
भारतीय सिनेमा में जब भी विलेन्स का जिक्र होता है अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा, डैनी डेंग्जोंग्पा और अमजद खान जैसे सितारों के चेहरे आंखों के सामने आ जाते हैं, जिन्होंने अपने किरदारों से दर्शकों को खूब डराया। फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई कलाकार रहे हैं, जिन्होंने बड़े पर्दे पर विलेन बनकर पॉपुलैरिटी हासिल की और आखिरी समय तक फिल्मी दुनिया पर कब्जा जमाए रहे। लेकिन, कुछ ऐसे भी कलाकार हैं जिन्होंने पॉपुलैरिटी मिलने के कुछ सालों बाद फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली। इन्हीं कलाकारों में से एक हैं डैन धनोआ, जो 70-80 के दशक के पॉपुलर विलेन थे। डैन धनोआ ने कई फिल्मों में विलेन के रोल निभाए और अपने अभिनय का लोहा मनवाया। लेकिन, फिर उन्होंने अचानक इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला किया और मर्चेंट नेवी में सेलर बन गए।
माता-पिता चाहते थे डॉक्टर बने बेटा
डैनी ने अपने फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। अमिताभ बच्चन स्टारर ‘मर्द’ में भी उन्होंने अपने किरदार की ऐसी छाप छोड़ी कि आज भी लोग इन्हें इस किरदार के लिए याद करते हैं। इस फिल्म में डैन धनोआ घोड़े में बैठकर एंट्री लेते हैं और कहते हैं- ‘मैं हूं जनरल डायर का बेटा डैनी।’ अपने इस किरदार से उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन, ये बात और है कि उनके माता-पिता उनके फिल्मों में एंट्री के फैसले से खुश नहीं थे। डैन धनोआ के पिता चाहते थे कि बेटा अपनी मां की तरह डॉक्टर बने, लेकिन किस्मत उन्हें एक्टिंग तक ले आई।
माता-पिता थे आर्मी अफसर
डैन धनोआ का जन्म जालंधर के एक सिख परिवार में हुआ था और उनका असली नाम इंद्रप्रीत सिंह धनोआ है। फिल्मों में आने के बाद उनका नाम डैन धनोआ हो गया। उनके पिता मेजर जनरल सरदार सिंह धनोआ थे और मां कैप्टन डॉक्टर परमजीत कौर धनोआ आर्मी में डॉक्टर थीं। इसीलिए डैन के माता-पिता चाहते थे कि वह भी डॉक्टर बनें। लेकिन, डैन की किस्मत में तो एक्टिंग थी। धनोआ ने बताया था कि उनके दिमाग में कभी भी एक्टिंग में करियर बनाने का ख्याल नहीं आया था। लेकिन, उन्होंने मॉडलिंग में जरूर किस्मत आजमाई। इसी दौरान 1984 में फिरोज खान की उन पर नजर पड़ी, जिन्होंने उन्हें अपनी फिल्म ‘जानबाज’ में साइन कर लिया।
नहीं आती थी एक्टिंग
डैन को जब फिरोज खान ने अपनी फिल्म में कास्ट किया, उन्हें एक्टिंग नहीं आती थी। ऐसे में उन्होंने एक्टिंग वर्कशॉप में हिस्सा लिया। लेकिन, फिर फिरोज खान की ये फिलम बंद हो गई और फिर जब 1986 में ‘जानवर’ आई तो फिरोज खान ने डैन को कोई रोल नहीं दिया, जिससे दोनों के रास्ते अलग हो गए। फिर धनोआ को मनमोहन देसाई की ‘मर्द’ मिली, जिसने उनकी किस्मत चमका दी। विलेन के रोल से वह हर तरफ छा गए और फिर उन्होंने ‘त्रिदेव’, ‘विश्वात्मा’, ‘फूल और कांटे’ और ‘तूफान’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों को इंप्रेस किया।
क्यों छोड़ी एक्टिंग?
90 के दशक के बाद डैन धनोआ ने हमेशा-हमेशा के लिए एक्टिंग से दूरी बना ली। ‘चाय के साथ दिल की बात’ यूट्यूब चैनल के साथ बातचीत में डैन धनोआ ने अपने फैसले की वजह बताते हुए कहा था- ‘मैं आउटसाइडर था, फिल्म इंडस्ट्री से मेरा कोई लेना-देना नहीं था। मुझे वहां के तौर-तरीकों की समझ नहीं थी। जैसे काम कैसे मांगना है, पेमेंट कैसे मांगना है, मैं नहीं जानता था।’ धनोआ के अनुसार, वह कुछ प्रोड्यूसर्स के बर्ताव से भी आहत थे, जिसके चलते उन्होंने 90 के दशक के आखिरी में बॉलीवुड छोड़ दिया।
मर्चेंट नेवी में बने सेलर
फिल्मों से दूर होने के बाद डैन धनोआ ने मर्चेंट नेवी में वापसी की और बतौर सेलर और नेवल अफसर काम कर रहे हैं। वह अब चंडीगढ़ में रहते हैं और यहां उनका Anchorage 42 नाम का एक होमस्टे भी है, जिसे वह पत्नी और अभिनेत्री नंदिता पुरी के साथ मिलकर चलाते हैं। यही नहीं, डैन एक पेंटर भी हैं। नंदिता पुरी की बात करें तो वह जानी-मानी एक्ट्रेस और कथक डांसर हैं। यही नहीं, वह अपनी डांस एकेडमी भी लाती हैं। डैन धनोआ यूं तो एक्टिंग छोड़ चुके हैं, लेकिन 2020 में वह ‘सोरारई पोटरू’ में जरूर नजर आए थे, जिसमें उन्होंने विजय माल्या से प्रेरित किरदार निभाया था।
ये भी पढ़ेंः आर्थिक तंगी में यूट्यूबर ने बेच दीं 10 करोड़ की बाइकें, दिखाया खाली गैराज का नजारा, हुआ इमोशनल
Doonited Affiliated: Syndicate News Hunt
This report has been published as part of an auto-generated syndicated wire feed. Except for the headline, the content has not been modified or edited by Doonited






