
‘मन पिशाच’ का ट्रेलर हुआ जारी।
2018 में आई ‘तुम्बाड’ तो आपको याद ही होगी। सोहम शाह स्टारर इस फोक हॉरर फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। यही नहीं, इस फिल्म को हॉरर जॉनर में कल्ट का दर्जा भी मिल चुका है। री-रिलीज होने पर इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर छप्परफाड़ कमाई की थी और सभी को चौंका दिया था। अब इस फिल्म के निर्देशक अनिल बर्वे अपनी नई फिल्म को लेकर चर्चा में हैं। जी हां, अनिल बर्वे अब अपनी नई फिल्म के साथ दर्शकों के बीच हाजिर हो रहे हैं, जिसका ट्रेलर जारी हो चुका है। इस फिल्म का नाम है ‘मन पिशाच’। हाल ही में उन्होंने ‘मायासभा’ नाम की एक और फिल्म रिलीज की थी और ‘मन पिशाच’ के साथ उन्होंने एक नया कारनामा कर दिखाया है। अनिल बर्वे ने अपनी नई फिल्म ‘मन पिशाच’ का निर्माण मात्र 33,000 रुपये में किया है।
जारी हुआ मन पिशाच का ट्रेलर
शनिवार को निर्देशक अनिल बर्वे ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘मन पिशाच’ का ट्रेलर जारी किया। इसी के साथ उन्होंने इस फिल्म के निर्माण से जुड़ी जरूरी जानकारी भी साझा की और साथ ही साथ फिल्म के बजट का भी खुलासा कर दिया। अनिल बर्वे ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया कि ये एक साइकोलॉजिकल फोक हॉरर फिल्म है। कहानी एक नायक के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक प्राचीन मंदिर की खोज में निकलता है और इसी यात्रा के दौरान उसका सामना भयानक शक्तियों से होता है। ट्रेलर में हर मोड़ पर राक्षसों और भूतों के सीन दिखाई देते हैं। फिल्म के ट्रेलर का एक-एक फ्रेम इतना डरावना है कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
मात्र 33 हजार में बनी है फिल्म
ट्रेलर साझा करते हुए अनिल बर्वे ने इस हॉरर फिल्म को बनाने के मेथड का भी खुलासा किया। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘ये 80 मिनट की फिल्म पूरी तरह से होम पीसी (घर के कम्प्यूटर) पर बनाई गई है और इसमें दो कलाकार हैं: यानिया भारद्वाज और दीपक दामले। कलाकारों के अभिनय को मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया गया था और इस प्रोजेक्ट के लिए 60 पेज की स्क्रिप्ट लिखी गई थी। फिल्म को हाथ से बनाए गए स्टोरीबोर्ड, फोटोशॉप, जनरेटिव एआई टूल्स और एडोब आफ्टर इफेक्ट्स के कॉम्बिनेशन से तैयार किया गया था।’ इसी पोस्ट में अनिल बर्वे ने ये भी बताया है कि फिल्म की कुल निर्माण लागत ठीक 33,000 रुपये थी।
मन पिशाच के निर्माण के पीछे की वजह
पोस्ट में आगे निर्देशक अनिल बर्वे ने इस फिल्म के निर्माण की वजह का भी खुलासा किया है। उन्होंने लिखा- ‘इस प्रयोग के पीछे एक बुनियादी सवाल था। क्या आर्थिक रूप से कमजोर फिल्म निर्माता अकेले दम पर पूरी फिल्म बना सकता है? इसके लिए सिर्फ कल्पना, कुछ बेसिक टूल्स, धैर्य और अटूट जुनून की जरूरत थी। अगर इस फिल्म को देखकर एक भी संघर्षरत अभिनेता प्रेरित होता है, तो यह प्रयोग सफल होगा।’
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