
भारतीय सिनेमा में पिछले कुछ समय से एक बड़ा वैचारिक बदलाव देखने को मिला है। चमचमाते ग्लैमर और हैरतअंगेज एक्शन दृश्यों के बजाय अब दर्शक उन कहानियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो उनकी असल जिंदगी के करीब होती हैं। छोटे शहरों की सादगी, मध्यमवर्गीय परिवारों के आपसी रिश्ते और रोजमर्रा के संघर्षों पर आधारित फिल्में आज दर्शकों के दिलों को सीधे छू रही हैं। यही वजह है कि ऐसी सादगी से भरी और भावनात्मक फिल्मों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में पिछले साल यानी 2025 में एक ऐसी ही बेहतरीन फिल्म रिलीज हुई थी, जो सिनेमाघरों के बाद अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी धमाल मचा रही है। इस खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली तमिल फिल्म का नाम है’इडली कड़ाई’।
सादगी और गहरी भावनाओं का अनूठा संगम
इस प्रकार की फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी में छिपी होती है। इनकी कहानियां ऊपरी तौर पर बहुत साधारण लगती हैं, लेकिन स्क्रीन पर उनका प्रभाव बेहद गहरा और संजीदा होता है। परिवार की जिम्मेदारियां निभाना, समय के साथ रिश्तों में आने वाले उतार-चढ़ाव और अपनों के लिए किया जाने वाला त्याग, ये कुछ ऐसे पहलू हैं जिनसे हर आम इंसान खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है। जब किसी फिल्म में मजबूत अभिनय और सच्चे जज्बातों का मेल होता है तो वह सीधे दर्शकों की अंतरात्मा से जुड़ जाती है। ‘इडली कड़ाई’ ने भी गांव और परिवार के इसी ताने-बाने को बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है, जिसे लोग आज भी देखना पसंद कर रहे हैं।
एक लड़के के संघर्ष और घर वापसी की कहानी
इस फिल्म की पटकथा एक ऐसे युवा के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसका नाम मुरुगन है। मुरुगन के सपने बड़े हैं और वह अपनी जिंदगी संवारने तथा एक सफल करियर बनाने के इरादे से अपना गांव छोड़कर विदेश चला जाता है। उसे लगता है कि गांव की छोटी दुनिया में रहकर वह कुछ बड़ा हासिल नहीं कर पाएगा, लेकिन तभी नियति एक नया मोड़ लेती है। पिता के अचानक निधन के बाद मुरुगन को मजबूरन अपनी मातृभूमि और परिवार के पास वापस लौटना पड़ता है। गांव लौटने पर उसे न केवल अपनों की अहमियत का अहसास होता है, बल्कि वह अपने पिता की छोटी सी इडली की दुकान को फिर से खड़ा करने और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाने का फैसला करता है।
धनुष का बहुमुखी हुनर और शानदार स्टार कास्ट
यह एक तमिल ड्रामा फिल्म है, जिसे 1 अक्टूबर 2025 को बड़े पर्दे पर रिलीज किया गया था। इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धनुष ने न सिर्फ इसमें मुख्य भूमिका निभाई है, बल्कि उन्होंने ही इस फिल्म की कहानी लिखी है और इसका बेहतरीन निर्देशन भी किया है। उनके अलावा फिल्म में अरुण विजय, सत्यराज, निथ्या मेनन, शालिनी पांडे, राजकिरण और पी समुथिरकनी जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अपने अभिनय से जान फूंक दी है। फिल्म के भावुक पलों को और अधिक प्रभावशाली बनाने में संगीत निर्देशक जीवी प्रकाश कुमार के बैकग्राउंड स्कोर और गानों का बहुत बड़ा योगदान रहा है, जिसने गांव के माहौल को जीवंत कर दिया।
थिएटर्स में औसत प्रदर्शन, मगर ओटीटी पर रचा इतिहास
जब यह फिल्म सिनेमाघरों में आई तो समीक्षकों और दर्शकों से इसे मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला था। कुछ लोगों ने इसकी धीमी रफ्तार की आलोचना की, तो वहीं बड़ी संख्या में दर्शकों को इसकी दिल छू लेने वाली कहानी बेहद पसंद आई। यही वजह है कि IMDb पर इसे 6.5 की सम्मानजनक रेटिंग मिली। फिल्म का बजट करीब 100 करोड़ रुपये था, जबकि बॉक्स ऑफिस पर यह दुनियाभर में लगभग 71 करोड़ रुपये का ही कलेक्शन कर पाई, जिसके चलते इसे सिनेमाघरों में एक औसत फिल्म माना गया। हालांकि, असली जादू तब हुआ जब इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। डिजिटल मीडिया पर इस फिल्म ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने 200 दिन पूरे कर लिए हैं और आज भी यह दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में शुमार है।
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