
निर्मलजीत सिंह सेखों के रोल में दिलजीत दोसांझ।
‘बॉर्डर 2’ में दिलजीत दोसांझ ने एक ऐसा किरदार निभाया है, जिसने फिल्म को भावनात्मक गहराई देने के साथ-साथ दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। भारतीय वायु सेना के वीर अधिकारी फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों के रूप में दिलजीत की मौजूदगी सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक सच्चे नायक को सम्मान देने जैसा अनुभव कराती है। उनके संयमित और गरिमापूर्ण अभिनय ने इस किरदार को फिल्म के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बना दिया है।
फिल्म का इमोशनल एंकर बना सेखों का किरदार
फिल्म में सेखों का किरदार कहानी का भावनात्मक आधार बनता है। युद्ध के रोमांचक दृश्य जहां जोश भरते हैं, वहीं दिलजीत की परफॉर्मेंस उन पलों में मानवीय संवेदनाएं जोड़ती है। सोनम बाजवा मंजीत के किरदार में उनके साथ नजर आती हैं, जो प्रेम, प्रतीक्षा और त्याग की भावना को मजबूती देती हैं। होशियार सिंह दहिया और महेंद्र सिंह रावत जैसे किरदारों के साथ सेखों की मौजूदगी फिल्म को संतुलन और गहराई प्रदान करती है।
कौन थे निर्मलजीत सिंह सेखों
निर्मलजीत सिंह सेखों भारतीय सैन्य इतिहास के एक असाधारण नायक थे। उनका जन्म 17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना जिले के इस्सेवाल गांव में हुआ था। उनके पिता मानद फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे, जिससे देशसेवा की भावना उन्हें विरासत में मिली। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर भारतीय वायु सेना में शामिल होने का फैसला किया और 4 जून 1967 को फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
1971 युद्ध में दिखाई अद्वितीय वीरता
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सेखों ने Gnat लड़ाकू विमान उड़ाए और असाधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने एक पाकिस्तानी सेबर जेट को मार गिराया और श्रीनगर हवाई क्षेत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान वायु सेना के अचानक हमलों के दौरान भी वे लगातार मोर्चे पर डटे रहे।
श्रीनगर की रक्षा करते हुए वीरगति
14 दिसंबर 1971 को छह पाकिस्तानी सेबर जेट्स ने श्रीनगर एयरफील्ड पर हमला किया। उस समय अंतरराष्ट्रीय समझौते के कारण वहां एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद नहीं था। विषम परिस्थितियों में भी सेखों ने उड़ान भरने का फैसला किया और दुश्मन विमानों से भिड़ गए। संघर्ष के दौरान उन्होंने दो सेबर जेट्स का सामना किया और अंततः देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।
परमवीर चक्र से सम्मानित अद्वितीय नायक
निर्मलजीत सिंह सेखों को उनकी बेजोड़ बहादुरी के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे भारतीय वायु सेना के पहले और एकमात्र अधिकारी हैं जिन्हें यह सर्वोच्च सैन्य सम्मान प्राप्त हुआ। उनकी स्मृति में लुधियाना में एक प्रतिमा स्थापित की गई है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान की याद दिलाती है।
सेखों के आखिरी शब्द
सेखों की पत्नी मंजीत थीं, जिन्होंने बाद में दूसरी शादी कर ली। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार उनके अंतिम शब्द थे, ‘मुझे लगता है मुझे गोली लगी है, घुम्मन… आओ और उन्हें मारो।’ ये शब्द आज भी उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक हैं।
बॉर्डर 2 में सच्चे हीरो को श्रद्धांजलि
बॉर्डर 2 में दिलजीत दोसांझ ने इस ऐतिहासिक वीरता को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा है। फिल्म की थिएटर रिलीज के बाद 23 जनवरी को सनी देओल का सेखों के परिवार से मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सच्चे भारतीय नायक को दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।
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