
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने इंस्टाग्राम पर एक दिलचस्प वीडियो शेयर किया है, जिसमें ईरान के बंदर अब्बास में स्थित एक प्राचीन हिंदू विष्णु मंदिर दिखाया गया है। अपनी पोस्ट में इस मेगास्टार ने बताया कि यह मंदिर 1892 में कजार काल के दौरान भारत के उन हिंदू व्यापारियों के लिए बनवाया गया था, जो उस समय इस शहर में काम कर रहे थे। फैंस इस मंदिर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की खूब तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर अमिताभ बच्चन का ये नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
अमिताभ बच्चन ने ईरान के विष्णु मंदिर का वीडियो किया पोस्ट
वीडियो शेयर करते हुए बिग बी ने बताया कि इस क्लिप में इस्तेमाल किया गया गाना फारसी भाषा में है। उन्होंने आगे लिखा, ‘ईरान के बंदर अब्बास में स्थित प्राचीन हिंदू विष्णु मंदिर… 1892 में कजार काल के दौरान इसे भारत के उन हिंदू व्यापारियों के लिए बनवाया गया था जो उस समय इस शहर में काम कर रहे थे और यह गाना फारसी भाषा में है।’
ईरान के 134 साल पुराने ऐतिहासिक विष्णु मंदिर का वीडियो-
ईरान में स्थित बंदर अब्बास विष्णु मंदिर 19वीं सदी का एक हिंदू मंदिर है, जिसे 1892 (1310 A.H.) में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम करने वाले भारतीय समुदाय ने बनवाया था। सोशल मीडिया पर सांस्कृतिक किस्से और ऐतिहासिक जानकारियां साझा करने के लिए मशहूर अमिताभ अक्सर दुनिया भर की दिलचस्प बातें अपने फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं।
अमिताभ बच्चन की आने वाली फिल्में
अमिताभ ‘कल्कि 2898 AD’ के सीक्वल के लिए तैयारी कर रहे हैं, जिसमें वह अश्वत्थामा की अपनी भूमिका को फिर से निभाएंगे। इसके बाद उनकी अगली फिल्म कोर्टरूम ड्रामा ‘सेक्शन 84’ भी लाइन में है। रिभु दासगुप्ता द्वारा निर्देशित इस फिल्म में डायना पेंटी, निमरत कौर और अभिषेक बनर्जी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। हालांकि, फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन मेकर्स ने अभी तक इसकी रिलीज डेट की घोषणा नहीं की है।
ऐतिहासिक विष्णु मंदिर की खासियत
ईरान के बंदर अब्बास में स्थित विष्णु मंदिर का निर्माण 1892 में मोहम्मद हसन खान साद-उल-मलेक के शासनकाल के दौरान हुआ था। यह मंदिर वहां रहने वाले भारतीय समुदाय ने बनवाया था। हिंदू देवता विष्णु को समर्पित यह मंदिर उन भारतीय व्यापारियों की उपस्थिति को दर्शाता है, जिनमें से कई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े थे जो इस क्षेत्र में सक्रिय थे। इस मंदिर को अब एक ऐतिहासिक स्मारक के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसका उपयोग एक स्थानीय मानवविज्ञान संग्रहालय के तौर पर भी किया गया है।
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