
भारतीय टेलीविजन के इतिहास में कुछ ऐसे धारावाहिक रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गए। एक दौर था जब शाम होते ही घरों में टीवी के सामने बैठना एक पारिवारिक अनुष्ठान जैसा होता था। उस समय एक ऐसी ही पागलपंती और हंसी की फुहार लेकर एक शो आया, जिसने मध्यमवर्गीय परिवार की परिभाषा को पूरी तरह से मजाकिया अंदाज में बदल दिया। अगर आप आज के दौर के लंबे खिंचने वाले धारावाहिकों से ऊब चुके हैं और कुछ ऐसा ढूंढ रहे हैं जो बिना किसी भारी-भरकम ड्रामे के आपको लोटपोट कर दे तो एक ऐसा खजाना मौजूद है जिसे आज भी रेटिंग्स के मामले में कोई मात नहीं दे पाया है। इस शो की सादगी और इसके किरदारों की अनोखी जुगलबंदी ने इसे एक कल्ट क्लासिक बना दिया है।
पारेख परिवार की बेजोड़ ‘खिचड़ी’
अगर आप सालों से एक ही तरह की कॉमेडी देखकर बोरियत महसूस कर रहे हैं तो ‘खिचड़ी’आपके लिए एक ताजी हवा के झोंके जैसा है। यह शो केवल एक धारावाहिक नहीं, बल्कि कॉमेडी की एक ऐसी मास्टरक्लास है, जिसे 8.6 जैसी शानदार IMDb रेटिंग मिली है। जहां ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ जैसे शो अपनी लंबी कहानियों के लिए जाने जाते हैं, वहीं ‘खिचड़ी’ की खूबसूरती इसके क्रिस्प और पंच-लाइन आधारित कंटेंट में है। पारेख परिवार की यह कहानी आपको एक ऐसे घर में ले जाती है जहाँ हर सदस्य अपने आप में एक अजूबा है। इस शो ने साबित किया कि बिना किसी फूहड़ता के भी दर्शकों को हंसाया जा सकता है।
किरदार जो बन गए हर घर की पहचान
इस शो की असली जान इसके कालजयी किरदार हैं। हंसा पारेख का मासूमियत से भरा ‘हलो, मैं तो थक गई भाई’ कहना हो या प्रफुल्ल का अपनी पत्नी के लिए अंग्रेजी शब्दों का बेतुका और मजाकिया अनुवाद करना, ये दृश्य आज भी मीम्स की दुनिया में छाए रहते हैं। ‘बाबूजी’ का हमेशा चिड़चिड़े रहना और प्रफुल्ल की मूर्खताओं पर उनका ‘प्रफुल्ल… तू तो गधा है’ कहना दर्शकों को हंसी के उस स्तर पर ले जाता है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। अनंग देसाई, सुप्रिया पाठक और राजीव मेहता जैसे मंझे हुए कलाकारों ने इन किरदारों में ऐसी जान फूंकी है कि आप उन्हें देखते हुए कभी बोर नहीं हो सकते।
तीन सीजन्स और हर बार एक नया धमाका
‘खिचड़ी’ के अब तक तीन सीजन सामने आए हैं और तीनों ने ही दर्शकों के दिल पर गहरी छाप छोड़ी है। पहले सीजन में जहाँ पारेख परिवार की सादगी और उनके रोजमर्रा के संघर्षों को कॉमेडी के चश्मे से दिखाया गया, वहीं जब यह शो ‘इंस्टेंट खिचड़ी’ के रूप में स्टार वन पर शिफ्ट हुआ तो इसकी चमक और बढ़ गई। दूसरे सीजन में पारेख परिवार को अचानक अमीर होते दिखाया गया, लेकिन उनकी ‘मूर्खतापूर्ण मासूमियत’ वैसी ही रही। सीजन 1 और 2 की अपार सफलता के बाद इसका तीसरा सीजन भी आया, जो भले ही थोड़ा संक्षिप्त था, लेकिन मनोरंजन के मामले में उतना ही दमदार था।
लंबी कहानियों के बीच ‘पंच-टू-पंच’ मनोरंजन
अक्सर देखा जाता है कि कई पॉपुलर कॉमेडी शो एक ही मुद्दे को हफ्तों तक खींचते हैं, जिससे दर्शक ऊबने लगते हैं। ‘खिचड़ी’ की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह बिना समय बर्बाद किए सीधे मुद्दे पर आता है। इसके हर सीन में कोई न कोई ऐसा ‘पंच’ होता है जो आपको हंसाने पर मजबूर कर देता है। यही कारण है कि आज के दौर में भी जब लोग तनाव से दूर होना चाहते हैं तो वे ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘जियो हॉटस्टार’ का रुख करते हैं। अगर आप भी तारक मेहता के रिपीट टेलीकास्ट देख-देखकर थक चुके हैं तो पारेख परिवार की यह पागलपंती आपकी शाम को शानदार बनाने के लिए तैयार है।
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