
90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले रामानंद सागर के पौराणिक धारावाहिक ‘श्री कृष्णा’ ने सफलता के नए आयाम छुए थे। ‘रामायण’ की अपार लोकप्रियता के बाद जब सागर साहब ने भगवान विष्णु के इस अवतार की लीलाओं को पर्दे पर उतारा तो हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। इस धारावाहिक की एक बड़ी खासियत यह थी कि श्रीकृष्ण के जीवन के अलग-अलग पड़ावों को दर्शाने के लिए छह अलग-अलग अभिनेताओं को चुना गया था। इनमें स्वप्निल जोशी और सर्वदमन डी बनर्जी के चेहरे आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कालिया नाग का घमंड चूर करने वाले ‘बाल कृष्ण’ का किरदार निभाने वाले नन्हे कलाकार आज साउथ इंडस्ट्री के एक जाने-माने अभिनेता हैं? जी हां, हम बात कर रहे हैं अशोक कुमार बालकृष्णन की।
महज 13 साल की उम्र में निभाया किरदार
अशोक कुमार बालकृष्णन ने जब इस ऐतिहासिक धारावाहिक में प्रवेश किया तब वे किशोर अवस्था में थे। केवल 13 वर्ष की आयु में उन्होंने भगवान कृष्ण के युवा रूप के किरदार को पर्दे पर इतनी खूबसूरती से जिया कि वे रातों-रात घर-घर में लोकप्रिय हो गए। उनकी मासूमियत और चेहरे के तेज ने दर्शकों को सम्मोहित कर दिया था। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अशोक ने एक साक्षात्कार में भावुक होकर कहा था कि वे आज जीवन में जो कुछ भी हैं, वह ईश्वर की ही असीम कृपा का परिणाम है। उन्हें साक्षात भगवान कृष्ण का रूप धरने और उनकी लीलाओं को पर्दे पर जीने का जो सौभाग्य मिला, वह उनके जीवन का सबसे बड़ा वरदान था।
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इस्कॉन मंदिर की परफॉर्मेंस और किस्मत का कनेक्शन
अशोक बालकृष्णन को इस धारावाहिक में काम मिलने की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम दिलचस्प नहीं है। दरअसल अशोक बचपन से ही भरतनाट्यम नृत्य में पारंगत थे। एक बार मुंबई के जुहू स्थित प्रसिद्ध हरे-कृष्णा इस्कॉन मंदिर में उनकी भरतनाट्यम की एक शानदार प्रस्तुति चल रही थी। उन्हीं दिनों रामानंद सागर श्रीकृष्ण के बाल्यकाल और युवावस्था के रोल के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश कर रहे थे, जिसके नैन-नक्श आकर्षक हों और जिसे शास्त्रीय नृत्य की भी समझ हो। उस नृत्य कार्यक्रम के दौरान दर्शकों में रामानंद सागर के एक बेहद करीबी व्यक्ति भी मौजूद थे। वे अशोक की प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत उनकी मां से संपर्क किया और उन्हें ऑडिशन के लिए भेजने का आग्रह किया।
800 बच्चों को पछाड़कर हासिल किया मुकाम
जब अशोक अपनी मां के साथ ऑडिशन देने पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। उस एक रोल के लिए देश भर से लगभग 700 से 800 प्रतिभावान बच्चे कतार में खड़े थे। इतने बड़े स्तर पर प्रतियोगिता देखकर 13 साल के अशोक एक पल के लिए सहम गए थे। खासकर जब उन्होंने महान निर्देशक रामानंद सागर को अपने सामने देखा तो उनके मन में थोड़ा डर बैठ गया। हालांकि सागर साहब के मिलनसार स्वभाव ने उन्हें जल्द ही सहज कर दिया। हैरान करने वाली बात यह रही कि रामानंद सागर ने उनका कोई कड़ा एक्टिंग टेस्ट नहीं लिया, बल्कि सिर्फ उनकी पढ़ाई-लिखाई और शौक के बारे में सामान्य बातचीत की। अशोक के सरल जवाबों और उनके चेहरे की सौम्यता को देखकर निर्देशक ने तुरंत उन्हें इस रोल के लिए फाइनल कर लिया।
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कोरियोग्राफी से लेकर साउथ सिनेमा के बड़े पर्दे तक का सफर
मूल रूप से मुंबई के रहने वाले अशोक कुमार अब चेन्नई को अपना आशियाना बना चुके हैं और दक्षिण भारतीय फिल्म जगत में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। अभिनय के साथ-साथ उनका झुकाव डांस की तरफ हमेशा रहा, यही वजह है कि उन्होंने हिंदी सिनेमा के मशहूर कोरियोग्राफर राजू खान के साथ बतौर असिस्टेंट कोरियोग्राफर भी कुछ समय तक काम किया। इसके बाद साल 2007 में उन्होंने तमिल फिल्म ‘मुरुगा’ से बतौर मुख्य अभिनेता अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और इसने अशोक के पैर तमिल सिनेमा में जमा दिए। आज चंद सुपरस्टार्स में गिने जाने लगे हैं। इसके बाद उन्होंने ‘पिड़िचिरकु’, ‘कोझी कूवुथु’, ‘कधल सोल्ला आसई’ और ‘गैंग्स ऑफ मद्रास’ जैसी कई बेहतरीन और दमदार तमिल फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। आज वे करीब 12 से 13 फिल्मों में काम कर चुके हैं और अभिनय की दुनिया में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
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