
ब्रिटिश आर्मी के साथ ट्रेनिंग के दौरान आर माधवन।
यह कहानी एक ऐसे इंसान की है, जिसके सपनों की दिशा बदली, लेकिन मंजिल नहीं। आज आर. माधवन को उनके चार्म, सादगी और बेहतरीन अभिनय के लिए जाना जाता है। हिंदी से लेकर तमिल, तेलुगू, अंग्रेज़ी, कन्नड़ और मलयालम सिनेमा तक उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अभिनय उनकी पहली पसंद नहीं था। स्टार बनने से पहले माधवन का सपना था, भारतीय सेना की वर्दी पहनना।
जब सपना था देश की सेवा का
बचपन से ही माधवन अनुशासन और देशभक्ति से गहराई से जुड़े थे। यही वजह थी कि वे नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) का हिस्सा बने और वहां पूरी शिद्दत से मेहनत की। एनसीसी उनके लिए सिर्फ एक गतिविधि नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी थी। उनकी लगन रंग लाई और वे महाराष्ट्र के सर्वश्रेष्ठ एनसीसी कैडेट बने। इस उपलब्धि ने उन्हें एक ऐसा मौका दिलाया, जो बहुत कम लोगों को नसीब होता है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, माधवन उन आठ चुनिंदा कैडेट्स में शामिल थे, जिन्हें इंग्लैंड में ब्रिटिश आर्मी, रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स के साथ ट्रेनिंग लेने का अवसर मिला। यह किसी युवा के लिए सपने के सच होने जैसा था।

एनसीसी कैडेट के रूप में आर माधवन।
जब नियम सपनों से बड़े हो गए
इंग्लैंड से ट्रेनिंग लेकर लौटने के बाद माधवन पूरी तरह तैयार थे, शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी। उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होने का फैसला किया। लेकिन किस्मत को कुछ और मंज़ूर था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान पता चला कि उनकी उम्र तय सीमा से छह महीने ज्यादा है। नियम सख्त थे और कोई छूट संभव नहीं थी। एक ऐसा सपना, जिसके लिए उन्होंने सालों मेहनत की थी, महज कुछ महीनों के फर्क की वजह से टूट गया। यह झटका उनके लिए बेहद गहरा था, एक ऐसा मोड़, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
हार नहीं मानी, बस रास्ता बदला
सेना में न जा पाने के बाद माधवन ने खुद को संभाला और पढ़ाई पर फोकस किया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में ग्रेजुएशन किया और आगे चलकर पब्लिक स्पीकिंग और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट में ट्रेनिंग ली। यही नहीं, वे इस विषय के प्रोफेसर भी बने। 1992 में माधवन ने टोक्यो में आयोजित यंग बिज़नेसमैन समिट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह उस व्यक्ति की कहानी है, जो हर मोड़ पर खुद को नए रूप में गढ़ता गया।
कैमरे के सामने एक संयोग
अभिनय में माधवन का आना किसी सपने का हिस्सा नहीं था। 1996 में उन्होंने एक चंदन टैल्क पाउडर के विज्ञापन से कैमरे का सामना किया। इसके बाद टीवी शो ‘बनेगी अपनी बात’ और ‘सी हॉक्स’ में काम मिला। दर्शकों ने उनके नैचुरल अंदाज को पसंद किया और यहीं से फिल्मों का रास्ता खुला। ‘रहना है तेरे दिल में’ ने उन्हें रोमांटिक हीरो बना दिया, जबकि ‘3 इडियट्स’ जैसी फिल्म ने उन्हें हर उम्र के दर्शकों का चहेता बना दिया। समय के साथ, माधवन ने अलग-अलग भाषाओं और जॉनर्स में काम किया और खुद को किसी एक छवि में सीमित नहीं होने दिया।
जब फैंस ने देखा सैनिक वाला माधवन
कुछ समय पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर माधवन की एनसीसी कैडेट के दिनों की तस्वीरें वायरल हुईं। फिटनेस, अनुशासन और आत्मविश्वास से भरी इन तस्वीरों को देखकर फैंस हैरान रह गए। कई लोगों ने कहा कि अब समझ आता है कि ‘रंग दे बसंती’ या ‘आरोहन’ में वे इतने असली क्यों लगे, क्योंकि वह किरदार उन्होंने जिया हुआ था।
अब इस फिल्म में आएंगे नजर
वर्कफ्रंट की बात करें तो माधवन ओटीटी फिल्म ‘आप जैसा कोई’ में फातिमा सना शेख के साथ नजर आए। वहीं रणवीर सिंह के साथ उनकी फिल्म ‘धुरंधर’ ने उनके करियर में एक नया सुनहरा अध्याय जोड़ दिया। यह फिल्म फिलहाल नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है और दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। अब जल्द ही वो ‘धुरंधर 2’ में नजर आएंगे।
ये भी पढ़ें: स्कूल से निकलते ही BPO में की नौकरी, फिर पलटी किस्मत, TV के बाद बना OTT का भी सुपरस्टार
Doonited Affiliated: Syndicate News Hunt
This report has been published as part of an auto-generated syndicated wire feed. Except for the headline, the content has not been modified or edited by Doonited



