digital products downloads

‘रामायण’ में लक्ष्मण के अंदर संजीवीनी बूटी से प्राण फूंकने वाले सुषेण वैद्य याद हैं?

‘रामायण’ में लक्ष्मण के अंदर संजीवीनी बूटी से प्राण फूंकने वाले सुषेण वैद्य याद हैं?

Image Source : STILL FROM RAMAYAN
सुषेण वैद्य।

रामानंद सागर की ‘रामायण’ सिर्फ एक टीवी सीरियल नहीं, बल्कि भारतीय टेलीविजन इतिहास की अमूल्य धरोहर है। दशकों बाद भी इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। लॉकडाउन के दौरान जब इसका दोबारा प्रसारण हुआ तो मानो पूरा देश फिर से उसी दौर में लौट गया। नई पीढ़ी ने इसे पहली बार देखा, जबकि पुरानी पीढ़ी की यादें ताजा हो गईं। रामायण की खासियत थी इसकी गहरी भावनात्मक पकड़ और आध्यात्मिक प्रभाव, जिसने हर उम्र के दर्शकों को जोड़कर रखा। इस शो की सबसे बड़ी खूबी इसकी सटीक और सोच-समझकर की गई कास्टिंग थी। राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान से लेकर सुग्रीव जैसे सहायक किरदारों तक, हर कलाकार अपने रोल में पूरी तरह फिट बैठा। रामानंद सागर ने किरदार चुनते समय सिर्फ अभिनय क्षमता ही नहीं, बल्कि चेहरे की शांति, व्यक्तित्व और आभा को भी महत्व दिया। यही वजह है कि आज भी इन किरदारों के चेहरे लोगों के जहन में वैसे ही बसे हुए हैं।

छोटा किरदार, गहरा असर

रामायण का एक छोटा लेकिन बेहद यादगार किरदार था सुषेण वैद्य। वही वैद्य, जिसने संजीवनी बूटी से लक्ष्मण की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। स्क्रीन पर उनका समय भले ही कम था, लेकिन उनकी मौजूदगी कहानी के सबसे अहम मोड़ों में से एक थी। दर्शकों के दिलों में यह किरदार इतनी गहराई से बैठ गया कि लोग आज भी सुषेण वैद्य को याद करते हैं। इस किरदार को निभाने वाले रमेश चौरसिया कोई प्रोफेशनल एक्टर नहीं थे। वे मध्य प्रदेश के उज्जैन में रहने वाले एक साधारण इंसान थे, जिनका पेशा पान बेचना था। अभिनय की दुनिया से उनका कोई लेना-देना नहीं था। एक आम जिंदगी जीने वाले रमेश के लिए ‘रामायण’ में काम करना किसी सपने के सच होने जैसा था।

रामायण के बाद बदल गई ज़िंदगी

‘रामायण’ में सुषेण वैद्य का रोल करने के बाद रमेश चौरसिया की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई। उनकी पान की दुकान शहर में मशहूर हो गई और लोग दूर-दूर से उनके पान खाने आने लगे। कुछ लोग तो यह तक मानने लगे कि उनके पान में औषधीय गुण हैं और उनसे बीमारियां ठीक हो सकती हैं। कई लोग उन्हें असल जिंदगी में भी सुषेण वैद्य समझ बैठते थे। रमेश चौरसिया को यह रोल दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी अरविंद त्रिवेदी ने, जिन्होंने रामायण में रावण का यादगार किरदार निभाया था। अरविंद और रमेश अच्छे दोस्त थे। जब रामानंद सागर सुषेण वैद्य के लिए एक उपयुक्त चेहरे की तलाश कर रहे थे, तब अरविंद त्रिवेदी ने रमेश का नाम सुझाया। रमेश की सादगी और व्यक्तित्व ने रामानंद सागर को प्रभावित किया और उन्हें यह ऐतिहासिक मौका मिल गया।

जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि

रमेश चौरसिया अपने पूरे जीवन में इस भूमिका को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते रहे। बिना किसी अभिनय अनुभव के देश के सबसे बड़े धार्मिक धारावाहिक का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात थी। यह किरदार उनके नाम के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया। हालांकि रमेश चौरसिया अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उज्जैन के देवास गेट बस स्टैंड पर उनकी यादें आज भी जीवित हैं। वहां उनकी नमकीन की दुकान और एक होटल चलता है, जिसका नाम उन्होंने ‘संजीवनी’ रखा था। दुकान में आज भी सुषेण वैद्य के रूप में उनकी तस्वीरें लगी हैं।

ये भी पढ़ें:  ‘पति से अलग रहती है’, रोती रहीं दिव्या अग्रवाल, भव्या ने धड़ल्ले से किया बड़ा खुलासा, बोलीं- मैंने तोड़ा है इसका घर

40 से 80 सिगरेट रोज पीते थे विनोद खन्ना, ब्लैडर से पहले हुआ था लंग कैंसर, न सर्जरी न कोई दवा सिर्फ एक योग क्रिया के दम पर पाई बीमारी से निजात

Doonited Affiliated: Syndicate News Hunt

This report has been published as part of an auto-generated syndicated wire feed. Except for the headline, the content has not been modified or edited by Doonited

Source link

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uttarakhand News Doonited
Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Instagram
WhatsApp