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A. R. Rahman के बयान पर भड़के Ismail Darbar दरबार

A. R. Rahman के बयान पर भड़के Ismail Darbar दरबार

Image Source : INSTAGRAM@NAYLAALKHAJA, ISMAILDARBAROFFI
इस्माइल दरबार

बीते दिनों म्यूजिक कंपोजर और सिंगर एआर रहमान ने बीबीसी को एक इंटरव्यू दिया और बवाल मच गया। इस बातचीत के दौरान ऑस्कर विनिंग कंपोजर रहमान ने बॉलीवुड में कम्यूनल विचारधारा के प्रभाव का संभावित हवाला देते हुए कहा था कि शायद ये भी एक वजह हो सकती है कि उन्हें कम काम मिल रहा है। रहमान के इस बयान की चौतरफा आलोचना हुई और खुद बॉलीवुड सितारों ने इस तर्क को नकारते हुए गुस्सा भी जाहिर किया है। अब इस लिस्ट में म्यूजिक कंपोजर इस्माइल दरबार का भी नाम जुड़ गया है। देवदास जैसी क्लासिक फिल्म समेत कुल 22 मूवीज में अपनी म्यूजिक और आवाज की कला बिखेरने वाले इस्माइल दरबार ने एआर रहमान के कम्यूनिल वाली बात की आलोचना की है और यहां तक कहा कि अगर ऐसा होता तो देश में एक भी मुसलमान स्टार नहीं होना चाहिए थे। हाल ही में दरबार शुभोजीत घोष नाम के यूट्यूब चैनल पर पहुंचे जहां उन्होंने अपनी जिंदगी और अनुभवों के तमाम तथ्य बताए। 

एआर रहमान को लेकर क्या बोले इस्माइल दरबार?

इस्माइल ने रहमान के दावे को खारिज करते हुए तर्क दिया कि हिंदी सिनेमा का इतिहास इस धारणा का खंडन करता है। उन्होंने कहा, ‘अगर बॉलीवुड इंडस्ट्री सांप्रदायिक होती, तो इस देश में कोई भी मुसलमान स्टार नहीं बन पाता। इस्माइल दरबार, नौशाद या दिलीप कुमार जैसे सितारे नहीं होते। यह सब प्रतिभा और आपके भाग्य पर निर्भर करता है। साथ ही, आपके (एआर रहमान) जीवन में ऐसी कौन सी कमी है कि आपका पेट नहीं भर रहा? भगवान ने आपको सब कुछ दिया है, इसलिए अच्छे से जिएं। आप बहुत प्रतिभाशाली हैं, आप म्यूजिक कंपोज बहुत अच्छे से करते हैं। आप अच्छे गाने नहीं बनाते, लेकिन आप एक अच्छे साउंड डिजाइनर हैं।’ 

क्या बोले थे एआर रहमान?

बीते दिनों ऑस्कर विनर सिंगर एआर रहमान ने बीबीसी को इंटरव्यू दिया था। इस बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि आप साउथ इंडिया से आते हैं और तमिलियन होने के नाते क्या आपको कभी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव का सामना करना पड़ा? इस सवाल के जवाब में एआर रहमान ने कहा था, ‘मुझे कभी भाषाई आधार पर कोई भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि ये जरूर है कि बीते 7-8 साल से मुझे काम मिलने में काफी कमी आई है। लेकिन इसकी वजह भेदभाव नहीं है बल्कि हो सकता है कि ऐसे लोगों के हाथों में सत्ता आ गई है जो ज्यादा क्रिएटिव नहीं हैं, या फिर कम्यूनल के हल्के फुल्के भेदभाव से भी ये हो सकता है। लेकिन मैंने कभी भी सीधे तौर पर किसी तरह का भेदभाव का अनुभव नहीं किया है।’

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