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तिहाड़ जेल में मौत की दुआ मांगती थी हीरोइन, 4 महीने तक दूभर हो गई थी जिंदगी

तिहाड़ जेल में मौत की दुआ मांगती थी हीरोइन, 4 महीने तक दूभर हो गई थी जिंदगी

Image Source : INSTAGRAM@SANDEEPAVIRK
संदीपा विर्क

बॉलीवुड एक्ट्रेस संदीपा विर्क एक मामले में करीब 4 महीने तक तिहाड़ जेल में बिता चुकी हैं। 6 करोड़ रुपयों के इस मामले में फंसी संदीपा को बीते दिनों जमानत मिली थी। इसके बाद उन्होंने हाल ही जेल के अनुभव को शेयर किया है। साथ ही ये भी बताया कि कैसे वे रोज मौत की दुआ मांगा करती थीं और उस दर्दनाक जिंदगी के तर्जुबे भी शेयर किए हैं। सिमरन जोत मक्कर से बातचीत में जेल में बिताए अपने समय को याद करते हुए संदीपा ने कहा, ‘तिहाड़ एक ऐसी जगह है जहां मैं अपने सबसे बड़े दुश्मन को भी नहीं भेजना चाहूंगी। जब मैं पहली बार वहां गई, तो मैंने भगवान से कहा कि मैं इसके लायक नहीं हूं। पहले दिन, जब मैं वॉशरूम गई, तो मैंने सोचा – लोग कहते हैं कि सब कर्म का फल है, शायद मैंने पिछले जन्म में कुछ गलतियां की हों, जानबूझकर या अनजाने में। मुझे लगा – मैं इसके लायक नहीं हूं।’ ‘मैं प्रार्थना करती थी कि मौत आए और मुझे अपने साथ ले जाए। सबसे बुरा तब लगता है जब आप जेल में होते हुए अपने माता-पिता को आपसे मिलने आते हुए देखते हैं। मैंने तो यहाँ तक कि उनसे मेरे कारण आने के लिए माफी भी मांगी। मेरे माता-पिता और भाई-बहन मेरे साथ खड़े रहे क्योंकि आपके अपने लोग ही आपको जानते हैं।’ 

बिगड़ने लगी थी सेहत

उन्होंने जेल के अंदर के जीवन को शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला बताया। तिहाड़ के अंदर, सोचिए 500 लोगों के साथ रहना, यह घरेलू राजनीति जैसा है। मेरी सेहत बहुत खराब हो गई थी। तनाव के कारण मैं बिना सहारे के खड़ी भी नहीं हो सकती थी। आज भी जब मैं इसके बारे में सोचती हूं, तो रो पड़ती हूं – मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ? जेल के अंदर के दैनिक जीवन का वर्णन करते हुए, विर्क ने स्वच्छता की स्थिति और दिनचर्या के बारे में बताया। शौचालयों में बहुत गंदगी है। जमीन पर सोना पड़ता है। बैरक सुबह 6 बजे खुलते हैं, 12 बजे बंद होते हैं, फिर दोपहर 3 बजे खुलते हैं और शाम 6 बजे तक बंद हो जाते हैं। खाना बहुत घटिया है—रोज वही दाल, वही सब्ज़ी, चार रोटी और चावल। कुछ भी खाने का मन नहीं करता।

पुलिसकर्मियों के बारे में भी की खुलकर बात

जेल के अंदर के व्यवहार के बारे में उन्होंने कहा, ‘कुछ महिला पुलिसकर्मी दयालु हैं, तो कुछ कैदियों पर अपना गुस्सा निकालती हैं।’ उन्होंने अपने ऊपर लगे कलंक के बारे में भी बताया, ‘जब मेरी खबर फैली, तो लोग कहते थे, इसने धोखाधड़ी की है। मैं सोचती थी, हत्या के आरोपियों के साथ नरमी बरती जा रही है, और मुझे उस चीज के लिए धोखेबाज कहा जा रहा है जो मैंने नहीं की।’

ये है पूरा मामला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 दिसंबर, 2025 को विर्क को जमानत दे दी, यह देखते हुए कि वह पहले ही चार महीने से अधिक समय हिरासत में बिता चुकी हैं और मुख्य आरोपी अमित गुप्ता के फरार होने के कारण मुकदमे की कार्यवाही में जल्द प्रगति होने की संभावना नहीं है। उन पर एक निवेश घोटाले से जुड़े अपराध की धनराशि कथित तौर पर प्राप्त करने का आरोप है, जिसमें एक शिकायतकर्ता को फिल्म में मुख्य भूमिका का वादा करके लगभग 6 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय ने आगे आरोप लगाया कि धनराशि उनके खातों के माध्यम से भेजी गई थी और संपत्ति अधिग्रहण और एक कथित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ी थी। अदालत ने सामान्य सिद्धांतों के तहत उन्हें जमानत दे दी, यह देखते हुए कि आरोप 2008-2013 के लेन-देन से संबंधित हैं।

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