
रानी मुखर्जी।
बॉलीवुड की सबसे दमदार और भरोसेमंद अभिनेत्रियों में शुमार रानी मुखर्जी एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं, अपनी सुपरहिट कॉप फ्रैंचाइजी ‘मर्दानी’ 3 के साथ। रानी को आखिरी बार तीन साल पहले मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे में देखा गया था, एक ऐसी फिल्म जिसने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया, बल्कि उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी दिलाया। एक भावनात्मक कहानी में मां का सशक्त किरदार निभाने के बाद, अब रानी फिर से निडर पुलिस अफसर शिवानी शिवाजी रॉय के रूप में लौट रही हैं। यह किरदार सालों से रानी की पहचान बन चुका है और उन्हें सिनेमा से लेकर टेलीविजन तक जबरदस्त लोकप्रियता दिला चुका है। हालांकि रानी की पॉपुलैरिटी पर अक्सर चर्चा होती है, लेकिन फिल्मों के बीच लंबे गैप की वजह से उनकी बॉक्स ऑफिस कामयाबी और सोलो लीड स्टार के तौर पर उनकी उपलब्धियाँ कई बार नजरअंदाज कर दी जाती हैं।
सोलो स्टार का सफर
90 के दशक में डेब्यू करने वाली रानी मुखर्जी का करियर ग्राफ़ काफ़ी दिलचस्प रहा है। शुरुआती दौर में उनके किरदार ज्यादातर पारंपरिक थे, हीरो के अपोजिट लीड हीरोइन के रूप में। गुलाम में आमिर खान, कुछ कुछ होता है में शाहरुख खान और हैलो ब्रदर में सलमान खान के साथ उनके रोल इसी दौर को दर्शाते हैं, लेकिन 2000 के दशक में रानी के किरदारों ने एक नया मोड़ लिया। मेनस्ट्रीम बॉलीवुड फिल्मों में भी उनके रोल सिर्फ हीरो की कहानी का हिस्सा नहीं रहे, बल्कि उनकी अपनी मजबूत कहानियां होने लगीं। हम तुम, ब्लैक, बंटी और बबली और कभी अलविदा ना कहना जैसी फिल्मों में रानी ने ऐसे किरदार निभाए, जो अपनी पहचान और भावनात्मक गहराई के लिए याद किए जाते हैं।
रानी के बीते 15 साल
2010 का दशक रानी मुखर्जी के करियर में एक बड़ा बदलाव लेकर आया। अब वह पूरी तरह सोलो लीड स्टार बन चुकी थीं। ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘अय्या’, ‘मर्दानी’, ‘हिचकी’ और ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे जैसी फिल्मों में कहानी पूरी तरह उनके किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। इसी दौर में कंगना रनौत और विद्या बालन जैसी एक्ट्रेसेस ने भी इसी तरह के सोलो-सेंट्रिक रास्ते को अपनाया, लेकिन जहां उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लड़खड़ाईं, वहीं रानी की सोलो लीड फिल्मों ने लगातार सफलता हासिल की।
बॉक्स ऑफिस पर रानी की मजबूत पकड़
2010 के बाद रानी मुखर्जी ने मेल स्टार्स के साथ सिर्फ दो फिल्में की हैं, ‘तलाश’ (2012) आमिर खान के साथ और ‘बंटी और बबली 2’ (2021) सैफ अली खान के साथ। ‘बॉम्बे टॉकीज’ (2013) एक एक्सपेरिमेंटल एंथोलॉजी फिल्म थी, जिसे पारंपरिक बॉक्स ऑफिस फिल्म नहीं माना गया। इन तीनों को छोड़ दें तो 2011 के बाद रानी ने कुल छह फीमेल-लीड फिल्में की हैं, जिनमें से सिर्फ ‘अय्या’ (2012) फ्लॉप रही। ‘नो वन किल्ड जेसिका’ (2011), जिसमें रानी और विद्या बालन साथ नजर आई थीं, उस साल की स्लीपर हिट साबित हुई। ‘मर्दानी’ (2014) ने एक सोलो लीड कॉप ड्रामा के तौर पर शानदार सफलता हासिल की। ‘हिचकी’ (2018) जैसे अनोखे सब्जेक्ट पर बनी फ़िल्म भी उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए हिट रही।
‘मर्दानी 2’ (2019) की सफलता के बाद यह साफ हो गया कि रानी मुखर्जी फीमेल-लीड फिल्मों की एक भरोसेमंद बॉक्स ऑफिस स्टार हैं, लेकिन ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ (2023) की कमाई ने सच में उनकी स्टार पावर को साबित कर दिया, एक संवेदनशील और अलग विषय होने के बावजूद फिल्म का चलना बड़ी बात थी।
मर्दानी 3
अब रानी मुखर्जी ‘मर्दानी 3’ के साथ एक बार फिर सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी हैं। ह्यूमन ट्रैफिकिंग और उसकी जांच पर आधारित यह कॉप ड्रामा आज रिलीज हो चुका है। मजबूत एडवांस बुकिंग के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फिल्म ओपनिंग डे पर बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है।
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