
पॉपुलर टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में इन दिनों भावनाओं और ड्रामे का ऐसा तूफान आया है जिसने दर्शकों को स्क्रीन से बांध दिया है। अनुपमा हमेशा से अपने स्वाभिमान और सच्चाई के लिए जानी जाती है, एक बार फिर एक ऐसी अग्निपरीक्षा के मुहाने पर खड़ी है जहां एक तरफ उसके कठोर सिद्धांत हैं और दूसरी तरफ उसके अपने रिश्तों की खुशियां। हालिया ट्रैक में एक बड़ा मोड़ तब आया जब अनुपमा को एक नए रेस्टोरेंट के इंस्पेक्शन की जिम्मेदारी सौंपी गई। इंस्पेक्शन के दौरान उसे कई खामियां मिलीं, जिन्हें वह ईमानदारी से दर्ज कर ही रही थी कि उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे पता चला कि जिस रेस्टोरेंट को वह फेल करने वाली है, उसका मालिक कोई और नहीं बल्कि उसका अपना दामाद प्रेम है।
अपनों का दबाव और स्वाभिमान की लड़ाई
आगामी एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अनुपमा जब घर लौटकर इस दुविधा का जिक्र बाबूजी से करती है तो पूरा परिवार उसके खिलाफ खड़ा हो जाता है। हमेशा की तरह रिश्तों का दुष्चक्र उसे अपनी गिरफ्त में लेने लगता है। बा, पाखी और तोशू जैसे सदस्य उस पर दबाव बनाना शुरू कर देते हैं कि वह अपनी रिपोर्ट बदल दे ताकि प्रेम का रेस्टोरेंट और उसका लाइसेंस बच सके। अनुपमा, जो गोवा से लौटकर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने का सपना देख रही थी, अब फिर से अपनों के तानों और नाराजगी का शिकार बन रही है। कोठारी परिवार भी अब अनुपमा को संदेह की नजर से देखने लगा है,ृ और प्रेम की दादी वसुंधरा तो उसे साक्षात ‘अपशकुन’ तक करार देने से नहीं चूकतीं।
वसुंधरा की गुहार और रिश्तों का बोझ
कहानी में एक भावुक मोड़ तब आता है जब वसुंधरा कोठारी, जो प्रेम के भविष्य को लेकर डरी हुई हैं, अनुपमा के सामने झुकने को तैयार हो जाती हैं। वह प्रेम के सपने को बचाने के लिए अनुपमा के पैरों में गिरने तक की बात कहती हैं। लेकिन अनुपमा के लिए यह इतना सरल नहीं है। वह जानती है कि गलत को सही कहना उसके उसूलों के खिलाफ है। जहाँ एक तरफ कोठारी परिवार उसे पुरानी कड़वाहट और ‘प्रार्थना’ की मौत का जिम्मेदार ठहरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने बच्चे राही और माही भी उसकी इस ईमानदारी से नाराज हो जाते हैं। अनुपमा एक बार फिर खुद को अकेला महसूस करने लगती है, जहाँ उसके हर कदम को परिवार की तबाही का कारण मान लिया जाता है।
नई उम्मीद और गोवा का न्यौता
जब अनुपमा चारों तरफ से हार मानकर टूटने लगती है, तभी किस्मत उसके लिए एक नया दरवाजा खोलती है। दिग्विजय को इस बात का एहसास होता है कि उसकी बेटी सावी जिस जोशी बेन की फैन थी, वह असल में अनुपमा ही है। जब अनुपमा का अपने ही घर और परिवार में दम घुटने लगता है, तब दिग्विजय उसे सहारा देते हैं। वह अनुपमा को वापस गोवा चलने का प्रस्ताव देते हैं ताकि वे दोनों मिलकर सावी के कैफे को फिर से खड़ा कर सकें। यह मोड़ अनुपमा की जिंदगी में एक नई सुबह का संकेत है, जहाँ वह शायद उन रिश्तों को पीछे छोड़ देगी जो उसकी पहचान की कीमत पर टिके हुए हैं। क्या अनुपमा इस बार अपने उसूलों के लिए घर का त्याग करेगी? यह देखना वाकई दिलचस्प होगा।
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