
- उदंत मार्तंड के 200वें वर्ष के उपलक्ष्य में नागपुर में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
- वरिष्ठ पत्रकारों का हुआ सम्मान, भाषाई सौहार्द्र पर दिग्गजों ने रखे विचार
नागपुर
“जीवन में सफलता और नैतिकता के बीच संतुलन आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। यदि कभी इन दोनों में से किसी एक को चुनना पड़े, तो हमेशा नैतिकता का मार्ग अपनाएं। पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा एक गंभीर दायित्व है और देशहित से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता।” यह प्रेरक विचार उद्योगपति एवं पद्मश्री सत्यनारायण नुवाल ने व्यक्त किए।
वे शनिवार को रमन साइंस सेंटर के ऑडिटोरियम में पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI), नागपुर चैप्टर और हिंदी पत्रकार संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह में अध्यक्षीय संबोधन दे रहे थे। यह गरिमामयी आयोजन देश के पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ के प्रकाशन के 200 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर किया गया था, जिसका मुख्य विषय ‘भाषाई विवाद से दूर रही है नागपुर की पत्रकारिता’ था। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई तथा दिवंगत वरिष्ठ शायर बशीर बद्र को मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

नागपुर में भाषा नहीं, अपनापन और संवाद बोलता है: प्रकाश दुबे
दैनिक भास्कर के समूह संपादक प्रकाश दुबे ने नागपुर की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित करते हुए कहा, “नागपुर में भाषा कभी विवाद का कारण नहीं बनी, बल्कि हमेशा संवाद का सेतु रही है।” उन्होंने वर्ष 2008 के मुंबई के एक घटनाक्रम का स्मरण करते हुए बताया कि संकट के उस दौर में नागपुर ने हिंदी भाषियों को दिल से अपनाया था। नागपुर की यह खूबी है कि यहाँ लोग व्याकरण की परवाह किए बिना सहजता से हिंदी और मराठी दोनों बोलते हैं। यहाँ भाषा अहंकार का नहीं, बल्कि आपसी स्वाभिमान और जुड़ाव का माध्यम है।
स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी पत्रकारिता का योगदान अतुलनीय: विजय फणशीकर
वरिष्ठ पत्रकार विजय फणशीकर ने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका मील का पत्थर रही है। जिस कठिन दौर में ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन शुरू हुआ, तब पत्रकारिता व्यवसाय नहीं बल्कि एक ‘मिशन’ थी। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल युग के बावजूद मुद्रित शब्दों (प्रिंट मीडिया) का महत्व और विश्वसनीयता हमेशा बनी रहेगी।

भाषाओं का वास्तविक भाईचारा देखना हो तो नागपुर आएं: श्रीपाद अपराजित
वरिष्ठ पत्रकार श्रीपाद अपराजित ने कहा कि नागपुर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ की भाषाओं के बीच का वास्तविक भाईचारा है। यहाँ के नागरिक घर में मराठी और बाहर निकलते ही सहजता से हिंदी बोलते हैं। इस क्षेत्र का ऐतिहासिक और सामाजिक ताना-बाना ऐसा है जहाँ दोनों भाषाओं का विकास एक-दूसरे के पूरक के रूप में हुआ है।
छोटा कार्यकाल, लेकिन दिशा दिखाने वाला रहा ‘उदंत मार्तंड’: प्रो. कुमुद शर्मा
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन काल भले ही छोटा रहा हो, लेकिन उसने भारतीय पत्रकारिता को एक नई दिशा दी। उन्होंने नागपुर की आत्मीयता की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी और मराठी का मूल भाव एक ही है, जो समाज को जोड़ने का काम करता है। हिंदी पत्रकार संघ के सचिव मनीष सोनी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी।
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित PRSI के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (पश्चिम) श्री एस पी सिंह ने नागपुर को पत्रकारिता के नए मापदंड स्थापित करने पर बधाई दी.

वरिष्ठ पत्रकारों का गरिमामयी सम्मान
इस ऐतिहासिक अवसर पर पत्रकारिता जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को पौधा, शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में शामिल हैं:
- चंद्रमोहन द्विवेदी, एस. एन. विनोद, आनंद निर्बाण,
- महेश पुरोहित, कृष्ण नागपाल, अतुल कोटेचा
- सुदर्शन चक्रधर, अमित वाजपेयी, मनीष सोनी
- पूर्णिमा पाटील एवं राजेश सिंह।
कार्यक्रम का सफल संचालन सुमन श्रुति ने किया तथा अंत में हिंदी पत्रकार संघ के सभापति आनंद निर्बाण ने सभी उपस्थित अतिथियों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नगरसेवक सर्व श्री शकील पटेल, दीपक पटेल, दर्शनी धवड, प्रमोद सिंह उपस्थित थे.
सर्वश्री यशवंत मोहिते, अखिलेश हलवे, प्रसन श्रीवास्तव,शरद मराठे, अनिल गडेकर, तरुण निर्बाण, मधुसूदन देशमुख, टीकाराम शाहू, अमित वाजपेयी व अन्य ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग किया.
