
भारत की पसंदीदा रसोई ‘लाफ्टर शेफ्स 3’ में कृष्णा अभिषेक, कश्मीरा शाह से लेकर तेजस्वी प्रकाश और करण कुंद्रा जैसे सेलेब्स नजर आ रहे हैं, जो अपनी कुकिंग और कॉमेडी स्किल्स से दर्शकों को बांधे रखने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे। इस बीच इस शो के एक कंटेस्टेंट काफी चर्चा में हैं और इसकी वजह है उनकी दरियादिली। यहां बात हो रही है सुदेश लहरी की, जो आज के समय में देश के सबसे मशहूर कॉमेडियन्स में से एक हैं। आज सफलता की बुलंदियों पर छाए सुदेश लहरी ने अपनी जिंदगी में काफी संघर्ष का सामना किया है। एक समय ऐसा था, जब उनके परिवार के पास उनकी फीस भरने के भी पैसे नहीं थे, जिसके चलते वह स्कूल नहीं जा सके। पेट भरने के लिए उन्होंने जूते-चप्पल बनाने से लेकर ढाबे पर बर्तन धोने तक का काम किया। लेकिन, मुश्किल से मुश्किल समय में भी उन्होंने अपने अंदर की इंसानियत को नहीं मरने दिया। अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर में भी उन्होंने एक ऐसी महिला की सेवा की, जो उन्हें श्मशान घाट के बाहर मिली थी।
श्मशान घाट पर मिली महिला की सेवा की
सुदेश लहरी एक शानदार कॉमेडियन होने के साथ साथ एक्टर और सिंगर भी हैं। लेकिन, शुरुआत में उन्हें काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2007 में की थी और ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ में हिस्सा लिया, जिसने उन्हें हर तरफ मशहूर कर दिया। इससे पहले तक सुदेश लहरी की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। उन्होंने अपने गुजारे के लिए ढाबे में बर्तन धोने तक का काम किया, लेकिन उनकी किस्मत के तारे तब फिर गए, जब श्मशान में मिली एक महिला पर उनकी नजर पड़ी। सुदेश लहरी ने उस महिला की सेवा बिलकुल अपनी मां की तरह की।
अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे श्मशान घाट
सुदेश लहरी ने खुद कभी ये किस्सा किसी इंटरव्यू या शो में नहीं सुनाया है। लेकिन, हाल ही में ये मामला तब सामने आया, जब कृष्णा अभिषेक ने ये पूरा किस्सा ‘लाफ्टर शेफ्स 3’ में सुनाया। कृष्णा ने बताया कि सुदेश किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। श्मशान घाट में उन्होंने एक बूढ़ी महिला को एक कोने में बैठे देखा। उस महिला के शरीर पर घाव थे और वो बहुत तकलीफ में थी। सुदेश से बुजुर्ग महिला की तकलीफ देखी नहीं गई और वह उन्हें अपने साथ घर ले आए। अपने घर में उस महिला को सुदेश ने मां बनाकर रखा और खूब सेवा की। ये तब की बात है जब सुदेश कोई बड़े स्टार नहीं थे और न ही उनकी आर्थिक हालत ठीक थी। उन दिनों वह खुद ढाबे पर लोगों के जूठे बर्तन धोते थे।
मां बनाकर बुजुर्ग महिला की सेवा की
कृष्णा अभिषेक आगे बताते हैं कि, उन दिनों सुदेश लहरी की हालत बहुत खराब थी। फिर भी उन्होंने उस बुजुर्ग महिला को अपने घर में पनाह दी और उसकी सेवा की। इसके बाद जब उस महिला की मौत हुई तो उसने मरते समय सुदेश लहरी से कहा था- ‘तेरा कभी कुछ बुरा नहीं होगा और तू अपनी जिंदगी में बहुत सफल होगा’। बुजुर्ग महिला की कही बात के बाद सुदेश लहरी के दिन फिर गए। बुजुर्ग महिला के जाने के बाद ही सुदेश लहरी को मुंबई से पहला फोन आया और फिर अपने करियर की शुरुआत करते ही वो हर तरफ छा गए।
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