
अंधेरे कमरों में दबी फाइलें, सत्ता के गलियारों में बिकता सच और एक ऐसी अदालत जहां इंसाफ की तराजू पैसों के वजन से झुक जाती है। जब एक तरफ रसूखदार और ताकतवर लोग अपनी मर्जी से कानून की परिभाषा बदल रहे हों तो उनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत कौन करेगा? एक ऐसी युवा सरकारी वकील, जो अपने ही पिता के विशाल साम्राज्य और उनकी कानूनी महारत के सामने खड़ी है, लेकिन इस बार वह अकेली नहीं है, कोर्ट रूम की खामोशियों को टाइप करने वाली एक ऐसी महिला उसका साथ दे रही है जिसके पास कानून की किताबों से ज्यादा जमीनी हकीकत का तजुर्बा है। यह कहानी सिर्फ एक कत्ल के मुकदमे की नहीं है, बल्कि उस पूरे ढर्रे को चुनौती देने की है जिसके दम पर अपराधी सरेआम घूमते हैं।
‘सिस्टम’ की पेचीदा कहानी और मर्डर मिस्ट्री का जाल
इस सस्पेंस से भरे कोर्टरूम ड्रामा का नाम है ‘सिस्टम’। कहानी घूमती है नेहा राजवंश (सोनाक्षी सिन्हा) के इर्द-गिर्द, जो एक नामचीन और बेहद रसूखदार वकील रवि राजवंश (आशुतोष गोवारिकर) की बेटी है। नेहा अपने पिता की परछाई से दूर खुद को स्थापित करने के लिए एक संघर्षरत सरकारी वकील के रूप में काम कर रही है। कहानी में एक खौफनाक मोड़ तब आता है जब एक हाई-प्रोफाइल मर्डर केस सामने आता है, जिसमें एक मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की हत्या का आरोप देश के एक शक्तिशाली बिल्डर पर लगता है। इस केस में नेहा के सामने कोर्ट रूम में कोई और नहीं, बल्कि उसके खुद के पिता डिफेंस लॉयर के रूप में खड़े होते हैं। इस मुश्किल कानूनी भंवर में नेहा का सहारा बनती है कोर्ट की स्टेनोग्राफर सारिका (जियोतिका), जो अपनी तंगहाली के बावजूद कानून के हर दांव-पेंच को बखूबी समझती है। दोनों महिलाएं मिलकर इस मर्डर मिस्ट्री के पीछे छिपे उन काले राजों को खोलने निकलती हैं जो पूरे समाज को झकझोर कर रख देते हैं।
पर्दे पर दो दमदार महिलाओं की जुगलबंदी
फिल्म की असली ताकत इसकी बेहतरीन स्टार कास्ट और उनके बीच का टकराव है। सोनाक्षी सिन्हा ने नेहा के किरदार की परतों, उसकी कमियों और खुद को साबित करने की छटपटाहट को बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है। वहीं साउथ सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री जियोतिका ने स्टेनोग्राफर सारिका के रूप में अपनी खामोशी और आंखों के अभिनय से पूरी महफिल लूट ली है। उनकी जिंदगी का अकेलापन और सधा हुआ अंदाज दर्शकों को बांधकर रखता है। अनुभवी फिल्ममेकर आशुतोष गोवारिकर ने नेहा के पिता और एक शातिर वकील के रूप में बेहद सॉलिड और प्रभावशाली परफॉर्मेंस दी है। इनके अलावा आदिनाथ कोठारे और गौरव पांडे ने भी सहायक किरदारों में कहानी को आगे बढ़ाने में मदद की है।
अश्विनी अय्यर तिवारी का सस्पेंस थ्रिलर निर्देशन
आमतौर पर हल्की-फुल्की और पारिवारिक फिल्में बनाने के लिए मशहूर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी ने इस बार एक नया प्रयोग करते हुए सस्पेंस थ्रिलर और कोर्टरूम जॉनर में कदम रखा है। हरमन बावेजा, अरुण सुकुमार और अश्विनी द्वारा संयुक्त रूप से लिखित यह फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि समाज में आपके सामाजिक स्तर के हिसाब से न्याय की परिभाषा कैसे बदल जाती है। फिल्म का स्क्रीनप्ले दोनों महिलाओं के अलग-अलग बैकग्राउंड और अदालती दांव-पेंचों को बहुत ही सस्पेंस वाले अंदाज में पेश करता है।
कब, कहां देखें और क्या है IMDb रेटिंग?
यदि आप भी इस वीकेंड एक कड़क और रहस्य से भरपूर कोर्टरूम थ्रिलर देखने का मन बना रहे हैं, तो यह फिल्म 22 मई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर स्ट्रीम हो चुकी है। रिलीज होते ही दर्शकों और समीक्षकों से इसे मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। जैसी कि ये फिल्म आज ही रिलीज हुई ऐसे में इसे अभी रेटिंग नहीं मिली है। तो देर किस बात की अपने वीकेंड को रोमांचक बनाने के लिए आज ही प्राइम वीडियो पर लॉग-इन करें और देखें कि क्या नेहा और सारिका इस शक्तिशाली ‘सिस्टम’ को घुटनों पर ला पाती हैं।
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