
द 100
क्या हर वीकेंड वही घिसी-पिटी हॉरर, एक्शन या रोमांटिक फिल्में देखकर आपका भी मन ऊब गया है? अगर आप कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो सिर्फ एंटरटेन न करे, बल्कि आपके दिमाग को झकझोर कर रख दे तो सावधान हो जाइए। हम जिस फिल्म की बात करने जा रहे हैं, वह हल्की-फुल्की नहीं है। यह वो फिल्म है, जिसे देखने के बाद आप देर तक सोचते रह जाएंगे और शायद यही वजह है कि इसे देखने की सलाह भी अपने रिस्क पर दी जा रही है। यह कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं है, बल्कि एक दमदार तेलुगु क्राइम थ्रिलर ‘द 100’ है। सस्पेंस, माइंड गेम्स और लगातार बदलते नैरेटिव से भरी यह फिल्म दर्शकों को शुरुआत से ही जकड़ लेती है।
कमाल की है IMDb रेटिंग
11 जुलाई 2025 को थिएटर्स में रिलीज हुई यह फिल्म अब ओटीटी पर दस्तक दे चुकी है और रिलीज होते ही दर्शकों की पसंदीदा बन गई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आते ही ‘द 100’ टॉप 10 ट्रेंडिंग फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो चुकी है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि IMDb पर इसे 10 में से 7.4 की जबरदस्त रेटिंग मिली है, जो किसी भी क्राइम थ्रिलर के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। अगर किसी वजह से आप इसे थिएटर में मिस कर चुके हैं तो अब इसे घर बैठे देखना किसी मौके से कम नहीं है। यह फिल्म फिलहाल प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है।
इस फिल्म में ऐसा क्या खास है?
‘द 100’ की कहानी एक बहादुर और तेजतर्रार IPS अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शहर के बाहरी इलाकों में हो रही रहस्यमयी डकैतियों की जांच कर रही है। शुरुआत में ये मामले सामान्य अपराध जैसे लगते हैं, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, परत दर परत एक ऐसा सच सामने आता है, जो न सिर्फ केस को बल्कि IPS अधिकारी की निजी जिंदगी को भी उलट-पलट कर देता है। इसी दौरान उसकी जिंदगी में एंट्री होती है आरती नाम की एक महिला की। पहली नज़र में यह मुलाकात साधारण लगती है, लेकिन यहीं से कहानी का असली खेल शुरू होता है। इसके बाद फिल्म लगातार ऐसे ट्विस्ट्स और टर्न्स लेती है कि दर्शक एक पल के लिए भी स्क्रीन से नजर नहीं हटा पाते। हर नया सीन पिछले सीन की सोच को चुनौती देता है और यही वजह है कि यह फिल्म दिमागी तौर पर थका भी देती है और रोमांच से भर भी देती है।
फिल्म की कास्ट
फिल्म में सागर, मिशा नारंग और धन्या बालकृष्ण ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं। खास बात यह है कि सभी कलाकारों ने अपने किरदारों में जान डाल दी है। वहीं निर्देशन की कमान संभाली है राघव ओमकार शशिधर ने जिन्होंने कहानी को न तो जरूरत से ज्यादा उलझाया और न ही आसान बनने दिया, बस उतना ही सस्पेंस रखा, जितना दर्शकों को बांधे रखने के लिए जरूरी था। अगर आप ऐसी फिल्मों के शौकीन हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करें तो ‘द 100’ आपके लिए परफेक्ट चॉइस है। एक बार देखना शुरू किया तो अंत तक छोड़ी नहीं जाएगी, ये वादा है।
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