फिल्में तो हिट हुईं लेकिन किरदारों से नफरत कर बैठे 5 बॉलीवुड स्टार्स

फिल्में तो हिट हुईं लेकिन किरदारों से नफरत कर बैठे 5 बॉलीवुड स्टार्स

बॉलीवुड में एक लंबा और सफल करियर बनाने के दौरान अभिनेताओं को कई तरह की फिल्मों और किरदारों का हिस्सा बनना पड़ता है। कभी-कभी स्क्रिप्ट कागजों पर जितनी शानदार लगती है, पर्दे पर वह वैसी नजर नहीं आती। इसके अलावा कई बार कलाकार मजबूरी, अनुभव की कमी या किसी बड़े निर्देशक के साथ काम करने के लालच में ऐसी फिल्में साइन कर लेते हैं, जो बाद में उनके गले की फांस बन जाती हैं। समय बीतने के बाद इनमें से कुछ कलाकार खुलकर सामने आते हैं और सार्वजनिक मंचों पर अपने उन फैसलों पर गहरा अफसोस जताते हैं। आइए जानते हैं बॉलीवुड के ऐसे ही पांच बड़े सितारों के बारे में जिन्होंने अपनी ही सुपरहिट या चर्चित फिल्मों में काम करने को लेकर खुलकर अपनी निराशा और पछतावा जाहिर किया है।

शाहिद कपूर

संजय लीला भंसाली की भव्य और ऐतिहासिक फिल्म ‘पद्मावत’ बॉक्स ऑफिस पर एक ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। इस फिल्म में शाहिद कपूर ने राजपूत राजा रावल रतन सिंह का बेहद गंभीर और राजसी किरदार निभाया था। हालांकि फिल्म की रिलीज के बाद सारा लाइमलाइट रणवीर सिंह के ‘अलाउद्दीन खिलजी’ के खूंखार किरदार और दीपिका पादुकोण के हिस्से चला गया। फिल्म की भारी सफलता के बावजूद शाहिद कपूर अपने इस रोल से कभी संतुष्ट नहीं हो पाए। एक इंटरव्यू में इस बारे में खुलकर बात करते हुए शाहिद ने कहा था कि फिल्म में हर किसी ने बेहतरीन काम किया था, लेकिन कई बार वह खुद से ही सवाल करते थे कि उन्होंने यह फिल्म क्यों साइन की। उन्होंने कहा, ‘शूटिंग के दौरान कई बार मुझे ऐसा महसूस होता था कि मैं यह फिल्म क्यों कर रहा हूं?’

कैटरीना कैफ

कैटरीना कैफ आज बॉलीवुड की सबसे टॉप और सफल अभिनेत्रियों में शुमार की जाती हैं, लेकिन उनके करियर की शुरुआत बेहद अलग रही थी। साल 2003 में आई डार्क कॉमेडी थ्रिलर फिल्म ‘बूम’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही और इसके कंटेंट की काफी आलोचना भी हुई। कैटरीना ने बाद में इस फिल्म को करने पर गहरा अफसोस जताया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कैटरीना ने अपनी सफाई में कहा था कि जब उन्होंने यह फिल्म साइन की थी, तब वह भारतीय संस्कृति और परंपराओं से बिल्कुल अनजान थीं। उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे उस समय भारत के इस पहलू की समझ होती, तो मैं कभी यह फिल्म नहीं करती। मैं भविष्य में दोबारा कभी ऐसा कोई काम नहीं करूँगी।’

ट्विंकल खन्ना

ट्विंकल खन्ना आज भले ही एक सफल लेखिका और फिल्म निर्माता के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं, लेकिन 90 के दशक और साल 2000 की शुरुआत में वह अभिनय की दुनिया में काफी सक्रिय थीं। उनके करियर की सबसे चर्चित और विवादित फिल्मों में से एक साल 2000 में आई आमिर खान स्टारर ‘मेला’ थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी थी और आज भी इस पर कई मीम्स बनते हैं। ट्विंकल खन्ना खुद भी इस फिल्म को अपने करियर की एक बड़ी भूल मानती हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने मज़ाकिया लेकिन गंभीर लहजे में लिखा था, ‘मेरे पास आज यह मैसेज आया, और मैं यही कह सकती हूँ कि ‘मेला’ ने निश्चित रूप से मुझ पर और बाकी पूरे देश पर एक ऐसा निशान या घाव छोड़ दिया है, जिसे आप किसी भी नजरिए से देख सकते हैं।’

अभय देओल

सच्चे और संजीदा सिनेमा के लिए जाने जाने वाले अभिनेता अभय देओल ने साल 2011 में आई सोनम कपूर की फिल्म ‘आयशा’ में एक सपोर्टिंग रोल निभाया था। हालांकि फिल्म के रिलीज होने के बाद अभय इसके मेकर्स से काफी नाराज थे। उनका मानना था कि फिल्म को जेन ऑस्टेन के मशहूर उपन्यास ‘एम्मा’ का रूपांतरण बताया गया था, लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं था। अभय देओल ने एक इंटरव्यू में अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा था, ‘इस फिल्म का जेन ऑस्टेन की ‘एम्मा’ से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। शूटिंग के दौरान मुझे अहसास हुआ कि यह फिल्म अभिनय से ज्यादा कपड़ों और फैशन के बारे में थी। यहां तक कि इसके रिव्यूज में भी सिर्फ कपड़ों की तारीफ की गई। मैं आज यह साफ कहना चाहता हूं कि मैं अपने पूरे जीवन में ‘आयशा’ जैसी फिल्म का हिस्सा कभी नहीं बनूँगा। यह उस तरह का सिनेमा नहीं है जिसे मैं करना पसंद करता हूं।’

सैफ अली खान

साजिद खान के निर्देशन में बनी साल 2014 की कॉमेडी फिल्म ‘हमशक्ल्स’ सैफ अली खान के करियर की सबसे बड़ी भूलों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म में सैफ ने ट्रिपल रोल निभाए थे, जिसमें से एक किरदार में उन्हें महिला के गेटअप में क्रॉस-ड्रेसिंग भी करनी पड़ी थी। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद सैफ ने सरेआम इस फिल्म को करने पर पछतावा जताया था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया था, ‘मैं इस फिल्म में वो बनने की कोशिश कर रहा था, जो मैं असल में हूँ ही नहीं। इसका ह्यूमर ऐसा नहीं था जिसे मैं निजी तौर पर पसंद करता हूँ। यह फिल्म बेहद रूढ़िवादी और पिछड़ी हुई सोच वाली थी। सच तो यह है कि खुद इस फिल्म को देखते समय मैंने अपने आपसे पूछा था कि आखिर मैं इसमें क्या कर रहा हूं?’

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