
मयूर राज वर्मा।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो बिना किसी बड़े शोर-शराबे के अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। 70 और 80 के दशक में जब पर्दे पर अमिताभ बच्चन का जादू सिर चढ़कर बोल रहा था, तब एक दुबला-पतला बच्चा अपनी आँखों की गहराई और अभिनय की सादगी से दर्शकों का दिल जीत रहा था। वह कोई और नहीं, बल्कि मयूर राज वर्मा थे, जिन्हें दुनिया आज भी ‘छोटा अमिताभ’ के नाम से जानती है।
‘मुकद्दर का सिकंदर’ और रातों-रात मिली शोहरत
मयूर राज वर्मा के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ साबित हुई। फिल्म की शुरुआत में एक गरीब लड़के के रूप में उनकी एंट्री होती है, जो अपनी हिम्मत से एक महिला का चोरी हुआ पर्स वापस दिलाता है। उस महिला का उन्हें अपना बेटा बना लेना और फिर उसी बच्चे का बड़े होकर ‘एंग्री यंग मैन’ अमिताभ बच्चन बनना, दर्शकों के जेहन में आज भी ताजा है। इस फिल्म ने मयूर को रातों-रात स्टार बना दिया और वे निर्देशकों की पहली पसंद बन गए।
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उस दौर के सबसे महंगे चाइल्ड आर्टिस्ट
मयूर की लोकप्रियता का आलम यह था कि वे अपने समय के सबसे महंगे बाल कलाकार बन गए थे। फिल्म ‘लावारिस’ सहित अमिताभ बच्चन की लगभग हर बड़ी फिल्म में उनके बचपन का किरदार निभाने की जिम्मेदारी मयूर को ही मिलती थी। उनकी कद-काठी और अभिनय की शैली अमिताभ बच्चन से इतनी मेल खाती थी कि लोग उन्हें सचमुच बच्चन साहब का ही अक्स मानने लगे थे।
‘अभिमन्यु’ के रूप में महाभारत में बिखेरा जलवा
फिल्मों के बाद मयूर ने टेलीविजन की दुनिया में भी अपनी धाक जमाई। बीआर चोपड़ा की कालजयी ‘महाभारत’ में उन्होंने ‘अभिमन्यु’ का शक्तिशाली किरदार निभाया। चक्रव्यूह भेदते हुए उनके गुस्से और साहस भरे अभिनय ने दर्शकों को दंग कर दिया था। हालांकि महाभारत जैसे बड़े मंच पर सफलता मिलने के बावजूद उन्हें आगे बॉलीवुड में वैसे बड़े प्रोजेक्ट्स नहीं मिले जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
अभिनय छोड़ बने अरबों के कारोबारी
जब बॉलीवुड में रास्ते कठिन होने लगे तो मयूर ने एक साहसी फैसला लिया और अभिनय की दुनिया को अलविदा कह दिया। आज मयूर राज वर्मा भारत छोड़कर वेल्स (UK) में बस चुके हैं। वहां वे एक सफल बिजनेसमैन हैं और अपनी पत्नी नूरी के साथ मिलकर एक मशहूर रेस्टोरेंट ‘इंडियाना’ चलाते हैं। उनकी पत्नी वहां की प्रसिद्ध शेफ हैं। मयूर आज अरबों के टर्नओवर वाले कारोबार के मालिक हैं और एक खुशहाल पारिवारिक जीवन जी रहे हैं।
विदेश में आज भी जिंदा है अभिनय का शौक
भले ही मयूर ने चकाचौंध वाली दुनिया छोड़ दी हो, लेकिन उनके भीतर का कलाकार आज भी जीवित है। वे वेल्स में अपनी जड़ों और कला से जुड़े रहने के लिए एक्टिंग क्लासेस देते हैं और वर्कशॉप का आयोजन करते हैं। दो बच्चों के पिता मयूर आज भले ही पर्दे से दूर हों, लेकिन ‘मुकद्दर का सिकंदर’ का वह छोटा सा लड़का आज असल जिंदगी का भी ‘सिकंदर’ बन चुका है।
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