कोलकाता को मुख्य लोकेशन के तौर पर चुना गया है। कोलकाता का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व गांधी के जीवन के कई अध्यायों से जुड़ा है, जो फिल्म को एक प्रामाणिक बैकड्रॉप प्रदान करेगा। सुधीर मिश्रा की फिल्मों का इतिहास देखें तो वे अक्सर यथास्थिति को चुनौती देने वाले और सोचने पर मजबूर कर देने वाले विषय चुनते हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि गांधी पर आधारित यह फिल्म भी केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं होगी, बल्कि एक ऐसा नजरिया पेश करेगी जो समकालीन समय में भी प्रासंगिक हो।
प्रोडक्शन और भविष्य की योजना
यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा और कलाकारों की शेड्यूलिंग सही बैठी, तो इस बड़े प्रोजेक्ट की शूटिंग इसी साल सितंबर में शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल फिल्म प्री-प्रोडक्शन के चरण में है। सपोर्टिंग कास्ट और अन्य क्रू मेंबर्स के नामों का खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन मनोज बाजपेयी का नाम सामने आने के बाद से ही इस प्रोजेक्ट ने ‘मस्ट-वॉच’ लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। अभी के लिए सुधीर मिश्रा और मनोज बाजपेयी का यह कोलेबोरेशन इस साल के सबसे जबरदस्त वादों में से एक है। यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि आधुनिक सिनेमा के दो दिग्गज मिलकर भारत के सबसे महान व्यक्तित्व की कहानी को किस नए और अनूठे अंदाज में पेश करते हैं।
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