
बॉलीवुड के सुपरस्टार सिंगर कैलाश खेर आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं और इस खास मौके पर उन्हें सोशल मीडिया पर भर-भरकर बधाई भी मिल रही है। अनोखी और सुरीली आवाज के धनी कैलाश आज भले ही गायकी की दुनिया के सुपरस्टार बन गए हैं लेकिन उनके यहां तक का सफर काफी तल्ख रहा है। कैलाश ने अपने शुरुआती संघर्षों को लेकर खुलकर बात की है। इतना ही नहीं कैलाश खेर ने इंडिया टीवी के शो आप की अदालत में बताया था कि करीब 7 साल तक उन्होंने रोटी, कपड़ा और मकान के लिए जद्दोजहद की थी। लेकिन उनके संघर्षों और कला के प्रति उनकी दीवानगी ने उन्हें गायकी की दुनिया का स्टार बना दिया। आज जन्मदिन के मौके पर हम जानते हैं उनकी जिंदगी की कहानी जो उन्होंने इंडिया टीवी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में सुनाई है।
लंबे संघर्ष के बाद मिला मुकाम
बॉलीवुड में लंबा और संघर्षों से भरा सफर तय करने वाले कैलाश खेर ने अपने जीवन के कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि सफलता तक पहुंचने का उनका रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि हर कदम पर उन्हें असफलताओं का सामना करना पड़ा और कई बार हालात ऐसे बने कि वे पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गए। बातचीत के दौरान उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था, जब लगातार मिल रही नाकामियों और जीवन की कई गहरी चोटों ने उन्हें पूरी तरह निराश कर दिया था।
कैलाश खेर ने कहा कि वही दौर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले गए। संगीत, साधना और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने खुद को फिर से खड़ा किया और आज वे सिर्फ एक सफल गायक ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। जब रजत शर्मा ने उनसे पूछा, ‘लेकिन जब घर से निकले तो क्या-क्या बने? दर्जी बने, ट्रक ड्राइवर बने, प्रिंटिंग प्रेस में काम किया, चार्टर्ड अकाउंटेंट के असिस्टेंट भी रहे?’ इस पर कैलाश ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मुझे लगता है जैसे आपने उस्तादों से सीखा है, लेकिन मैंने तो हालातों से सीखा है। अब लगता है कि मैं इन्हीं अनुभवों से निकलकर आया हूं और मेरे दाता ने मुझे ऐसे निखार दिया, जैसे डार्क रूम में नेगेटिव धुलने के बाद साफ तस्वीर सामने आ जाती है।’
झुग्गियों में भी काटे गुर्बत के दिन
इसके बाद रजत शर्मा ने पूछा, ‘मुसीबतों का दौर भी आपने खूब देखा। कभी झुग्गी में रहे, कभी सड़कों पर कपड़े धोए, कई बार खाने तक के लाले पड़े। फिर आप एक्सपोर्टर बनने की सोचने लगे?’ इस पर कैलाश ने जवाब दिया, ‘साहब बनना चाहता था और बना भी। जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में सामान भेजता था। मदर टेरेसा साड़ी, हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग के कपड़े, हैंडीक्राफ्ट, आर्टिफैक्ट्स, टेबल लैंप और वॉल हैंगिंग जैसी चीजें राजस्थान के जोधपुर, जयपुर, लाल किला और सुंदरनगर के डीलरों से लेकर विदेश भेजता था। काम अच्छा चल पड़ा था और जुगाड़ भी जम गया था। फिर एक वक्त आया जब आखिरी शिपमेंट के लिए एडवांस दे दिया। मन में लगने लगा था कि अब जिंदगी पूरी तरह पटरी पर आ गई है और मैं कामयाब हो चुका हूं।’ कैलाश ने आगे बताया कि नोएडा के अट्टा पीर के पास की वह जगह आज भी याद है। लेकिन कहते हैं, कश्तियां साहिल के करीब हों, तब भी खुदा अपनी चाल चल देता है। मैंने भी जुनून में घर तो छोड़ दिया था, लेकिन बाद में समझ आया कि असली चुनौती तो नून-तेल-लकड़ी जुटाने और जिंदा रहने की होती है। पहले खुद को साबित करना पड़ता है। मैंने इतने छोटे-बड़े काम किए कि करीब सात साल तक खाने का भी कोई तय ठिकाना नहीं था। जिस इंसान के पास डिग्री नहीं होती, उसका न समय तय होता है और न कोई शेड्यूल। उससे हर कोई अपनी सुविधा के हिसाब से काम करवाता है। शायद हालात ने मुझे उसी तरह तैयार किया और जिंदगी की सबसे बड़ी सीख भी वहीं से मिली। आज कैलाश खेर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं और देशभर में उनके गाए गाने लोगों के दिलों में बसते हैं। गानों के साथ कैलाश अपने लाइव कॉन्सर्ट्स में भी खूब तालियां बटोरने के लिए मशहूर हैं। आज जन्मदिन के मौके पर फैन्स ने सोशल मीडिया पर मिल रही बधाइयों का तांता लगा है।
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