
कश्मीर की वादियों में जहां कभी केसर की खुशबू महकती थी, वहां पिछले तीन दशकों में कट्टरता के जहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। घाटी के युवाओं को गुमराह करने वाले सफेदपोशों और आतंकी आकाओं की साजिशों का शिकार होने वालों में एक ऐसा नाम भी शामिल था, जिसकी पहचान कभी एक उभरते हुए कलाकार के रूप में थी। यह कहानी है बांदीपोरा के हाजिन निवासी साकिब बिलाल की, जिसने मशहूर फिल्म निर्माता विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘हैदर’ में एक छोटा लेकिन यादगार कैमियो किया था। फिल्म में साकिब को एक चॉकलेट बॉय के रूप में देखा गया था, जिसे पर्दे पर हिंसा से बचकर भागते हुए दिखाया गया। विडंबना देखिए कि जिस हिंसा से वह रील लाइफ में दूर भाग रहा था, असल जिंदगी में उसी का हिस्सा बनकर उसने अपने अंत की पठकथा लिखी।
प्रतिभाशाली खिलाड़ी से बंदूक थामने तक का सफर
साकिब बिलाल केवल अभिनय तक सीमित नहीं था, वह बहुमुखी प्रतिभा का धनी था। एक संपन्न किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाला साकिब पढ़ाई में भी अव्वल था और भविष्य में इंजीनियरिंग करने का सपना देखता था। खेलों के प्रति उसका जुनून ऐसा था कि वह फुटबॉल, कबड्डी और ताइक्वांडो का बेहतरीन खिलाड़ी माना जाता था। रंगमंच यानी थियेटर से उसका जुड़ाव गहरा था और उसने श्रीनगर के टैगोर हॉल में ‘व्यथ छि यहए’ जैसे नाटक में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया था। वह अपने गांव हाजिन के ईदगाह मैदान में घंटों फुटबॉल खेला करता था, लेकिन 31 अगस्त 2018 को वह अपने एक साथी के साथ अचानक घर से लापता हो गया। परिवार को अंदेशा भी नहीं था कि फुटबॉल और किताबों से प्यार करने वाला उनका बेटा कट्टरता के रास्ते पर निकल चुका है।
सफेदपोशों की साजिश और एक उभरते कलाकार का पतन
साकिब के लापता होने के कुछ समय बाद जब उसकी हाथ में बंदूक लिए तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। सेना के जानकारों का मानना है कि कश्मीर में हिंसा का यह चक्र तब तक नहीं रुकेगा जब तक युवाओं को भड़काने वाले सफेदपोश बेनकाब नहीं होते। साकिब जैसे युवा अक्सर उन लोगों के बहकावे में आ जाते हैं जिनके अपने बच्चे विदेशों या बड़े शहरों में सुरक्षित और शानदार जिंदगी जी रहे होते हैं, लेकिन वे दूसरों के बच्चों के हाथों में हथियार थमा देते हैं।
गलत राह ने किया तबाह
दिसंबर 2018 में श्रीनगर के मुजगुंड इलाके में सुरक्षाबलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में साकिब बिलाल मारा गया। उसकी मौत ने इस सवाल को फिर से जिंदा कर दिया कि आखिर क्यों एक मेधावी छात्र, एक शानदार खिलाड़ी और एक उभरता हुआ अभिनेता मौत के इस रास्ते को चुनता है? साकिब ने शाहिद कपूर, इरफान खान, केके मेनन और तब्बू जैसे शानदार कलाकारों के बीच काम किया। ‘हैदर’ में उनका कैमियो भले ही छोटा था, लेकिन ये उनके लिए एक शानदार शुरुआत का मौका था। फिल्मी दुनिया में उनके लिए आगे कई रास्ते खुल रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। जब साकिब ने साल 2014 में फिल्म की थी तो सिर्फ 6वीं क्लास में थे।
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