digital products downloads

8 की उम्र में ईरान से भागी थी ये हसीना, तहखाने में रहते थे माता-पिता

8 की उम्र में ईरान से भागी थी ये हसीना, तहखाने में रहते थे माता-पिता

Image Source : INSTAGRAM/@IAMELNAAZ
एल्नाज नोरौजी।

बॉलीवुड में ऐसे कई कलाकार हैं, जिन्होंने दूसरे देश से आकर बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई है। किसी ने मजबूरी तो किसी ने अभिनय की चाह में अपने देश से दूरी बना ली। इनमें से कई कलाकारों को फिल्मी दुनिया में एंट्री से पहले बदहाली के दिन भी देखने पड़े। दर-दर की ठोकरें खाते हुए इन कलाकारों ने अपने लिए फिल्मी दुनिया में जगह बनाई और आज लाखों दिलों पर राज करते हुए लग्जरी लाइफस्टाइल जी रहे हैं। आज हम आपको ऐसी ही एक्ट्रेस के बारे में बताएंगे, जो 8 साल की उम्र में ईरान से भागी थी और फिर रिफ्यूजी कैंप में कई साल गुजारे। हम बात कर रहे हैं एल्नाज नोरौजी की, जिन्हें एक समय पर एक अंडा और आलू के सहारे अपना पूरा दिन काटना पड़ता था और ये एक अंडा और आलू भी उन्हें बड़ी मुश्किल से नसीब होता था।

ईरान से भागकर पहुंचीं जर्मनी

एल्नाज नोरौजी कई बार अपने संघर्ष भरे दिनों के बारे में बात कर चुकी हैं। एल्नाज तब 8 साल की थीं, जब वह ईरान से भागकर जर्मनी पहुंची थीं। यहां उन्होंने रिफ्यूजी कैंप में मुश्किल हालातों का सामना किया। एल्नाज को यहां दिन का एक अंडा और आलू मिलता थी, जिसके लिए उन्हें घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता था।  फिर एल्नाज ने 14 साल की उम्र में काम शुरू कर दिया और फिल्मी दुनिया में कदम जमाने की जद्दोजहद में जुट गईं।

पाकिस्तानी फिल्म से शुरू किया करियर

‘मस्ती 4’ और ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसी फिल्म और सीरीज में काम कर चुकीं एल्नाज ने अपने करियर की शुरुआत पाकिस्तानी फिल्म से की थी। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड का रुख किया और छोटे-मोटे रोल और डांस नंबर्स में काम किया। एल्नाज ने ‘मस्ती 4’, ‘तेहरान’ जैसी फिल्मों के साथ ही ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसी सीरीज में भी काम किया है।

मुश्किल में गुजरा बचपन

एल्नाज नोरौजी ने हाल ही में साइर ब्रोचा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान अपनी निजी जिंदगी पर चर्चा की थी। इसी दौरान उन्होंने अपने बचपन के संघर्ष का भी खुलासा किया। उन्होंने इस बातचीत में कहा- ‘बहुत से लोगों को लगता है कि मैं एक रिच परिवार से हूं, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं एक अमीर परिवार से नहीं हूं। हम ईरान के बहुत छोटे से घर में रहते थे, मुझे तेहरान बहुत पसंद था। लेकिन, जब हम तेहरान से भागकर जर्मनी के एक छोटे से शहर में पहुंचे, तब फर्क समझ आया। पहले तो हम एक रिफ्यूजी कैम्प में रहे। हम बिना किसी पेपरवर्क के जर्मनी पहुंचे थे और वहां सबकुछ अलग था।’

छोटे कमरे में किया गुजारा

इसी बातचीत में एल्नाज ने कहा- ‘सोचिए आप मुंबई जैसे शहर में पले-बढ़े हों और अचानक ऐसे शहर में पहुंच जाएं, जहां सब कुछ 6 बजे तक बंद हो जाता हो। मैं अपने मां-पापा के साथ एक बहुत छोटे से कमरे में रहती थी। वहां अलग-अलग परिवारों के लिए अलग-अलग कमरे होते थे, लेकिन बाथरूम सिर्फ एक ही था और एक ही रसोईघर। इस कमरे में तीन बिस्तर थे। खाने के लिए रोज लाइन में खड़े होना पड़ता था, जहां एक अंडा और आलू मिलता था। यही रिफ्यूजी लाइफ है। आज भी मुझे बिना मसाले के आलू और अंडे खाना पसंद है। मुझे इससे अपना बचपन याद आता है।’

एल्नाज को आती हैं 7 भाषाएं

एल्नाज आगे कहती हैं- ‘जर्मनी पहुंचकर काम करने के लिए जर्मनी भाषा आना जरूरी था। हमें जर्मनी नहीं आती थी। मैंने अपनी मां के साथ जर्मनी सीखी और पढ़ाई जारी रखी। फिर वहीं मैंने देवनागरी और उर्दू सीखी। मैं अब सात भाषाएं बोल सकती हूं। मैं जब पैदा हुई थी, मेरे माता-पिता तहखाने में रहते थे। हमें जीरो से शुरुआत करनी पड़ी। हम उन कुछ लोगों में से थे, जो जल्दी ही कैंप से निकल गए। लेकिन, यहां से निकलने के लिए आपको महत्वाकांक्षी होना पड़ता है, क्योंकि संघर्ष के बाद जीवन आरामदायक लग सकता है। आपको किसी चीज के लिए पैसे नहीं देना पड़ता।’

ये भी पढ़ेंः थलापति विजय की आखिरी फिल्म ‘जना नायकन’ को लेकर क्या है विवाद, सेंसर बोर्ड से क्यों नहीं मिला सर्टिफिकेट?

YRF ने 1200 करोड़ क्लब में शामिल हुई ‘धुरंधर’ को बताया मील का पत्थर, भावुक रणवीर सिंह बोले- ‘मैं हमेशा आपको…’

Latest Bollywood News

Doonited Affiliated: Syndicate News Hunt

This report has been published as part of an auto-generated syndicated wire feed. Except for the headline, the content has not been modified or edited by Doonited

Source link

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uttarakhand News Doonited
Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Instagram
WhatsApp