
डिजिटल मनोरंजन की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो केवल देखी नहीं जातीं, बल्कि जी जाती हैं। ‘द वायरल फीवर’ (TVF) ऐसी कई कहानियों का जन्मदाता है। ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ और ‘एस्पिरेंट्स’ के अलावा भी मेकर्स ने कई ऐसी सीरीज दीं जो मन कचोटने के लिए काफी हैं। आज ऐसी ही एक सीरीज के बारे में बताएंगे, जो 7 साल पहले रिलीज हुई, जिसे शानदार रेटिंग मिली है। सिर्फ 5 एपिसोड वाली इस वेब सीरीज के अब तीन सीजन आ चुके हैं। जिस सीरीज की हम बात कर रहे है, उसका नाम ‘कोटा फैक्ट्री’है। राघव सुब्बू के निर्देशन में बनी यह सीरीज न केवल छात्रों के बीच लोकप्रिय हुई, बल्कि इसने पॉप कल्चर पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। 2019 में अपनी शुरुआत के बाद से इस शो ने अब अपने सफल 7 साल पूरे कर लिए हैं।
सफलता की दौड़ और बेरंग जिंदगी का सच
इस सीरीज की कहानी राजस्थान के शिक्षा हब ‘कोटा’ पर आधारित है, जहां हर साल लाखों छात्र अपनी आंखों में आईआईटी (IIT) का सपना लेकर पहुंचते हैं। कहानी का केंद्र 16 वर्षीय वैभव (मयूर मोरे) है, जो इटारसी से कोटा आता है। यहां से शुरू होता है वैभव का वह सफर, जिसमें उसे न केवल कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, बल्कि दोस्ती, प्यार और खुद की पहचान बनाने के संघर्ष से भी गुजरना पड़ता है। यह शो केवल JEE परीक्षा की तैयारी के बारे में नहीं है, बल्कि यह उन भावनात्मक उतार-चढ़ावों की कहानी है जो एक छात्र अपने घर से दूर, दबाव के बीच महसूस करता है। यहां हर दिन एक नई चुनौती है और हर मोड़ पर एक नया सबक।
कलाकार और उनके यादगार किरदार
‘कोटा फैक्ट्री’ की सफलता का एक बड़ा श्रेय इसकी सधी हुई स्टार कास्ट को जाता है। वैभव के रूप में मयूर मोरे ने एक औसत छात्र की बेचैनी को बखूबी जिया है। रंजन राज (मीना) और आलम खान (उदय) ने दोस्ती के उन पहलुओं को जीवंत किया है, जो कोटा की नीरस जिंदगी में रंग भरने का काम करते हैं। शो में रेवती पिल्लई, उर्वी सिंह और एहसास चन्ना ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। लेकिन इस सीरीज का सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय किरदार ‘जीतू भैया’ (जितेंद्र कुमार) का है। जीतू भैया केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि छात्रों के मार्गदर्शक और फिलॉसफर बनकर उभरे हैं, जिनके संवाद आज भी युवाओं के बीच प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
ब्लैक-एंड-व्हाइट फॉर्मेट का अनूठा प्रयोग
इस सीरीज की सबसे अनूठी बात इसका प्रेजेंटेशन है। यह भारत की पहली ‘ब्लैक-एंड-व्हाइट’ वेब सीरीज है। हालांकि इसकी शूटिंग कलर्ड कैमरों पर हुई थी, लेकिन पोस्ट-प्रोडक्शन में इसे मोनोक्रोम (श्वेत-श्याम) कर दिया गया। इसके पीछे का उद्देश्य कोटा में कोचिंग लाइफ की ‘बेरंग’ और एकाकी प्रकृति को दर्शाना था। यह तकनीक दर्शकों को छात्रों के मानसिक दबाव और उनके संघर्ष से सीधे जोड़ने में सफल रही। इस नवीन प्रयोग और तकनीकी श्रेष्ठता के कारण शो को 2025 के IWM डिजिटल अवार्ड्स और IIFA डिजिटल अवार्ड्स में ‘बेस्ट स्टोरी’ और ‘मोस्ट पॉपुलर यूथ ड्रामा’ जैसे सम्मानों से नवाजा गया है।
कहां देखें और क्या है रेटिंग?
अगर आप इस प्रेरक और भावुक सफर का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो ‘कोटा फैक्ट्री’ के सभी सीजन Netflix पर उपलब्ध हैं (शुरुआती सीजन TVF Play और YouTube पर भी देखे जा सकते थे)। रेटिंग्स के मामले में भी यह शो शीर्ष पर है। IMDb पर इसे 9/10 की शानदार रेटिंग प्राप्त है, जो इसके शानदार होने और दर्शकों के प्रति इसके जुड़ाव को प्रमाणित करती है। टीवीएफ ने इस शो के माध्यम से साबित कर दिया है कि यदि कहानी सच्ची हो तो वह किसी भी रंग (या बिना रंग के भी) में लोगों के दिलों तक पहुंच ही जाती है।
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