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महाभारत की सत्यवती याद है, दिलाई भीष्म को प्रतिज्ञा? रानी मुखर्जी से है खून का रिश्ता

महाभारत की सत्यवती याद है, दिलाई भीष्म को प्रतिज्ञा? रानी मुखर्जी से है खून का रिश्ता

बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक और पौराणिक धारावाहिकों ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक ऐसा सुनहरा अध्याय लिखा है, जिसे आज भी भुलाया नहीं जा सकता। ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ जैसे धारावाहिकों के किरदारों को दर्शकों ने सिर्फ पसंद ही नहीं किया, बल्कि उन्हें भगवान की तरह पूजा भी। इन धारावाहिकों में नजर आए कई कलाकार रातों-रात सुपरस्टार बन गए तो कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने अपनी शानदार अदाकारी से किरदारों को हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया। ऐसा ही एक बेहद प्रभावशाली किरदार था हस्तिनापुर की रानी ‘सत्यवती’ का। इस गंभीर और महत्वपूर्ण भूमिका को पर्दे पर जिस अभिनेत्री ने जिया, उनका नाम है देबाश्री रॉय। आइए जानते हैं कि टीवी इतिहास के इस महाकाव्य का हिस्सा रहीं देबाश्री बनर्जी आजकल कहां हैं और उनका जीवन कैसा रहा है।

महाभारत में रोल और कहानी का मुख्य प्लॉट

बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में देबाश्री रॉय ने महाराज शांतनु की पत्नी और हस्तिनापुर की रानी ‘सत्यवती’ (मत्स्यगंधा) का बेहद अहम किरदार निभाया था। कहानी के प्लॉट में सत्यवती का किरदार पूरी महाभारत की नींव रखने वाला माना जाता है। वह एक धीवर यानी मछुआरे की बेटी थीं, जिनकी सुंदरता और बुद्धि पर मोहित होकर राजा शांतनु उनसे विवाह करना चाहते थे। हालांकि सत्यवती के पिता ने शर्त रखी कि उनकी बेटी की संतान ही हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठेगी। इस शर्त को पूरा करने और अपने पिता की खुशी के लिए शांतनु के ज्येष्ठ पुत्र देवव्रत ने आजीवन ब्रह्मचर्य की भीषण प्रतिज्ञा ली, जिसके बाद वे ‘भीष्म’ कहलाए। सत्यवती के इर्द-गिर्द बुना गया यह प्लॉट हस्तिनापुर के सिंहासन के संघर्ष, कुरुवंश के विस्तार और आगे चलकर होने वाले विनाशकारी महाभारत के युद्ध की सबसे मुख्य वजहों में से एक बना। देबाश्री ने इस रोल में राजसी गरिमा और एक मां की महत्वाकांक्षा को बखूबी पर्दे पर उतारा था।

करियर की शुरुआत 

देबाश्री रॉय बंगाली सिनेमा का एक बेहद बड़ा और प्रतिष्ठित चेहरा रही हैं। उनके करियर की शुरुआत बतौर बाल कलाकार ही हो गई थी, लेकिन मुख्य अभिनेत्री के तौर पर उनका पहला बड़ा बंगाली शो और फिल्में 1970 और 80 के दशक में आईं। उन्होंने तरुण मजूमदार की फिल्म ‘कुहेली’ से खूब सुर्खियां बटोरीं। हिंदी सिनेमा में उन्होंने साल 1981 की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ’36 चौरंगी लेन’ से कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने बंगाली और हिंदी की कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया और साल 1995 में आई फिल्म ‘उन्नीशे अप्रैल’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।

रानी मुखर्जी से खास रिश्ता

बहुत कम लोग जानते हैं कि देबाश्री रॉय का बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रानी मुखर्जी से बेहद करीबी और खास रिश्ता है। देबाश्री रिश्ते में रानी मुखर्जी की सगी मौसी यानी मां की बहन लगती हैं। इस तरह उनका पूरा परिवार फिल्म जगत से गहराई से जुड़ा रहा है।

राजनीति की पारी

अभिनय की दुनिया में दशकों तक राज करने के बाद देबाश्री बनर्जी ने अपने जीवन में एक नया मोड़ लिया। उन्होंने साल 2011 में राजनीति का रुख किया। वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं और रायदीघी विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार 2011 और 2016 में विधायक चुनी गईं। हालांकि साल 2021 में उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के कारण पार्टी छोड़ दी और खुद को सियासत से दूर कर लिया।

आखिरी बार इस शो में आईं नजर

अगर बात करें कि वह आखिरी बार कहां नजर आईं तो वह लंबे समय बाद साल 2021 में बंगाली टेलीविजन धारावाहिक ‘सर्वजया’ में मुख्य भूमिका के साथ छोटे पर्दे पर वापस लौटी थीं, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बाद वह कुछ फिल्मों और टॉक शोज में भी दिखाई दीं। इसके अलावा साल 2024 में वो एक ओटीटी शो केमिस्ट्री माशी में नजर आई थीं।

अब कहां हैं देबाश्री?

आज के समय में देबाश्री रॉय चकाचौंध और मुंबई की लाइमलाइट से दूर कोलकाता में एक बेहद शांत और सादा जीवन बिता रही हैं। वह 60 वर्ष से अधिक की उम्र में भी बेहद ग्रेसफुल दिखती हैं। वर्तमान में वह अभिनय से दूरी बनाकर मुख्य रूप से एनिमल वेलफेयर के लिए काम कर रही हैं। उनका अपना एक एनजीओ है जो लावारिस और बीमार जानवरों की देखभाल करता है। महाभारत की ‘सत्यवती’ भले ही अब स्क्रीन पर ज्यादा सक्रिय न हों, लेकिन सामाजिक कार्यों के जरिए वह आज भी लोगों के दिलों में सम्मान जगा रही हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी है, लेकिन 2024 से एक्टिव नहीं हैं।

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