
‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की शुरुआत में मिहिर महाराज से पूछता है कि तुलसी के अकेले अस्पताल जाने के बारे में उसे कैसे पता चला। गायत्री बताती है कि तुलसी किसी को परेशान नहीं करना चाहती थी। मिहिर उसे ढूंढने के लिए दौड़ता है, लेकिन उसी समय तुलसी भी अंदर आ जाती है और उससे कहती है कि उसे उससे कुछ पर्सनल बात करना चाहती है, लेकिन पूरे परिवार के सामने बात करना पड़ता है। मिहिर उससे पूछता है कि क्या हुआ है? तुलसी उसे नोयना की हालत के बारे में बताती है और मिहिर तुरंत कहता है कि नोयना उससे झूठ बोल रही है। तुलसी कहती है कि उसने खुद डॉक्टर से बात की है और यह झूठ नहीं है।
नोयना के सोपर्ट में उतरी तुलसी
कहानी में आगे देखने को मिलता है कि कैसे तुलसी-मिहिर से नोयना के बारे में बात करते हुए, कहती है कि इस बात उसे हमारे प्यार और साथ की जरूरत है। गायत्री को लगता है कि नोयना को उसके पापों की सजा मिल रही है। नंदिनी को नोयना की इतनी हिम्मत पर यकीन ही नहीं होता। तुलसी इतन तमाशे के बाद भी नोयना की आखिरी इच्छा पूरी करना चाहती है। तलुसी सभी को बताती है कि वह एक शादीशुदा औरत के तौर पर मरना चाहती है और उसका पति मिहिर हो। यह सुन मिहिर और परिवार के लोगों के होश उड़ जाते हैं। मिहिर सबको कहता है कि इस बातचीत को यहीं खत्म कर दें। तुलसी कहती है कि इसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तुलसी की बातें सुन मिहिर को लगेगा झटका
तुलसी सभी को सच बताने के बाद बहुत ही सोच-समझकर बोलती है और मिहिर को याद दिलाती है कि वह नोयना के साथ छह साल रहा है। नोयना ने हर मुश्किल में परिवार की इज्जत के लिए लड़ाई लड़ी है और वह नोयना को अपनी छत के नीचे मरने नहीं दे सकती, वरना समाज को शांतिनिकेतन के बारे में बातें करने का एक और मौका मिल जाएगा।
मिहिर-तुलसी में नोयना को लेकर होगी अनबन
वह मिहिर को याद दिलाती है कि जब वह मंदिरा के साथ रिश्ते में था तब उसने कुछ नहीं कहा था और उनके रिश्ते से हुए बच्चे को भी अपना लिया था। वह उससे कहती है कि उसने जितना दुख सहा है। उतना कोई और कभी नहीं जान पाएगा, लेकिन उसने इस परिवार के लिए लड़ना कभी नहीं छोड़ा। वह उससे कहती है कि वह यह सब नोयना के लिए नहीं मांग रही है। वह यह बात उसकी दोस्त, उसकी पत्नी और शांतिनिकेतन की बहू के तौर पर कह रही है, क्योंकि वह उनके नाम को बदनाम नहीं होने दे सकती।
मौत से पहले मिहिर की सुहागन बनेगी नोयना
मिहिर उससे कहता है कि वह उसकी पत्नी है और ऐसा करना उसके लिए नामुमकिन है। तुलसी उससे कहती है कि वह कोई एहसान नहीं कर रही है। वह जानती है कि इस बात से उसे कितना गहरा दुख पहुंचेगा। वह जानती है कि इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन वह उससे सिर्फ तीन महीनों के लिए नोयना से शादी करने को कह रही है सिर्फ तब तक, जब तक उसकी मौत न हो जाए। मिहिर बेबस हो जाता है और उसकी शर्त मान जाता है, लेकिन सिर्फ मिहिर भी शर्त रखता है और कहता है कि वह एक शर्त पर नोयना से शादी करेगा, जब तुलसी शांतिनिकेतन छोड़कर नहीं जाएगी। वह उसके साथ रहेगी और उससे दूर नहीं जाएगी। वह उसकी गैर-मौजूदगी बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। तुलसी फूट-फूटकर रो पड़ती है। बच्चे हैरान-परेशान होकर खामोशी से यह सब देखते रहते हैं।
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