
रामानंद सागर के नाम का जिक्र जब भी आता है तो लोगों को ‘रामायण’ याद आ जाती है, जिसकी सफलता के चर्चे आज भी होते हैं। अरुण गोविल से लेकर दीपिका चिखलिया, अरविंद त्रिवेदी तक को इस पौराणिक धारावाहिक ने घर-घर में मशहूर कर दिया। लेकिन, रामानंद सागर का नाम सिर्फ ‘रामायण’ तक ही सीमित नहीं है, उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों की कहानी भी लिखी है। ऐसे ही 1949 में भी एक फिल्म रिलीज हुई थी, जिसकी कहानी रामानंद सागर ने लिखी थी। वहीं फिल्म में राज कपूर और नरगिस दत्त मुख्य भूमिका में नजर आए और इसका निर्देशन भी राज कपूर ने ही किया था। यही वो फिल्म थी, जिसने राज कपूर को देश के उभरते निर्देशकों में स्थापित कर दिया। हम बात कर रहे हैं 1949 में रिलीज हुई ‘बरसात’ की, जिसने बॉक्स ऑफिस पर खूब धूम मचाई थी।
10 में से 9 गानों को लता मंगेशकर ने दी आवाज
2 घंटे 51 मिनट लंबी फिल्म ‘बरसात’ की कहानी और कलाकार ही नहीं, इसके गाने भी खूब पॉपुलर हुए थे। इस फिल्म में 10 गाने थे और हैरानी की बात ये कि उनमें से 9 गानों में तो लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। वहीं इसकी कहानी मशहूर फिल्ममेकर रामानंद सागर ने लिखी थी और निर्देशन की कमान हिंदी सिनेमा के शोमैन कहलाया यानी राज कपूर ने संभाली थी।
हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्म
करीब 77 साल पहले यानी 1949 में रिलीज हुई फिल्म ‘बरसात’ आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार और ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म से राज कपूर इंडस्ट्री के बड़े निर्देशक के रूप में स्थापित हुए और नरगिस के साथ उनकी जोड़ी भी अमर हो गई। इस फिल्म की कहानी आज भी रोमांस और भावुकता का पर्याय बनी हुई है। खास बात तो ये है कि राज कपूर ने इस फिल्म में अभिनय करने और निर्देशन की कमान संभालने के अलावा भी इसमें बड़ा योगदान दिया था। वह इस फिल्म के प्रोड्यूसर भी थे।
निम्मी की पहली फिल्म
इस फिल्म में अभिनेत्री निम्मी ने भी काम किया था, जो उनकी पहली फिल्म थी। वहीं प्रेम नाथ भी इस फिल्म में मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म की कहानी दो दोस्तों प्राण (राज कपूर) और गोपाल (प्रेम नाथ) के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों दोस्तों के पास बेशुमार पैसा है और छुट्टियां मनाने के लिए दोनों पहाड़ी इलाके में जाते हैं। यहां प्राण, रेशमा (नरगिस) से मिलता है और पहली ही नजर में उसे दिल दे बैठता है। वहीं गोपाल की मुलाकात नीला (निम्मी) से होती है। दोस्त होते हुए भी प्राण और गोपाल अलग-अलग मिजाज के हैं। प्राण संवेदनशील और सच्चा है तो वहीं गोपाल रंगीन मिजाज का है। फिल्म में प्यार, त्याग, विश्वासघात और दर्द की भावनाओं को जिस संजीदगी से पेश किया गया है, वह आज की फिल्मों से मिसिंग है।
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