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‘रामायण’ का रावण बन जीता दिल, 300 से ज्यादा फिल्मों में किया था काम, फिर एक्टिंग छोड़ राजनीति में आजमाया हाथ

‘रामायण’ का रावण बन जीता दिल, 300 से ज्यादा फिल्मों में किया था काम, फिर एक्टिंग छोड़ राजनीति में आजमाया हाथ

रामानंद सागर की ‘रामायण’ 39 साल पहले प्रसारित हुआ था, जिसकी कहानी, कास्ट और हर सीन लोगों के दिलों में आज भी बसे हुए हैं। उस वक्त भारत का ये सबसे लोकप्रिय पौराणिक टीवी शो था, जिसे देखने के लिए लोग अपना सारा काम समय से पहले खत्म कर टीवी के सामने हाथ जोड़कर बैठ जाते थे। ‘रामायण’ के राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान के अलावा इस महाकाव्य में एक ऐसा पात्र भी था, जिसका नाम इतिहास में दर्ज है। हम बात कर रहे हैं ‘रावण’ की, जिसका किरदार अरविंद त्रिवेदी ने निभाया था। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन इस शो ने उन्हें लंकापति रावण के रूप में अमर कर दिया।

रामायण के रावण बन कमाई शोहरत

‘रामायण’ में रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी की होश उड़ा देने वाली हंसी और उनका भयानक रंग-रूप आज भी याद कर डर लगता है। यही वजह थी कि उन्हें लंकेश रावण का किरदार मिला और वह छा गए। उन्हें इस दुनिया को अलविदा कहे 5 साल हो चुके हैं, लेकिन उनका यह किरदार आज भी दर्शकों के दिलों और यादों में जिंदा है। ‘रामायण’ में रावण बने अरविंद असल जिंदगी में बिल्कुल अलग थे। वे धार्मिक, शांत रहने वाले और भगवान राम के भक्त थे। इस किरदार की वजह से कुछ उनसे नफरत भी करते थे, लेकिन उन्होंने अपना ये किरदार बहुत अच्छे से निभाया। अरविंद त्रिवेदी को अपने अभिनय के लिए गुजरात सरकार से सात बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला।

अरविंद त्रिवेदी कैसे बने रावण से नेता

‘रामायण’ के लिए अरविंद त्रिवेदी ने साधु के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया था, लेकिन जैसे ही उन्होंने डायलॉग बोले उनकी आवाज, चेहरे के हावभाव और डरा देने वाली हंसी देखकर रामानंद सागर ने उन्हें रावण का किरदार निभाने का ऑफर दिया। इस रोल से उनकी किस्मत चमक गई। ‘रामायण’ की शानदार सफलता के बाद उन्होंने राजनीति की दुनिया में एंट्री की। 1991 में वे गुजरात के साबरकांठा से लोकसभा सांसद चुने गए, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में 5 साल तक संसद में काम किया।

अरविंद त्रिवेदी कहां के रहने वाले हैं?

8 नवंबर 1938 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मे अरविंद त्रिवेदी बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे। पढ़ाई खत्म होते ही उन्होंने थिएटर से एक्टिंग की शुरुआत की। उस दौरान अरविंद के साथ उनके बड़े भाई उपेंद्र त्रिवेदी भी अभिनय की दुनिया में अपनी किस्मत आजमा रहे थे। अरविंद त्रिवेदी ने अपने करियर में करीब 300 फिल्मों में काम किया था, जिनमें हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं की फिल्में शामिल थी। 

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