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रामायण के दौर में आया अमोल पालेकर का शो, जिसकी लोकप्रियता छूती थी आसमान

रामायण के दौर में आया अमोल पालेकर का शो, जिसकी लोकप्रियता छूती थी आसमान

Image Source : INSTAGRAM/@ITSSMEAMOL
रामायण के दौर में आया था अमोल पालेकर का ये शो।

80-90 का दशक दूरदर्शन का दौर कहा जाता था। ये वो समय था जब दूरदर्शन पर एक से बढ़कर एक सीरियल ने दस्तक दी और दर्शकों के बीच इन्हें खूब पसंद भी किया गया। इन शोज ने अपनी सादगी से हर किसी को अपना मुरीद कर लिया। ये वो समय था जब सास-बहू से ज्यादा पौराणिक, सामाजिक मुद्दे और क्राइम-जासूसी जैसे जॉनर को दर्शक ज्यादा तरजीह देते थे। इसी दौरान बच्चों पर बना भी एक शो आया था, जिसके निर्देशक अमोल पालेकर थे। 1987 में दूरदर्शन पर आया ये प्यारा और इमोशनल धारावाहिक तीन बहनों की जिंदगी पर बेस्ड था, जो माता-पिता के न रहने के बाद जिंदगी की परेशानियों का सामना करती हैं। साथ मिलकर घर की जिम्मेदारी संभालती हैं, पढ़ाई करती हैं और अपना भविष्य संवारने की कोशिश करती हैं।

रामायण के दौर में आया टीवी शो

ये शो ऐसे समय पर आया था जब टीवी पर रामानंद सागर के पौराणिक धारावाहिक रामायण का क्रेज था और रामायण की लोकप्रियता के बीच भी ये शो अपनी जगह बनाने में सफल रहा। ये शो था ‘कच्ची धूप’, जिसकी कहानी और किरदारों से हर दर्शक ने जुड़ाव महसूस किया। जैसे मालगुडी डेज ने दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की ठीक वैसे ही इस शो ने भी दर्शकों के दिलों में अलग जगह बना ली थी।

‘कच्ची धूप’ की कहानी

1987 में दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हुए ‘कच्ची धूप’ में तीन बहनों की कहानी दिखाई गई गई थी। शो में अभिनेत्री भाग्यश्री ने बड़ी बहन का किरदार निभाया था, जिनकी एंट्री तब हुई जब उस एक्ट्रेस ने शो छोड़ दिया जिन्हें पहले इस रोल के लिए चुना गया था। भाग्यश्री ने अपनी सादगी और मासूमियत से इस रोल में जैसे जान ही फूंक दी। दर्शकों को उनका किरदार खूब पसंद आया और इस शो के बाद उन्होंने ‘मैंने प्यार किया’ से बॉलीवुड डेब्यू किया और पहली ही फिल्म से स्टार बन गईं। उनके अलावा शो में पूर्णिमा पटवर्धन और श्यामली पालेकर अन्य दो बहनों के रोल में नजर आईं। वहीं इस सीरियल में दिखाए गए फैमिली इमोशंस और सिंपल कहानी ने इसे दर्शकों का फेवरेट बना दिया। जब ये शो दूरदर्शन पर आता था, पूरा घर साथ बैठकर ये शो देखता था।

दर्शकों के बीच हुआ पॉपुलर

1980 के दौर में टीवी शोज में चमक-दमक से ज्यादा कंटेंट पर ध्यान दिया जाता था। कच्ची धूप के साथ भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला। अमोल पालेकर के इस शो की खासियत इसकी सादगी, सच्चाई और कलाकार थे। शो में बिना माता-पिता के अपनी जिंदगी की कड़वी सच्चाईयों का सामना कर रहीं तीन बहनों की कहानी दिखाई गई थी, जिसने दर्शकों को खुद से पूरी तरह जोड़ लिया था। इसी वजह से ये शो बहुत पॉपुलर हुआ। कच्ची धूप को आज भी दूरदर्शन के क्लासिक शो में गिना जाता है।

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