
रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ रिलीज होते ही ब्लॉकबस्टर का दर्जा हासिल कर ली है। फिल्म अपने एक्शन और सस्पेंस के साथ-साथ अपने चौंकाने वाले क्लाइमेक्स को लेकर चर्चा में है। फिल्म के अंत में एक ऐसे असली धुरंधर की एंट्री होती है, जो न केवल रणवीर सिंह के किरदार के लिए मसीहा बनकर उभरता है, बल्कि कहानी की दिशा ही बदल देता है। यह रहस्यमयी पात्र पिछले 45 सालों से पाकिस्तान की सीमाओं में घुस कर खुफिया तंत्र और राजनीति का हिस्सा बनकर उनकी नाक में दम करता है। क्लाइमेक्स का यह ट्विस्ट दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देने वाला है, जहां देशभक्ति और प्रतिशोध का अनूठा संगम दिखा। आखिर कौन है यह शख्स जिसने पर्दे पर रणवीर सिंह की जान बचाई और जिसका खौफ सरहद पार दशकों से कायम है? आइए जानते हैं फिल्म के इस रोमांचक अंत की पूरी कहानी।
क्लाइमेक्स है ट्विस्ट ही ट्विस्ट
क्लाइमेक्स में रणवीर सिंह मेजर इकबाल का खात्मा करने के बाद पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी द्वारा पकड़े जाते हैं। जहां उनकी खूब धुनाई होती है, ऐसा लगता है कि उन्हें तड़पा-तड़पा कर मौत के घाट उतार दिया जाएगा, तभी एक ट्विस्ट आता है और आर माधवन पाकिस्तानी अफ्सर को ब्लैकमेल करते हुए एक डील करते हैं और रणवीर सिंह को छोड़ने के लिए तैयार करते हैं। ये डील किस ब्लैकमेलिंग से क्रैक होती है, ये तो आपको फिल्म में देखना पड़ेगा, लेकिन इसके आगे क्या होता है ये आपको बताते हैं। रणवीर को खून से लथपथ अधमरी हालत में सून सान जगह छोड़ा जाता है, जहां उन्हें पिकअप करके सेफली भारत पहुंचाने के लिए एक कार आकर रुकती है। इस कार में वो असली धुरंधर होता है जो रणवीर को सीमा पार भारत पहुंचाने का जिम्मा पूरी तरह उठाता है।
सामने आता है असली धुरंधर का चेहरा
जैसे ही रणवीर सिंह गाड़ी में सवार होते हैं तो असल धुरंधर का चेहरा सामने आता है, ये कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तावी राजनेता जमील जमाली होता है, जिसका किरदार राकेश बेदी ने निभाया। रणवीर सिंह से बातचीत में रिवील होता है कि जमील जमाली 45 साल से पाकिस्तान में है और एक एजेंट बनकर आया था, धीरे-धीरे सिस्टम का हिस्सा बन गया और पाकिस्तानियों के बीच उठ-बैठकर अपनी जगह पक्की कर ली। रणवीर का किरदार जसकीरत कंफेस करता है कि वो दाऊद से मिला था और उसका खात्मा कर सकता था, लेकिन चूक गया। इसके जवाब में जमील जमाली बड़ा खुलासा करता है कि वो पहले ही दाऊद को स्लो पॉइजन दे चुका है, वो ऐसा कैसे करता है, इसकी झलकियां भी फिल्म में दिखाई गई हैं।
ऐसे होता है कहानी का अंत
रणवीर को यलीना और बेटे को भूल कर मूवऑन करने की सलाह देकर वो निकल जाता है। इसके बाद जसकीरत भारत लौटता और अपने गांव पठानकोट जाता है। इसके साथ ही फिल्म खत्म हो जाती है। क्रेडिट्स के साथ जसकीरत के हमजा बनने की तैयारी दिखाई जाती है। जमील जमाली का किरदार भले ही फिक्शन रहा हो लेकिन इस तरह से भारतीय एजेंट सालों-साल पाकिस्तान में रहते हैं, घर भी बसा लेते हैं।
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