
दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी ने सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपना अनिश्चितकालीन अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद संवेदनशील संदेश साझा करते हुए कहा कि नाइंसाफी और व्यवस्था की कमियों के खिलाफ इस लंबी लड़ाई में देश को उनके जैसे सच्चे और मजबूत इरादों वाले इंसानों की बेहद जरूरत है। शबाना आजमी ने वांगचुक से अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का आग्रह किया और कहा कि उनका मार्गदर्शन देश भर के युवाओं और छात्रों को लगातार प्रेरित कर रहा है।
क्या है शबाना का कहना?
शबाना आजमी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर लिखा, ‘प्रिय सोनम वांगचुक, आप जैसे व्यक्ति की हमारे देश को बहुत जरूरत है। आप नाइंसाफी के खिलाफ खड़े हैं, सच के लिए खड़े हैं, हमें आप पर गर्व है।’ उन्होंने आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए उनके जीवित और स्वस्थ रहने की अहमियत पर जोर देते हुए आगे लिखा, ‘इसीलिए हम आपसे विनती करते हैं कि आप अपना उपवास तोड़ दें, क्योंकि हमारे विद्यार्थियों के लिए आपका मार्गदर्शन उनका हौसला बढ़ाता है। यह लड़ाई आगे तक लड़नी है, इसलिए आपका सेहतमंद रहना जरूरी है। हम आपके साथ हैं।’
वांगचुक के समर्थन में आगे आए बॉलीवुड के कई दिग्गज
सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को मनोरंजन जगत से लगातार बड़ा समर्थन मिल रहा है। शबाना आजमी से पहले भी कई जाने-माने फिल्मी सितारे वांगचुक के हक में अपनी आवाज उठा चुके हैं। हाल के दिनों में जीनत अमान, अभय देओल, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, ओमी वैद्य और टीवी अभिनेत्री रुबीना दिलैक जैसी हस्तियों ने भी वांगचुक की मांगों का समर्थन किया है। इन सभी कलाकारों ने उनके स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए उनसे भूख हड़ताल वापस लेने और एक स्वस्थ मार्गदर्शक के रूप में आंदोलन की अगुवाई करने की अपील की है। इस बीच दिल्ली में चल रहे इस प्रदर्शन को जून से ही विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं का भी भरपूर साथ मिल रहा है। वांगचुक खुद जून के आखिरी हफ्ते से इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है और यही वजह है कि देश के प्रबुद्ध नागरिक और कलाकार उनसे अनशन खत्म करने के लिए कह रहे हैं।
NEET परीक्षा विवाद और इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन की मुख्य वजह हाल ही में हुई नीट प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताएं और धांधली हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक इस पूरे मामले में जवाबदेही तय नहीं होती, वे पीछे नहीं फटेंगे। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि पेपर लीक विवाद और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी उन पीड़ित छात्रों के परिवारों के लिए भी न्याय की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर इस पेपर लीक विवाद और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। आंदोलन की मांग है कि प्रभावित परिवारों को सरकार की तरफ से 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। अपनी इन मांगों को लेकर इस समूह ने आगामी 20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा की है। यह वही दिन है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है और प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की रणनीति बना रहे हैं।
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