
दिग्गज पत्रकार और लेखक एस हुसैन जैदी ने मुंबई में अपनी नई किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ इंडिया’ का विमोचन किया। इस अवसर पर सिनेमा और साहित्य जगत की जानी-मानी हस्तियां अपराध, सत्ता और उन महिलाओं की कहानियों पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुईं, जिन्होंने अंडरवर्ल्ड में अपनी पहचान बनाई। इस कार्यक्रम में फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा, निर्देशक विशाल भारद्वाज, अभिनेता जयदीप अहलावत, अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी और सह-लेखिका वेल्ली थेवर उपस्थित थीं। चर्चा में इस बात पर विचार किया गया कि अपराध की कहानियां कैसे बदल रही हैं और महिलाओं के नेतृत्व वाली कहानियां क्यों ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
किताब को लेकर क्या बोले राइटर?
एएनआई से बात करते हुए जैदी ने बताया कि किताब लिखने का विचार तब आया जब पाठकों ने उन्हें बताया कि माफिया क्वींस केवल मुंबई तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘लोगों ने मुझे बताना शुरू किया कि माफिया क्वींस केवल मुंबई में ही नहीं पाई जातीं। पूरे भारत में, लगभग हर राज्य में एक माफिया क्वीन मिल सकती है। इसलिए, मैंने सोचा कि मैं सबसे खतरनाक, सबसे चालाक और सबसे धूर्त महिलाओं को चुनूंगा।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘मैंने अपनी किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ इंडिया’ के लिए ऐसी 10 कहानियां चुनी हैं। मेरी सह-लेखिका वेली ने इस किताब को लिखने में मेरा बहुत साथ दिया। मेरे लिए यह कहना बहुत मुश्किल है कि मेरी पसंदीदा कहानी कौन सी है।’ फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने कहा कि माफिया में शामिल महिलाओं की कहानियां एक नया दृष्टिकोण पेश करती हैं, क्योंकि अपराध की कहानियां अक्सर पुरुषों पर केंद्रित होती हैं।
डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा भी हुए शामिल
डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने भी इस मौके पर कहा, ‘मुझे लगता है कि लोग आमतौर पर पुरुषों पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। जब आप ‘माफिया’ शब्द सुनते हैं, तो आप शायद ही कभी महिलाओं के बारे में सोचते हैं। मुझे लगता है कि यही अपने आप में एक बड़ा पहलू है। अपराध पत्रकार के रूप में उनके अनुभव और उनके द्वारा किए गए शोध को देखते हुए, इन कहानियों को पढ़ना एक बिल्कुल नया अनुभव होगा।’ निर्देशक विशाल भारद्वाज ने कहा कि माफिया की कहानियां पूरे भारत में फैली हुई हैं, न कि सिर्फ मुंबई में। उन्होंने एएनआई से कहा, ‘मुझे लगता है कि दायरा बढ़ गया है क्योंकि माफिया और अंडरवर्ल्ड सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं हैं। मुंबई में माफिया को बहुत ग्लैमरस तरीके से पेश किया जाता है, लेकिन पूरे भारत में माफिया नेटवर्क मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश का माफिया काफी दिलचस्प है। उत्तरी भारत की अपनी अलग कहानियां हैं। हुसैन ने जो शोध किया है, मैंने उनमें से एक-दो कहानियां पढ़ी हैं, वे बहुत अच्छी हैं। महिला किरदार कमाल के हैं। मुझे लगता है कि इस पर कई फिल्में बनेंगी।’
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