
रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर 2’ धूम मचा रही है। एक्टर की खूब तारीफ हो रही है, फिल्म की बाकी कास्ट कमाल कर रही है। फिल्म में ‘रिजवान’ के किरदार को भी दर्शकों ने खूब सराहा। इस दमदार भूमिका को निभाने वाले अभिनेता मुस्तफा अहमद आज भले ही चर्चा में हों, लेकिन उनकी सफलता की चमक के पीछे संघर्षों की एक लंबी काली रात रही है। एक जिम ट्रेनर से सेलिब्रिटी फिटनेस गुरु और फिर एक अभिनेता बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी ड्रामा से कम नहीं है।
डिस्लेक्सिया से हार नहीं मानी
मुस्तफा का शुरुआती जीवन चुनौतियों से भरा था। ‘तारे जमीं पर’ के नन्हे ईशान की तरह मुस्तफा भी डिस्लेक्सिया से जूझ रहे थे, जिसके कारण पढ़ाई-लिखाई उनके लिए एक पहाड़ जैसी चुनौती बन गई थी। आखिरकार उन्हें अपनी औपचारिक शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी। एक पॉडकास्ट में अपनी यादें साझा करते हुए मुस्तफा ने बताया, ‘मैं पढ़ाई में अच्छा नहीं था, लेकिन फीजिकल एक्टिविटी से बहुत सक्रिय था। खेलकूद हो या डांस, अपने शरीर का इस्तेमाल करने वाले हर काम में मैं अव्वल रहता था।’ उनकी यही शारीरिक ऊर्जा ही आगे चलकर उनके जीवन का आधार बनी।
एक खत जिसने बदल दी जिंदगी
साल 2001 में महज 21 साल की उम्र में मुस्तफा एक कॉल सेंटर में टीम लीडर थे और महीने के एक लाख रुपये कमा रहे थे। यह एक ऐसी नौकरी थी जिसे कई लोग पाना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जनकपुरी के एक स्थानीय जिम में वर्कआउट के दौरान उन्होंने देखा कि एक ट्रेनर एक 40 साल की महिला की अनदेखी कर रहा है। मुस्तफा ने आगे बढ़कर उनकी मदद की। कुछ महीनों बाद उस महिला ने उन्हें एक लिफाफा दिया। उस खत में लिखा था कि वर्कआउट की मदद से उनके निजी जीवन और शादी में फिर से खुशियां लौट आई हैं। उन्होंने मुस्तफा से कहा, ‘यह तुम्हारा असली काम है और इसे न करना एक अपराध होगा।’
शून्य से शिखर की ओर
उस एक खत ने मुस्तफा के अंदर की आवाज को जगा दिया। उन्होंने अपनी मोटी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी। उनके बॉस ने उन्हें ‘पागल’ कहा और उनकी मां ने इस फैसले से नाराज होकर उनसे बात करना बंद कर दिया। मुस्तफा ने दिल्ली के एक छोटे से जिम में महज 10000 रुपये की नौकरी से शुरुआत की, जहां वह सुबह 4 बजे उठकर जिम का शटर खोलते थे। इसके बाद कनॉट प्लेस के फिटनेस फर्स्ट में उनकी ईमानदारी और बिना किसी औपचारिक डिग्री के भी काम के प्रति उनके जुनून ने उन्हें नौकरी दिलाई। वहां उनकी मेहनत का जादू ऐसा चला कि वह महज तीन महीने में पूरे एशिया के नंबर-1 ट्रेनर बन गए।
विश्व स्तरीय पहचान और आदित्य धर का साथ
मुस्तफा ने उस दौर में भारतीय ट्रेनर्स को मिलने वाले कम सम्मान को चुनौती दी। उन्होंने खुद से पूछा कि अगर वह अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर्स के बराबर काबिल हैं तो उन्हें वैसी पहचान क्यों नहीं मिल सकती? इसी जिद ने उन्हें ऋतिक रोशन जैसे सुपरस्टार का भरोसेमंद कोच बना दिया, लेकिन उनकी प्रतिभा केवल फिटनेस तक सीमित नहीं थी। निर्देशक आदित्य धर ने उनके अंदर छिपे कलाकार को पहचाना। फिल्म ‘धुरंधर’ की रिलीज से पहले मुस्तफा ने आदित्य के लिए एक भावुक संदेश लिखा था। उन्होंने बताया कि कैसे आदित्य हमेशा उनका हौसला बढ़ाते थे और कहते थे, ‘मैं हूं ना, तू कर।’
फिटनेस की हुई रणवीर सिंह से तुलना
मुस्तफा के अनुसार आदित्य ने उन्हें एक ऐसी यात्रा पर भेजा जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। आज मुस्तफा केवल एक सफल ट्रेनर नहीं, बल्कि एक उभरते हुए अभिनेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं, जिन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादा पक्का हो तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है। मुस्तफा की फिटनेस, एक्शनन और बॉडी की खूब तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि वो रणवीर सिंह से भी ज्यादा फिट हैं और उनका एक्शन रणवीर सिंह पर भी भारी पड़ा।
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