
अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत अपने विवादित बयानों को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। युवा हिंदू महिलाओं की जीवनशैली और भाषा पर टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ कहने पर जब विवाद गहराया तो कंगना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो रील साझा कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया और तथाकथित फेमिनिस्टों पर तीखा हमला बोला और भारतीय समाज में सिविक सेंस और सांस्कृतिक मर्यादा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अपने बयान में साफ किया कि भौंडेपन की जगह नहीं, उसको छोड़ कर मर्यादा में नहीं रह सकते तो कमरे तक ही सीमित रहना होगा। उन्होंने ये भी कहा पीएम मोदी को कुछ बच्चे अपना एग्जाम बडी मानते हैं, वहीं कई लोग उन्हें उन्हें अपना नेता, अपना आराध्य मानते हैं, कई लोग उन्हें भगवान मानते हैं तो ऐसे में लोगों की भावनाओं का सम्मान करना ही पड़ेगा।
मीडिया पर साधा निशाना और स्पष्ट की अपनी मंशा
अपने इंस्टाग्राम वीडियो में कंगना ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर और केवल टीआरपी और फॉलोअर्स पाने के उद्देश्य से दिखाया जा रहा है। उन्होंने शिकायत की कि मीडिया ने स्काईरूट कार्यक्रम की सफलता पर उनकी बधाई और नीट के परीक्षार्थियों को दी गई शुभकामनाओं जैसे सकारात्मक संदेशों को नजरअंदाज कर दिया। अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए उन्होंने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि हमारे घर के बच्चों को कोई अश्लील शब्दों से जोड़कर उनका यौन शोषण करे, जिससे घर के बुजुर्गों के सामने शर्मिंदगी महसूस हो। हम इस तरह के व्यवहार को कतई स्वीकार नहीं करेंगे और न ही इसे नॉर्मलाइज होने देंगे।’
‘फेमिनिज्म’ और अनुशासन पर खुलकर बोलीं सांसद
कंगना ने उन नारीवादियों पर भी सवाल उठाए जो महिलाओं पर ‘मर्यादा और गरिमा का बोझ’ डाले जाने का विरोध कर रही थीं। कंगना ने कड़े शब्दों में पूछा कि क्या कोई माता-पिता अपनी बेटियों को ऐसा आचरण सिखाएंगे? उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुशासन में रहना कोई व्यक्तिगत पसंद या विकल्प नहीं है, बल्कि समाज का एक अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा, ‘अगर आपको समाज में रहना है तो संविधान और नियमों के हिसाब से चलना पड़ेगा। आपकी स्वतंत्रता वहां खत्म होती है जहां दूसरे व्यक्ति की नाक और कान शुरू होते हैं।’ उनके अनुसार स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि दूसरों की भावनाओं या सामाजिक ढांचे को ठेस पहुंचाई जाए।
प्रधानमंत्री पर टिप्पणी और नागरिक बोध की आवश्यकता
सार्वजनिक जीवन में प्रयुक्त भाषा और व्यवहार पर बात करते हुए कंगना ने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति या उसके परिवार को अपशब्द कहना कोई कूल’ होना नहीं है। देश के प्रधानमंत्री का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना एग्जाम बडी मानते हैं, जबकि कई लोग उन्हें अपना नेता, दोस्त या भगवान का रूप मानते हैं। ऐसे में किसी की जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरों का सम्मान करना और भाषा में गरिमा बनाए रखना एक बेसिक सिविक सेंस है, जिसे हर नागरिक को सीखना ही पड़ेगा।
‘फेमिनिज्म’ को बताया भटकाव, दी भावी जीवन की चेतावनी
कंगना ने युवाओं को सचेत करते हुए कहा कि वे फेमिनाजी सोच के बहकावे में आकर अपनी जिंदगी बर्बाद न करें। उन्होंने कहा कि इस तरह का छिछोरापन या अभद्र व्यवहार केवल अपने बंद कमरे तक ही सीमित रखा जा सकता है। बाहर सार्वजनिक जीवन में सभी को एक निश्चित सीमा और मर्यादा में रहना होगा, वरना उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने विज्ञान का हवाला देते हुए कहा कि मानव जीवन का आधार इवोल्यूशन है, लेकिन उग्र नारीवादी सोच युवाओं को जानवरों जैसी प्रवृत्तियों की ओर धकेल रही है, जिसका अंत केवल जेल या पतन हो सकता है। कंगना ने सभी के विकास और सद्बुद्धि की कामना करते हुए गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं भी दीं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन और जेन जी पर पहले भी साधा था निशाना
गौरतलब है कि यह विवाद हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जेन जी के छात्र प्रदर्शनों के बाद शुरू हुआ। 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद कई आपत्तिजनक और अभद्र वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिस पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्लेटफॉर्म्स को उन्हें हटाने के निर्देश दिए थे। उन वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने पहले भी लिखा था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में एक ही जगह इतनी अभद्रता कभी नहीं देखी और उन रील्स में इस्तेमाल की गई भाषा उनके लिए बेहद निराशाजनक थी। इन्हीं बयानों के बाद से उनके और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच जुबानी जंग जारी है।
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