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रामायण का ‘केवट’ जिसने धोए श्रीराम के चरण, 200 नाटकों में काम के बाद भी पहचान को तरसा

रामायण का ‘केवट’ जिसने धोए श्रीराम के चरण, 200 नाटकों में काम के बाद भी पहचान को तरसा

रामानंद सागर की ‘रामायण’ 80 के दशक में आया ये पौराणिक धारावाहिक अपने समय का सबसे सफल शो था और आज भी दर्शकों के बीच इसकी जबरदस्त पॉपुलैरिटी है। आज भी ये धारावाहिक टीवी के इतिहास के सबसे सफल पौराणिक धारावाहिकों में से एक है। यहां तक कि जेन जी भी इसे सबसे बेहतरीन शोज में से एक मानते हैं। इस धारावाहिक ने कई कलाकारों को पहचान दी, उनका करियर संवारा। अरुण गोविल ने प्रभु श्रीराम की भूमिका निभाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया तो वहीं दीपिका चिखलिया ने माता सीता के किरदार में जान फूंक दी। अरविंद त्रिवेदी ने रावण तो सुनील लहरी ने लक्ष्मण की भूमिका से सुर्खियां बटोरी। लेकिन, इस धारावाहिक का एक कलााकर ताउम्र स्टारडम को तरसता रहा और गुमनामी में ही इस दुनिया को छोड़ गया। यहां बात हो रही है केवट की भूमिका में नजर आए अभिनेता कौस्तुभ त्रिवेदी की।

200 नाटकों में किया काम

कौस्तुभ त्रिवेदी ने ‘रामायण’ में एक केवट का किरदार बहुत ही खूबसूरती से निभाया था। जिस भक्ति भाव के साथ वह प्रभु श्रीराम के चरण धोते हैं और उन्हें सरयू नदी पार कराते हैं, वह देखकर कोई भी भक्ति भाव में डूब जाए। कौस्तुभ त्रिवेदी ये किरदार इतनी खूबसूरती से शायद इसीलिए निभा सके, क्योंकि उन्हें अभिनय में महारत हासिल थी। वह थिएटर की दुनिया का जाना-माना नाम थे, लेकिन इसके बाद भी वह शोबिज की दुनिया में वो स्टारडम हासिल नहीं कर पाए, जिसके उन्होंने सपने संजोए थे।

गुजराती सिनेमा के दिग्गज नाम

कौस्तुभ त्रिवेदी सिनेमा की दुनिया का भी बड़ा नाम थे और ‘रामायण’ में केवट की भूमिका में भी दर्शकों पर छाप छोड़ने में सफल रहे। उन्होंने बतौर थिएटर आर्टिस्ट काभी शोहरत हासिल की,लेकिन टीवी और बड़े पर्दे पर वो कमाल नहीं दिखा सके। उन्होंने एक थिएटर आर्टिस्ट और प्रोड्यूसर के तौर पर करीब 200 नाटकों में काम किया और गुजराती थिएटर की दुनिया का मशहूर नाम बने, लेकिन शोबिज की दुनिया में वो ये कमाल नहीं दिखा सके। उन्होंने जिस तरह रामायण में केवट के किरदार में जान फूंकी, उसे देखकर लगा था कि वह अभिनय की दुनिया का चमकता सितारा बनेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और जैसे ही रामायण ऑफ एयर हुआ, कौस्तुभ भी जैसे कहीं गायब हो गए।

एक्टिंग से नाता तोड़ बने प्रोड्यूसर

बताया जाता है कि रामायण के खत्म होने के बाद कौस्तुभ ने अभिनय से नाता तोड़ दिया और नाटक प्रोड्यूस करने लगे। उन्होंने करीब 25 साल तक गुजराती थिएटर में अपना दबदबा कायम रखा। वहीं बीते साल ही उन्हें लेकर एक बुरी खबर आई थी। कौस्तुभ ने मई 2025 में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। बढ़ती उम्र की समस्याओं के चलते उनका निधन हो गया, जिससे पूरी इंडस्ट्री में मातम पसर गया था।

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