
मशहूर वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ में अपनी बेहतरीन अदाकारी से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री राजश्री देशपांडे इन दिनों अपने जीवन के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा कर खुलासा किया कि उन्हें ‘ग्रेड 1 ब्रेस्ट कैंसर’ का पता चला है और इसकी वजह से उन्हें सर्जरी करानी पड़ी है। इस खबर ने न केवल उनके फैंस को हैरान कर दिया है, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री में चिंता की लहर दौड़ गई है। 27 मार्च को साझा किए गए उनके इस पोस्ट में दर्द, संघर्ष और उससे लड़ने की अटूट इच्छाशक्ति की झलक दिखी। अब उन्होंने एक और पोस्ट साझा कर अपना दर्द बयां किया है।
राजश्री देशपांडे ने दिखाई अस्पताल की तनहाई
राजश्री ने अपनी इस जर्नी को बयां करते हुए अस्पताल की कुछ तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें वह बेड पर लेटी नजर आ रही हैं। अपनी पोस्ट में उन्होंने उस पल को याद किया जब उन्हें पहली बार अपनी बीमारी के बारे में पता चला था। राजश्री लिखती हैं कि हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट सेंटर के बाहर जब उन्हें कैंसर की पुष्टि हुई तो वह बिल्कुल अकेली थीं और खुद को संभाल नहीं पाईं। वह लम्हा इतना भारी था कि वह फूट-फूटकर रो पड़ी थीं। उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि उस समय उनमें कोई हिम्मत या ताकत नहीं बची थी। अक्सर लोग उनसे पूछते हैं कि इतनी फिट और स्वस्थ जीवनशैली होने के बावजूद उन्हें यह बीमारी कैसे हुई, लेकिन राजश्री के पास इसका कोई तार्किक जवाब नहीं है।
यहां देखें पोस्ट
शारीरिक तकलीफ से कहीं ज्यादा मानसिक आघात
कैंसर की लड़ाई केवल शरीर तक सीमित नहीं होती और राजश्री ने इसी मानसिक और भावनात्मक पहलू पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि शारीरिक दर्द तो एक तरफ था, लेकिन मानसिक तौर पर जो उन्होंने सहा, वह असहनीय था। वह कई बार पूरी तरह टूटकर बिखर गईं। कभी वह बंद कमरों में अकेले रोती थीं तो कभी अपने करीबी दोस्तों के सामने अपना दुख साझा करती थीं। हालांकि उन्होंने अपने दोस्तों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने हर कदम पर उन्हें संभाला। राजश्री का कहना है कि टूटने के बावजूद कई दिन ऐसे भी आए जब उन्होंने खुद को फिर से समेटा और यह संकल्प लिया कि वह इस बीमारी के आगे घुटने नहीं टेकेंगी।
कभी-कभी सिर्फ शांत रहना चाहती हैं एक्ट्रेस
अपनी लंबी पोस्ट में राजश्री ने मैरी ओलिवर की कविता का जिक्र करते हुए लिखा कि कुछ दिन ऐसे होते हैं जब उन्हें योद्धा बनने की या दुनिया भर की ताकत जुटाने की इच्छा नहीं होती। उन दिनों वह बस शांत रहना चाहती हैं। वह अपनी खिड़की पर बोगनवेलिया की बेल पर बैठी गौरैयों के साथ उगते सूरज को निहारते हुए सुकून तलाशती हैं। उनके लिए आज सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह सुबह एक मुस्कान के साथ उठ सकीं। उन्होंने खुद को एक प्यार भरा हग) दिया और उन सभी लोगों को याद किया जो इस मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने उन सभी शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उन्हें फोन, मैसेज और दुआओं के जरिए हिम्मत दी। हालांकि वह जानती हैं कि आने वाला कल फिर से नई चुनौतियों और स्वास्थ्य संबंधी लड़ाइयों को लेकर आएगा, लेकिन फिलहाल वह इस पल को केवल प्यार और पॉजिटिव एनर्जी के नाम करना चाहती हैं।
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