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साइकोलॉजिकल थ्रिलर के हैं शौकीन तो 8 साल पुरानी सीरीज घुमा देगी माथा

साइकोलॉजिकल थ्रिलर के हैं शौकीन तो 8 साल पुरानी सीरीज घुमा देगी माथा

Image Source : PRIME VIDEO
आ माधवन।

अक्सर देखा गया है कि कुछ फिल्में और वेब सीरीज समय के साथ पुरानी जरूर हो जाती हैं, लेकिन उनकी कहानी, सस्पेंस और भावनात्मक गहराई दर्शकों के दिलो-दिमाग पर हमेशा के लिए छाप छोड़ देती है। रिलीज के कई साल बाद भी उनका रोमांच कम नहीं होता। भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी ही एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर वेब सीरीज है, जिसे आज भी मस्ट वॉच कंटेंट की सूची में शामिल किया जाता है। हम बात कर रहे हैं ‘ब्रीथ’ के पहले सीजन की, जिसे साल 2018 में अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया गया था। आठ साल बाद भी यह सीरीज अपनी दमदार कहानी और शानदार अभिनय के दम पर दर्शकों के बीच चर्चा में बनी हुई है।

एक बाप की बेबसी और नैतिक संघर्ष की कहानी

‘ब्रीथ’ की कहानी तीन मुख्य किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है, एक समर्पित लेकिन मजबूर पिता, उसका गंभीर रूप से बीमार बेटा और एक तेज-तर्रार, सूझबूझ वाला पुलिस अधिकारी। शुरुआत में कहानी एक सामान्य, खुशहाल परिवार की तरह आगे बढ़ती है, लेकिन जल्द ही सच्चाई सामने आती है कि पिता का बेटा एक जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है। उसे बचाने के लिए फेफड़े (लंग) ट्रांसप्लांट की जरूरत है, जिसके लिए एक उपयुक्त ऑर्गन डोनर की तलाश शुरू होती है। समय बीतता जाता है और डोनर नहीं मिलता। बेटे की हालत बिगड़ती देख पिता की बेबसी उसे ऐसे रास्ते पर ले जाती है, जहां नैतिकता और अपराध की रेखा धुंधली हो जाती है। वह उन लोगों को निशाना बनाना शुरू कर देता है, जिन्होंने ऑर्गन डोनर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया हुआ है। उसका तर्क है कि यदि वे लोग नहीं रहेंगे, तो उनके अंग उसके बेटे को मिल सकते हैं। यही सोच उसे एक खतरनाक अपराधी बना देती है।

जब अपराध बन जाए मजबूरी

सीरीज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक संघर्ष को भी बारीकी से दिखाती है। दर्शक एक ओर पिता की पीड़ा और असहायता को समझते हैं, तो दूसरी ओर उसके द्वारा किए जा रहे अपराधों को नज़रअंदाज़ भी नहीं कर पाते। यही द्वंद्व इसे एक सशक्त साइकोलॉजिकल थ्रिलर बनाता है। इस सीजन में पिता की भूमिका निभाई है आर माधवन ने, जिन्होंने अपने किरदार में गहराई और संवेदनशीलता का बेहतरीन संतुलन पेश किया है। वहीं पुलिस अधिकारी की भूमिका में अमित साद नजर आते हैं, जो मामले की तह तक पहुंचने के लिए लगातार जांच में जुटे रहते हैं। दोनों कलाकारों की टक्कर सीरीज को और भी रोमांचक बना देती है।

कहानी, निर्देशन और प्रभाव

‘ब्रीथ’ की कहानी बेहद कसावट के साथ आगे बढ़ती है। हर एपिसोड के साथ सस्पेंस बढ़ता है और दर्शक यह जानने को उत्सुक रहते हैं कि आखिरकार सच्चाई कब सामने आएगी। निर्देशन और बैकग्राउंड स्कोर भी माहौल को गहरा और प्रभावशाली बनाते हैं। इस सीरीज की लोकप्रियता का अंदाजा इसकी IMDb रेटिंग से भी लगाया जा सकता है। इसे 8.2/10 की शानदार रेटिंग मिली है, जो दर्शाती है कि यह कंटेंट दर्शकों और समीक्षकों, दोनों की कसौटी पर खरा उतरा है।

ओटीटी का बेस्ट कंटेंट

‘ब्रीथ’ के अब तक दो सीजन आ चुके हैं और दोनों ही दर्शकों को पसंद आए हैं। हालांकि पहला सीजन अपनी अनोखी कहानी और भावनात्मक तीव्रता के कारण अलग पहचान रखता है। यदि आप ऐसी सीरीज देखना चाहते हैं जो आपको सोचने पर मजबूर करे और अंत तक बांधे रखे, तो ‘ब्रीथ’ निश्चित रूप से आपकी वॉचलिस्ट में शामिल होनी चाहिए। आज भी रिलीज के वर्षों बाद यह वेब सीरीज भारतीय ओटीटी जगत की बेहतरीन साइकोलॉजिकल थ्रिलर में शुमार की जाती है।

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