
80 के दशक का वह दौर जब टीवी पर ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ जैसे धारावाहिक शुरू होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था, आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। इन महाकाव्यों के किरदारों को निभाने वाले कलाकार दर्शकों के लिए किसी देवता से कम नहीं थे, लेकिन ग्लैमर की इस चकाचौंध भरी दुनिया में एक ऐसा चेहरा भी था, जिसने अपनी नीली आंखों और सादगी से करोड़ों दिलों पर राज किया, पर फिर वह अचानक गुमनामी के अंधेरों में कहीं खो गई। एक ऐसी अभिनेत्री, जिसने भगवान श्री कृष्ण की अर्धांगिनी का रूप धरा, लेकिन सफलता के शिखर पर पहुंचकर उनका यूं गायब हो जाना आज भी एक अनसुलझी पहेली जैसा लगता है।
महाभारत की ‘रुक्मणी’ का शुरुआती सफर
दूरदर्शन के ऐतिहासिक शो ‘महाभारत’ (1988) में देवी रुक्मणी का महत्वपूर्ण और गरिमामयी किरदार निभाने वाली इस अभिनेत्री का नाम चन्ना रुपारेल है। चन्ना ने अपने करियर की शुरुआत एक मॉडल के तौर पर की थी और साल 1987 में उन्होंने दूरदर्शन के ही प्रसिद्ध शो ‘चुनौती’ के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रखा। अपनी स्वाभाविक एक्टिंग और सौम्य व्यक्तित्व के कारण उन्हें जल्द ही ‘महाभारत’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने का मौका मिला। रुक्मणी के किरदार में उन्होंने ऐसी जान फूंकी कि लोग उन्हें असल जीवन में भी उसी सम्मान से देखने लगे। हालांकि जब उनका करियर परवान चढ़ रहा था, तभी वह अचानक फिल्म इंडस्ट्री और टीवी की दुनिया से ओझल हो गईं, जिससे उनके प्रशंसक काफी हैरान रह गए।
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‘स्वाभिमान’ से वापसी और नीली आंखों का जादू
सालों के लंबे इंतजार और खामोशी के बाद, चन्ना रुपारेल ने 1994 में मशहूर टीवी सीरियल ‘स्वाभिमान’ के जरिए छोटे पर्दे पर जोरदार वापसी की। इस शो में उन्होंने ‘मेधा हेगड़े’ का किरदार निभाया, जिसने उन्हें एक बार फिर घर-घर में पहचान दिलाई। इस दौरान चन्ना अपनी खूबसूरती, खासकर अपनी रहस्यमयी नीली आंखों की वजह से काफी चर्चा में रहीं। उनकी अदाकारी में वह गहराई थी कि दर्शकों को लगा अब चन्ना रुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों में भी हाथ आजमाया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ‘स्वाभिमान’ की सफलता के बाद जब उनके पास बड़े ऑफर्स की कतार होनी चाहिए थी, वह फिर से एक बार ग्लैमर जगत से पूरी तरह गायब हो गईं।
आध्यात्म की राह और वर्तमान जीवन
आज 55 साल की हो चुकीं चन्ना रुपारेल अभिनय की दुनिया से कोसों दूर हैं। अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर वह इंडस्ट्री में टिकी रहतीं तो शायद आज उनका नाम दिग्गज अभिनेत्रियों की सूची में शुमार होता। दरअसल चन्ना का झुकाव हमेशा से आध्यात्मिकता की ओर रहा है। वह भगवान शिव की भक्त हैं और अपना अधिकांश समय धार्मिक चीजों और शांतिपूर्ण जीवन जीने में व्यतीत करती हैं। हालांकि वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और अपने प्रशंसकों से जुड़ी रहती हैं, लेकिन कैमरे के सामने लौटने की उनकी कोई योजना नजर नहीं आती। चन्ना की कहानी मनोरंजन जगत के उस कड़वे सच को भी दर्शाती है, जहां अपार प्रसिद्धि मिलने के बावजूद कलाकार शांति की तलाश में एकांत को चुन लेते हैं। आज भी जब ‘महाभारत’ के उस दौर की बात होती है, तो नीली आंखों वाली उस ‘रुक्मणी’ की कमी दर्शकों को जरूर खलती है।
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