
1940 का दशक वह दौर था जब पूरा विश्व और भारत द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका तथा स्वतंत्रता संग्राम की हलचलों से गुजर रहा था। इसी कठिन समय में साल 1943 में एक ऐसी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई, जिसने देश के दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया। उस जमाने में फिल्मों का हफ्तों तक चलना ही बड़ी बात होती थी, लेकिन इस फिल्म ने कामयाबी के सारे पिछले रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। थिएटरों के बाहर टिकटों के लिए मीलों लंबी लाइनें लगती थीं और हर शो पूरी तरह हाउसफुल रहता था। लोग एक ही फिल्म को बार-बार देखने सिनेमाघर पहुंच रहे थे। इसी अभूतपूर्व दीवानगी की वजह से इस फिल्म को भारतीय सिनेमा के इतिहास की पहली ‘ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर’ फिल्म का दर्जा मिला। हम बात कर रहे हैं ऐतिहासिक फिल्म ‘किस्मत’ की।
2 लाख का बजट और बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों की कमाई
उस दौर में अधिकांश फिल्मों का ताना-बाना एक जैसे विषयों के इर्द-गिर्द बुना जाता था, लेकिन ‘किस्मत’ ने एक बेहद अनोखी और साहसी कहानी पेश की। प्रतिष्ठित फिल्म निर्माण कंपनी ‘बॉम्बे टॉकीज’ के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन ज्ञान मुखर्जी ने किया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि यह फिल्म बेहद सीमित संसाधनों और मात्र 2 लाख रुपये के मामूली बजट में तैयार की गई थी, लेकिन जब यह रिलीज हुई तो इसकी सफलता ने फिल्म समीक्षकों और निर्माताओं को चौंका दिया। उस दौर में करोड़ों की कमाई का सपना देखना भी नामुमकिन था, लेकिन ‘किस्मत’ ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 1 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर इतिहास रच दिया। इस फिल्म ने साफ कर दिया कि यदि कहानी में दम हो तो बजट मायने नहीं रखता।
हिंदी सिनेमा के पहले असली सुपरस्टार
इस फिल्म की अपार सफलता ने मुख्य अभिनेता अशोक कुमार को रातों-रात लोकप्रियता के उस शिखर पर पहुंचा दिया, जहां उनसे पहले कोई नहीं पहुंचा था। ‘किस्मत’ के बाद उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला ‘सुपरस्टार’ कहा जाने लगा। फिल्म में उनके साथ मशहूर अभिनेत्री मुमताज शांति नजर आई थीं। अशोक कुमार ने फिल्म में एक ऐसे चोर का किरदार निभाया था, जो अंदर से साफ दिल का है। उस दौर के सिनेमा के लिए यह एक बिल्कुल नया और बोल्ड प्रयोग था। दर्शक उनके इस स्टाइलिश अंदाज और अभिनय के इस कदर मुरीद हुए कि सिनेमाघरों में उनके दृश्यों पर जमकर तालियां और सीटियां बजती थीं।
बोल्ड विषय और अमर देशभक्ति गीत
‘किस्मत’ की कहानी अपने समय से काफी आगे मानी गई थी। फिल्म में बिना शादी के एक युवती के गर्भवती होने जैसे बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को दिखाया गया था। समाज के एक वर्ग ने इस पर आपत्ति भी जताई, लेकिन आम दर्शकों ने इस प्रगतिशील सोच का खुलकर स्वागत किया। इसके अलावा कवि प्रदीप द्वारा लिखा गया फिल्म का एक गीत ‘दूर हटो ऐ दुनिया वालों, हिंदुस्तान हमारा है’ जबरदस्त हिट रहा। इस गाने ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष कर रहे भारतीयों में देशभक्ति का नया जोश भर दिया और यह गीत हर स्वतंत्रता सेनानी की जुबान पर चढ़ गया।
रॉक्सी सिनेमा का वो अटूट रिकॉर्ड
इस फिल्म की लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण कोलकाता का रॉक्सी सिनेमा बना। वहां यह फिल्म बिना रुके लगातार 187 हफ्तों यानी लगभग साढ़े तीन साल तक चलती रही। यह अपने आप में एक ऐसा कीर्तिमान था, जिसे अगले 32 सालों तक भारतीय सिनेमा की कोई भी दूसरी फिल्म नहीं तोड़ सकी थी। बाद में इस फिल्म की लोकप्रियता को भुनाने के लिए इसे तमिल और तेलुगु भाषाओं में भी रीमेक किया गया। आज आठ दशक से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी ‘किस्मत’ को भारतीय फिल्म जगत की सबसे मील का पत्थर और ऐतिहासिक फिल्मों में बेहद सम्मान के साथ गिना जाता है।
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