
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने राजनीति में अपने छोटे से सफर को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने खुलासा किया कि राजनीति से दूरी उन्होंने क्यों बना ली। एक्टर ने माना कि जनसेवा की मांग और राजनीति के प्रति पूरी तरह समर्पित न हो पाने के कारण आखिरकार उन्होंने राजनीति को अलविदा कह दिया। एक हालिया पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए अभिनेता ने कहा कि राजनीति में शत-प्रतिशत निष्ठा की आवश्यकता होती है, जो वे अपने अभिनय करियर को जारी रखते हुए नहीं दे पा रहे थे। इसलिए उन्होंने अभिनय की दुनिया में ही बने रहने का फैसला किया।
दौड़-भाग और काम के बोझ से बढ़ गई थी दवाइयां
साल 2014 में सक्रिय राजनीति में कदम रखने के बाद के अपने अनुभवों को साझा करते हुए परेश रावल ने स्वीकार किया कि इस क्षेत्र की जमीनी हकीकत उनकी कल्पना से बिल्कुल जुदा थी। उन्होंने बताया कि काम के अत्यधिक दबाव, लगातार यात्राओं और जिम्मेदारियों ने उनके स्वास्थ्य पर भी असर डालना शुरू कर दिया था। अभिनेता ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, ‘साल 2014 में जब मैं राजनीति में आया, उसके बाद मेरी मुश्किलें शुरू हुईं। मुझे ब्लड प्रेशर की समस्या तो पहले से थी, लेकिन राजनीति में आने के बाद मुझे रोजाना तीन गोलियां लेनी शुरू करनी पड़ीं, क्योंकि वहां काम बहुत ज्यादा करना पड़ता है। राजनीति में आने से पहले हमारा यह भ्रम था कि नेता आराम से एयर-कंडीशनर कमरों में मसनद लगाकर बैठते होंगे, लोग उनके पैर दबाते होंगे और वे आराम से काजू-किशमिश खाते होंगे, लेकिन जब मैं वहां पहुंचा तो हकीकत का पता चला। वे इतना काम कराते हैं कि इंसान दौड़ते-भागते थक जाता है।’
राजनीति को बताया बेहद गंभीर और समर्पित काम
परेश रावल ने साफ किया कि उनका इरादा कभी भी राजनीति में लंबा करियर बनाने का नहीं था और वे बहुत ही सीमित लक्ष्यों के साथ इस क्षेत्र में आए थे। समय के साथ उन्हें यह अहसास हो गया कि राजनीति उनके बस की बात नहीं है और यह क्षेत्र उनसे कहीं ज्यादा वक्त और भागीदारी की मांग कर रहा था। उन्होंने कहा, ‘मैंने राजनीति इसलिए छोड़ दी क्योंकि यह मेरा वास्तविक काम नहीं था। मैं वहां बहुत सीमित उद्देश्य के लिए गया था और मुझे कोई राजनीतिक करियर नहीं बनाना था। मेरी इसकी इतनी गहरी समझ भी नहीं है। मैं बस इतना समझ पाया कि यह एक बहुत ही नेक काम है, जिसके लिए आपको चौबीसों घंटे पूरी तरह इसी में डूबे रहना पड़ता है। अपना पूरा समय देने पर ही आप यहां टिक सकते हैं।ट
झूठ बोलने और बेईमान बनने का सताने लगा था डर
पॉडकास्ट के दौरान अभिनेता ने एक बेहद महत्वपूर्ण और गहरी बात साझा की। उन्होंने बताया कि सिस्टम की पूरी समझ न होने के कारण जनता से किए गए वादों को पूरा न कर पाना उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गया था। उन्हें डर था कि बार-बार झूठे आश्वासन देने से उनकी खुद की ईमानदारी प्रभावित हो रही थी। उन्होंने बताया, ‘एक सबसे अहम बात यह थी कि अगर मैं किसी आम इंसान से कह दूं कि मैं आपका काम करा दूंगा, लेकिन मुझे खुद सिस्टम की पूरी कार्यप्रणाली का पता नहीं है तो जब भी वे मुझसे आकर पूछेंगे कि ‘परेश भाई क्या हुआ?’ तो मुझे दो-तीन बार झूठ बोलना पड़ेगा कि ‘करता हूं, करता हूं।’ इस चक्कर में मैं अंदर से एक झूठा और बेईमान इंसान बनता जा रहा था। मेरे व्यक्तित्व में कमियां आने लगी थीं, जो अंत में मेरे एक अच्छा अभिनेता बने रहने की राह में बहुत बड़ी बाधा साबित होती।’
बीजेपी सांसद के रूप में दी थीं सेवाएं
गौरतलब है कि परेश रावल ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में अहमदाबाद पूर्व सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी और संसद सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। हालांकि कुछ समय बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और दोबारा अपना पूरा ध्यान फिल्मों पर केंद्रित कर लिया, जहां वे आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और बेहतरीन कलाकारों में गिने जाते हैं।
बात करें परेश रावल के वर्कफ्रंट की तो उनके पास कई फिल्में पाइपलाइन में हैं। वो जल्द ही ‘तेरा यार हूं मैं’ में नजर आएंगे। इसके अलावा वो भागम भाग 2 में भी नजर आएंगे। आखिरी बार एक्टर अक्षय कुमार के साथ ‘वेलकम टू द जंगल’ में नजर आए थे। इस फिल्म को इंडिया टीवी ने 3 स्टार दिए हैं।
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