‘उनके साहस को सलाम’, हरभजन सिंह ने कर दिया फिल्म ‘सतलुज’ का रिव्यू

‘उनके साहस को सलाम’, हरभजन सिंह ने कर दिया फिल्म ‘सतलुज’ का रिव्यू

दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज ‘ 3 साल के संघर्ष के बाद आखिरकार 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफ्लॉर्म जी5 पर रिलीज हो गई थी। डायरेक्टर हनी तेहरान की इस फिल्म ने रिलीज के बाद ही काफी हल्ला मचाना शुरू कर दिया था और IMDB पर इसे 9.3 की रेटिंग भी मिली थी। लेकिन बीते रोज इसे ओटीटी से हटा दिया गया है और जी5 ने अपने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है। फिल्म हटने के बाद दिलीज ने भी अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है। हालांकि इस पोस्ट में उन्होंने फिल्म के ओटीटी से हटने को लेकर सीधे प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन फिर भी फैन्स ने इसे इसी की प्रतिक्रिया माना है। साथ ही  भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी सतलुज का रिव्यू किया है और इसे एक कमाल फिल्म बताते हुए जसवंत सिंह खालरा के साहस को भी सलाम ठोका है, जिनकी जिंदगी पर ये कहानी बनी है। 

हरभजन सिंह को कैसी लगी फिल्म?

डायरेक्टर हनी तेहरान की इस फिल्म को रिलीज के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है। करीब 3 साल तक रिलीज के लिए जंग लड़ती इस फिल्म ने आखिरकार ओटीटी का रास्ता चुना था और 3 जुलाई को फिल्म रिलीज हुई। रिलीज होते ही फिल्म लोगों के बीच पहुंची और उनकी आंखें नम कर गई। खासकर सिख कौम के उन लोगों को ये फिल्म काफी हिला गई जिन्होंने 90 के दशक के उस काले दौर में अपनों को खोया है। भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने फिल्म को लेकर एक पोस्ट अपने एक्स अकाउंट पर शेयर किया है। जिसमें उन्होंने लिखा, ‘जलियांवाला बाग का हत्याकांड इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। इसे औपनिवेशिक शासन ने अंजाम दिया था। लेकिन जसवंत सिंह खालरा की कहानी देखने के बाद मेरे मन में एक अलग ही सवाल उठता है- बाहरी लोगों के जुल्म से ज्यादा दर्दनाक क्या हो सकता है? जब वे लोग, जिन पर अपने ही लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वही उनके सबसे बड़े डर का कारण बन जाएं। एक पुलिस अफसर का फर्ज़ बेगुनाह लोगों की जान बचाना होता है—न कि अपनी ताकत का ग़लत इस्तेमाल करना। खालरा की हिम्मत ने लोगों को ग़ायब करने और गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार करने जैसे कथित गैर-कानूनी कामों के सबूत सामने लाए। इससे हमें याद दिलाता है कि सरकारी ताक़त के ग़लत इस्तेमाल से ऐसे ज़ख्म लग सकते हैं जो पीढ़ियों तक बने रहते हैं। पंजाब की माताएं आज भी जवाब का इंतजार कर रही हैं। कई परिवार आज भी इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। सच हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। जसवंत सिंह खालरा की कहानी को दुनिया के सामने लाने के लिए हनी तेहरान और दिलजीत दोसांझ का बेहतरीन काम। उनकी हिम्मत हमेशा याद रखी जानी चाहिए।’

ओटीटी से हटने के बाद दिलजीत का रिएक्शन

फिल्म भले ही ओटीटी से हट गई है लेकिन इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब देखने को मिल रही है। फिल्म को लेकर दिलजीत ने सीधे तौर पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन दिलजीत ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है। जिसमें उन्होंने फिल्म सतलुज का एक क्लिप लगाया जो अंधेरों में उजाला फैलाने की बात करता है। इस पोस्ट को फैन्स ने सतलुज फिल्म के ओटीटी से हटाने के बाद दिए दिलजीत के रिएक्शन से जोड़ा है। साथ ही दिलजीत का एक वीडियो भी वायरल है। जिसमें वे कहते दिख रहे हैं कि फिल्म हट गई है हट जाने दो लेकिन लोगों ने डाउनलोड कर ली है। बस कहानी बाहर आनी चाहिए और लोग इसे देख ही लेंगे। 

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