
ललिता पवार।
बॉलीवुड में कुछ ऐसे दमदार कलाकार हैं, जिन्हें उनके नाम से ज्यादा किरदारों के लिए याद किया जाता है। ललिता पवार भी इन्हीं कलाकारों में से एक थीं। ललिता पवार इतनी दमदार अभिनेत्री थीं कि जिस भी फिल्म में होतीं, अपने अभिनय की छाप छोड़ देतीं। दर्शक कुछ भी भूल जाएं, लेकिन उन्हें नहीं भूल पाते थे। बड़े पर्दे पर तो उन्होंने अत्याचारी सास बनकर खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन सभी किरदारों पर ‘रामायण’ में निभाया मंथरा का किरदार भारी पड़ गया। रामानंद सागर की रामायण में उन्होंने ये किरदार ऐसी शिद्दत से निभाया कि दर्शक उन्हें असल में ऐसी ही नजरों से देखने लगे, जैसे वह सच में मंथरा हों। मंथरा कभी फिल्मों में हीरोइन बनने की चाहत लेकर आई थीं, लेकिन एक थप्पड़ के साथ उनका सपना भी धराशायी हो गया। चलिए आपको इस पूरी घटना के बारे में बताते हैं।
हीरोइन बनना चाहती थीं ललिता पवार
ललिता पवार ने मात्र 9 साल की उम्र में अभिनय करियर की शुरुआत कर दी थी। 1916 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में जन्मीं ललिता पवार का असली नाम अंबा लक्ष्मण राव सगुन था और उनके पिता पेशे से रेशम के व्यापारी थे। वहीं उनकी मां घर संभालती थीं। ललिता पवार को बचपन से ही अभिनय का शौक था, वह हीरोइन बनना चाहती थीं और उनकी प्रतिभा को देखते हुए उनके पिता ने भी उन्हें फिल्मों की दुनिया में कदम रखने की इजाजत दे दी।
9 साल की उम्र में किया डेब्यू
ललिता पवार तब सिर्फ 9 साल की थीं, जब पहली फिल्म ‘राजा हरिशचंद्र’ में काम किया। ये फिल्म 1928 में रिलीज हुई थी। ये उस समय की बात है जब भारत में मूक फिल्में बना करती थीं। ललिता पवार ने 9 साल की छोटी उम्र में ही साबित कर दिया था कि उनमें अभिनय कला कूट-कूटकर भरी है। उन्होंने बतौर बाल कलाकार कई फिल्मों में काम किया और समय के साथ हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बन गईं।
एक थप्पड़ ने बदल दी जिंदगी
ललिता पवार सिनेमा की दुनिया की बड़ी हीरोइन बनना चाहती थीं, लेकिन 1942 में एक थप्पड़ ने सब उलट-पुलट कर दिया। ललिता पवार ‘जंग-ए-आजादी’ की शूटिंग कर रही थीं, तभी एक सीन में को-एक्टर ने उन्हें थप्पड़ मारा। थप्पड़ इतना जोर का था कि वह ललिता पवार धड़ाम से फर्श में गिर गईं। उनकी आंख की नस फट गई और शरीर के एक हिस्से को लकवा मार गया। इस हादसे के बाद वह कई साल फिल्मों से दूर रहीं और फिर खुद को नई किरदारों में ढालकर वापसी की।
हीरोइन बनने का सपना टूटा तो बन गईं विलेन
1942 में फिल्म के सेट पर घटी घटना के बाद ललिता पवार का चेहरा पूरी तरह बदल गया। चेहरे के भी एक तरफ के हिस्से पर काफी प्रभाव पड़ा। ऐसे में उन्होंने हीरोइन नने की चाहत छोड़ दी और खुद को खलनायिका के किरदार के लिए तैयार किया। रामानंद सागर की ‘रामायण’ में मंथरा का किरदार निभाकर तो वह घर-घर में फेमस हो गईं। ललिता पवार ने अपने करियर में 700 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। हिंदी ही नहीं मराठी और गुजराती फिल्मों में भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी और एक अलग पहचान बनाई। लेकिन, जिंदगी के आखिरी दिन भी उनके लिए कम मुश्किलों भरे नहीं रहे। 1998 में उन्होंने मुंह के कैंसर के चलते इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
ये भी पढ़ेंः सब्यसाची मुखर्जी का महलनुमा घर देखा? बड़े झूमर-हरा-भरा गार्डन, देखकर भूल जाएंगे बॉलीवुड स्टार्स के आलीशान बंगले
Doonited Affiliated: Syndicate News Hunt
This report has been published as part of an auto-generated syndicated wire feed. Except for the headline, the content has not been modified or edited by Doonited



