
भारतीय टेलीविजन के इतिहास में कुछ धारावाहिक ऐसे रहे हैं जिन्होंने समय की सीमाओं को लांघकर दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। 80 के दशक के उत्तरार्ध में जब रविवार की सुबह सड़कें सूनी हो जाया करती थीं, तब बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ ने एक ऐसा जादुई संसार रचा जिसने हर आयु वर्ग को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस पौराणिक गाथा में जहां श्री कृष्ण की सीख और अर्जुन की वीरता की चर्चा होती है, वहीं एक ऐसा पात्र भी था जिसकी विशाल काया और मायावी शक्तियों ने युद्ध के मैदान में खलबली मचा दी थी। उस भीमकाय योद्धा की एंट्री होते ही स्क्रीन पर एक अलग ही रोमांच छा जाता था, लेकिन उस भारी-भरकम गेटअप और रहस्यमयी मुस्कान के पीछे छिपे कलाकार को लेकर आज भी बहुत से प्रशंसक दुविधा में रहते हैं।
अभिनय से जीवंत हुआ पौराणिक पात्र
महाभारत के भीषण युद्ध में घटोत्कच का किरदार एक निर्णायक मोड़ लेकर आता है। इस चुनौतीपूर्ण भूमिका को पर्दे पर उतारने का श्रेय अभिनेता रजाक खान को जाता है। उन्होंने इस चरित्र में ऐसी जान फूंकी कि दर्शक आज भी उनकी उस गूंजती हुई आवाज और प्रभावशाली शरीर सौष्ठव को भूल नहीं पाए हैं। घटोत्कच के रूप में रजाक खान का स्क्रीन प्रेजेंस इतना शक्तिशाली था कि उनके सामने बड़े-बड़े योद्धा भी बौने नजर आते थे। उनकी अदाकारी की विशेषता यह थी कि उन्होंने केवल अपनी कद-काठी का उपयोग नहीं किया, बल्कि अपनी आंखों और चेहरे के भावों से उस हिडिंबा पुत्र के शौर्य और बलिदान को बखूबी महसूस कराया।
रजाक खान।
सिनेमाई सफर: छोटे पर्दे से बड़े पर्दे तक की राह
रजाक खान की प्रतिभा केवल टेलीविजन की दुनिया तक ही सीमित नहीं रही। ‘महाभारत’ से मिली अपार लोकप्रियता के बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा का रुख भी किया। उन्हें ‘गुलाम’ और ‘अचानक’ जैसी चर्चित फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हुए देखा गया। हालांकि बॉलीवुड में उनका करियर बहुत लंबा नहीं खिंचा, लेकिन उन्होंने जितने भी मौके मिले, उनमें अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया। फिल्म जगत में उन्हें एक ऐसे कलाकार के रूप में देखा जाता था जो गंभीर और भारी-भरकम किरदारों को पूरी सहजता के साथ निभाने में सक्षम थे।
जब एक जैसे नाम ने पैदा की उलझन
फिल्म जगत के इतिहास में रजाक खान के नाम को लेकर अक्सर एक दिलचस्प भ्रम की स्थिति बनी रहती है। दरअसल बॉलीवुड में एक और मशहूर अभिनेता रजाक खान थे, जिन्हें लोग उनकी बेहतरीन कॉमेडी और ‘माणिकचंद’ जैसे किरदारों के लिए जानते थे। नाम की समानता के कारण अक्सर दर्शक इन दोनों कलाकारों के बीच अंतर नहीं कर पाते। जहां एक रजाक खान अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर थे, वहीं महाभारत वाले रजाक खान अपनी संजीदगी, रौबदार व्यक्तित्व और गंभीर अभिनय शैली के लिए पहचाने जाते थे।
विशिष्ट बनावट और अंतरराष्ट्रीय तुलना
रजाक खान की शारीरिक बनावट और चेहरे के नैन-नक्श उन्हें अन्य अभिनेताओं से बिल्कुल अलग खड़ा करते थे। उनकी तुलना अक्सर मशहूर अंतरराष्ट्रीय अभिनेता और पहलवान मिल्टन रीड से की जाती थी। दोनों के बीच की यह समानता इतनी गहरी थी कि कई बार लोग उन्हें भारतीय ‘मिल्टन रीड’ भी कहकर संबोधित करते थे। इसी प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण उन्हें घटोत्कच जैसे महान और मायावी चरित्र के लिए चुना गया था। आज भले ही तकनीक बहुत आगे निकल गई है, लेकिन रजाक खान द्वारा निभाया गया वह किरदार आज भी मौलिकता और जीवंतता की मिसाल माना जाता है।
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