
हॉरर फिल्में और सीरीज किसे पसंद नहीं आतीं। हॉरर एक ऐसा जॉनर है, जिसे देखे बिना भी नहीं रहा जाता और देखा भी नहीं जाता। हर सीन और हर आहट पर लगता है जैसे अब कुछ घटने वाला है और हथेलियां बस आंखों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है, ताकि जैसे ही कोई डरावना सीन आए आंखें झट से बंद कर ली जाएं। अगर आप भी उन्हीं लोगों में से हैं, जिन्हें हॉरर कंटेंट पसंद आता है तो हम आपको एक ऐसी सीरीज के बारे में बताते हैं जो आपकी रातों की नींद उड़ा देगी। हम बात कर रहे हैं नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘टाइपराइटर’ की, जिसे देखकर किसी की भी रातों की नींद उड़ जाए।
हॉरर लवर्स के लिए परफेक्ट है ये सीरीज
अगर आप भी उन दर्शकों में से हैं, जिन्हें हॉरर कंटेंट देखने का शौक है तो ये सीरीज आपके लिए एकदम परफेक्ट। नेटफ्लिक्स की ये सीरीज सिर्फ 5 एपिसोड लंबी है, लेकिन इस पिद्दी सी सीरीज में डरावने सीन्स की कोई कमी नहीं है। हर एक सीन अपने आप में सस्पेंस लिए आता है और दर्शकों को अपनी पलकें बंद करने पर मजबूर कर देता है। खास बात तो ये है कि इस सीरीज की गिनती नेटफ्लिक्स की सबसे साफ-सुथरी सीरीज में होती है, लेकिन अगर आप इसे एक बार देख लेंगे तो आपकी रूह कांप जाएगी।
पांच एपिसोड में सिमट जाती है कहानी
नेटफ्लिक्स पर ये हॉरर सीरीज 2019 में आई थी, जिसकी कहानी एक भूतिया बंगले और टाइपराइटर के इर्द-गिर्द घूमती है। इस सीरीज में सिर्फ पांच एपिसोड थे और पालोमी घोष, पूरब कोहली, जिशु सेनगुप्ता और समीर कोचर जैसे कलाकार इस सीरीज में अहम किरदार निभाते दिखाई दिए थे। 2019 में जब ये सीरीज आई, दर्शकों से इसे बढ़िया रिस्पॉन्स मिला था। खासतौर पर इसके साफ-सुथरे कंटेंट को दर्शकों ने खूब सराहा।
टाइपराइटर की कहानी
सुजॉय घोष के डायरेक्शन में बनी ‘टाइपराइटर’ की कहानी की बात की जाए तो ये इस सीरीज एक भूतिया बंगले के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी बच्चों के एक घस्ट क्लब के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक शापित टाइपराइटर और एक पुरानी किताब के रहस्य को सुलझाने में जुट जाते हैं। इसी बीच एक परिवार इस भूतिया बंगले में रहने आता है और पुरानी डरावनी घटनाएं फिर से जीवंत हो उठती हैं। इस बंगले में अजीब-गरीब घटनाएं होने लगती हैं और घर में रहने वाले सदस्य भयभीत हो उठते हैं। इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि ये कहानी को बहुत खींचती नहीं, बल्कि पांच ही एपिसोड में खत्म हो जाती है। कहानी में ब्लड मून, एक फकीर और टाइपराइटर के डरावने रहस्य जैसे-जैसे बाहर आते हैं, खौफ का डोज भी दोगुना होता जाता है।
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