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गुमनामी में कहां खो गए ‘रामायण’ के अंगद, रावण के दरबार में कोई नहीं हिला पाया था पैर

गुमनामी में कहां खो गए ‘रामायण’ के अंगद, रावण के दरबार में कोई नहीं हिला पाया था पैर

Image Source : STILL FROM RAMAYAN
अंगद।

रामानंद सागर की कालजयी कृति ‘रामायण’ भारतीय टेलीविजन इतिहास का वह सुनहरा अध्याय है, जिसे आज भी हर पीढ़ी का प्यार मिलता है। इस धारावाहिक के मुख्य पात्रों जैसे राम, सीता और हनुमान को तो दुनिया पूजती ही है, लेकिन कुछ ऐसे सहायक पात्र भी थे जिन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी। इन्हीं में से एक थे ‘अंगद’, जिनका किरदार निभाने वाले मुस्लिम अभिनेता बशीर खान ने अपनी कद-काठी और दमदार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। आइए जानते हैं बशीर खान के सफर और उनके वर्तमान जीवन के बारे में, वो एक्टिंग की दुनिया से फिलहाल दूर हैं।

रामायण के ‘अंगद’

रामानंद सागर की ‘रामायण’ में रावण की सभा में अंगद का पैर जमा देने वाला दृश्य आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। इस चुनौतीपूर्ण भूमिका को अभिनेता बशीर खान ने इतनी जीवंतता और शालीनता से निभाया कि वह घर-घर में लोकप्रिय हो गए। एक मुस्लिम कलाकार होने के बावजूद, उन्होंने हिंदू पौराणिक चरित्र की बारीकियों और उसकी गरिमा को जिस तरह पर्दे पर पेश किया, उसने सांप्रदायिक सद्भाव की एक अनूठी मिसाल पेश की। उनके संवाद बोलने के तरीके और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने उन्हें उस दौर का एक बड़ा सितारा बना दिया था।

रामानंद सागर के साथ करियर की शुरुआत

बशीर खान के अभिनय करियर की नींव रामानंद सागर ने ही रखी थी। उन्होंने अपने सफर की शुरुआत प्रसिद्ध फैंटेसी शो ‘विक्रम और बेताल’ से की थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए ही सागर साहब ने उन्हें ‘रामायण’ में अंगद जैसे महत्वपूर्ण रोल के लिए चुना। रामायण की सफलता के बाद बशीर खान केवल वहीं तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने बीआर चोपड़ा की ऐतिहासिक ‘महाभारत’ (1988) और रामानंद सागर के ही एक और सफल शो ‘श्री कृष्णा’ (1993) में भी अहम भूमिकाएं निभाईं। इन धारावाहिकों ने उन्हें इंडस्ट्री में एक विश्वसनीय कलाकार के रूप में स्थापित कर दिया था।

पहचान मिलने के बाद भी गुमनामी का साया

अक्सर देखा गया है कि पौराणिक शोज के कलाकारों को एक विशेष छवि में बांध दिया जाता है और बशीर खान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। ‘अंगद’ के रूप में अपार ख्याति प्राप्त करने के बाद उनके पास काम के प्रस्ताव तो आए, लेकिन वे उनके पिछले काम के स्तर के नहीं थे। एक बेहतर और प्रभावशाली किरदार की तलाश में उन्होंने कई छोटे-मोटे रोल ठुकरा दिए। धीरे-धीरे इंडस्ट्री में उन्हें मिलने वाले अवसरों में कमी आने लगी और वह समय के साथ चकाचौंध भरी दुनिया से दूर होते चले गए। अब वो कहां हैं और क्या कर रहे हैं, इसकी खासा जानकारी उपलब्ध नहीं है।

वर्तमान स्थिति और फैंस की अधूरी इच्छा

कोविड-19 महामारी के दौरान जब ‘रामायण’ का दोबारा प्रसारण हुआ तो नई पीढ़ी भी बशीर खान के अभिनय की मुरीद हो गई। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने उन्हें दोबारा पर्दे पर देखने की इच्छा जताई थी। हालांकि एक लंबे अंतराल और इंडस्ट्री में आए बदलावों के कारण उन्हें कोई ऐसा प्रोजेक्ट नहीं मिला जो उनकी काबिलियत के साथ न्याय कर सके। आज बशीर खान फिल्म जगत की हलचल से दूर एक गुमनाम जीवन व्यतीत कर रहे हैं, लेकिन ‘अंगद’ के रूप में उनके पैर जमाने का वह दृश्य भारतीय टीवी इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।

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